चुनाव आयोग स्वतंत्र है, मृतकों के नाम पर होता था फर्जी मतदान: ओम प्रकाश राजभर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 26 सितंबर 2026 को लखनऊ में चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों, विपक्ष की आलोचना और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की कार्यवाही पारदर्शी और न्यायसंगत रही है।
चुनाव आयोग पर राजभर का बचाव
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठ रहे सवालों के जवाब में राजभर ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत है, जांच होगी। चुनाव आयोग स्वतंत्र है, उसकी ओर से जो किया गया है वो अच्छा किया गया है। क्योंकि हर विधानसभा में कम से कम 10-15 हजार मृतक लोगों का नाम था। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से मृतकों का नाम हटा दिया है तो विपक्ष को बुरा लग रहा है। उनके नाम पर फर्जी मतदान किया जाता था।' यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची की शुद्धता पर विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
विपक्ष पर सीधा निशाना
विपक्ष की ओर से चुनाव निरस्त किए जाने की मांग पर राजभर ने पलटवार करते हुए कहा, 'ऐसे लोग खुद इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे हैं, पहले उनको इस्तीफा देना चाहिए तब ये बात कहनी चाहिए। इन लोगों को जनता नकार चुकी है, फिर भी ये लोग बोल रहे हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ईवीएम को दोष दिया जाता था और अब चुनाव आयोग को निशाना बनाया जा रहा है।
शिवपाल यादव और अजय राय पर टिप्पणी
शिवपाल यादव की ओर से कांग्रेस पर साधे गए निशाने पर राजभर ने कहा, 'शिवपाल यादव जसवंतनगर के ठेकेदार बन गए हैं, लेकिन समय बताएगा। कहना एक बात है, करना कठिन होता है।' वहीं, अजय राय के विपक्षी गठबंधन संबंधी बयान पर उन्होंने कहा कि राय को विधानसभा चुनाव की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
जौहर यूनिवर्सिटी मामले में कोर्ट का संज्ञान
जौहर यूनिवर्सिटी मामले में न्यायालय की ओर से रिकॉर्ड मांगे जाने पर राजभर ने कहा, 'कोर्ट की ओर से मांगा गया है तो डीएम को रिपोर्ट दें। अगर कोर्ट ने संज्ञान में लिया है तो इन लोगों को रिपोर्ट देनी होगी।' गौरतलब है कि यह मामला उत्तर प्रदेश में राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद मतदाता सूची शुद्धिकरण की प्रक्रिया और उसकी जांच अगले कुछ हफ्तों में निर्णायक मोड़ ले सकती है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नज़दीक आते देख सभी दलों की राजनीतिक सक्रियता भी बढ़ने के आसार हैं।