एसआईआर पर विपक्ष के आरोपों पर ओपी राजभर का पलटवार: 'जनता वोट नहीं दे रही, इसलिए आयोग पर निशाना'
सारांश
मुख्य बातें
योगी सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 27 सितंबर 2026 को लखनऊ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार किया। राजभर ने कहा कि जब जनता ने इन दलों को वोट देना बंद कर दिया है, तब ये नेता संवैधानिक संस्थाओं पर निराधार आरोप लगा रहे हैं।
एसआईआर पर राजभर का पक्ष
राजभर ने स्पष्ट किया कि एसआईआर कोई नई या असाधारण प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने कहा, 'एसआईआर का काम 1952 से हो रहा है — 1965, 1966 और 2003 में भी हुआ था। मतदाता सूची में जो मृतक हैं उनके नाम हटाए जा रहे हैं और जिन्होंने कई जगह नाम दर्ज करा रखे हैं, उनका नाम एक ही स्थान पर रखा जा रहा है।' उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव आयोग ने नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 और नाम कटवाने के लिए फॉर्म 7 का विकल्प सबके लिए खुला रखा है।
राजभर ने अपनी खुद की विधानसभा का हवाला देते हुए कहा कि वहाँ 16,000 मतदाता मृतक पाए गए और उनके नाम सूची से हटाए गए। उन्होंने अनुमान लगाया कि उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों में यह संख्या कहीं 10,000, कहीं 12,000 और कहीं 20,000 तक है।
अखिलेश यादव की चुनावी हार और राजभर का तंज
राजभर ने अखिलेश यादव की लगातार चुनावी पराजयों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश 2017 का विधानसभा चुनाव, 2019 का लोकसभा चुनाव और 2022 का चुनाव भी हारे, और उनके अनुसार वे 2027 का चुनाव भी हारेंगे। राजभर का आरोप था कि अखिलेश यादव की सरकार में उन्होंने अपनी जाति को ही सरकारी विभागों, थानों, तहसीलों और ब्लॉकों में तरजीह दी, जिससे नाई, पाल, प्रजापति, बिंद, निषाद, केवट, कश्यप, राजभर, चौहान, चौरसिया और जुलाहा जैसी तमाम बिरादरियाँ उनसे दूर हो गई हैं।
यादव समाज में बिखराव का दावा
राजभर ने यादव समाज में विभाजन का उल्लेख करते हुए कहा कि अब दो तरह के यादव हैं — एक वे जो संपन्न हैं और अखिलेश के साथ हैं, और दूसरे वे जो गाय-भैंस रखकर दूध बेचते हैं और अपने बच्चों को पढ़ाते हैं। उनके अनुसार, यह दूसरा वर्ग अब अखिलेश को छोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जा चुका है।
विपक्ष पर देश की छवि बिगाड़ने का आरोप
राजभर ने विपक्षी नेताओं पर संवैधानिक संस्था — चुनाव आयोग — के खिलाफ बोलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि खराब करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने माँग की कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी जनता से माफी माँगें। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि पहले ये मृतक और फर्जी मतदाताओं का उपयोग करते थे, अब जब वे सूची से हट गए हैं तो घबराहट हो रही है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे का रुख
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन के तहत सपा और कांग्रेस की बीच गठबंधन की बातचीत चल रही है। राजभर ने सुझाया कि अखिलेश को पहले राहुल गांधी से पूछना चाहिए कि उनके कार्यकाल में एसआईआर कैसे कराया गया था, कितने नाम जोड़े और घटाए गए। चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को लेकर पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पारदर्शिता का हवाला दिया है। आने वाले हफ्तों में एसआईआर की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद यह राजनीतिक विवाद और तेज होने की संभावना है।