क्या अखिलेश अपने पिता और चाचा की मेहनत से मुख्यमंत्री बने थे, अब क्या नहीं बन पाएंगे? : ओपी राजभर

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क्या अखिलेश अपने पिता और चाचा की मेहनत से मुख्यमंत्री बने थे, अब क्या नहीं बन पाएंगे? : ओपी राजभर

सारांश

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पिता और चाचा की मेहनत से ही वे मुख्यमंत्री बने थे। अब मतदाता सूची में किए गए बड़े कटौती पर भी चर्चा की। जानें इस पर क्या कहा गया है।

Key Takeaways

  • अखिलेश यादव को लेकर ओम प्रकाश राजभर के बयान ने राजनीतिक हलचल पैदा की है।
  • उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
  • नए 'विकसित भारत-जी-राम जी' विधेयक से ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
  • मनरेगा के तहत काम के दिन बढ़ाए गए हैं।
  • किसानों के लिए विशेष योजनाएं बनाई गई हैं।

सुल्तानपुर, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान लगभग 2 करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इस मुद्दे पर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी, समाजवादी पार्टी, ने सरकार पर हमला बोला है। इसी संदर्भ में शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा।

ओम प्रकाश राजभर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "अखिलेश जी एक शिक्षित व्यक्ति हैं। वे अच्छी तरह से जानते हैं कि उन्हें दोबारा सत्ता में आने का अवसर नहीं मिलेगा। वे अपने पिता और चाचा की मेहनत की कमाई पर मुख्यमंत्री बने हैं। यह सभी को पता है कि लगभग 86 लाख मतदाता प्रदेश में मृतक पाए गए हैं, तो अगर उनका नाम मतदाता सूची में है, तो उन्हें कैसे शामिल किया जा सकता है? इस मामले में अखिलेश जी ही उन्हें स्वर्ग से वापस ला सकते हैं। यह हमारे बस की बात नहीं है।"

उन्होंने आगे कहा, "लगभग 2 लाख 23 हजार मतदाता ऐसे हैं जो गांव से शहर आए हैं और उन्होंने वोटर लिस्ट में अपना नाम गांव और शहर दोनों जगह पर दर्ज कराया है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में एक स्थान पर नाम तय करने का नियम बनाया है। ऐसे में अब अखिलेश को चुनाव आयोग को समझाना होगा कि मतदाताओं का नाम दोनों जगहों पर रखा जाए।"

राजभर ने 'विकसित भारत-जी-राम जी' विधेयक की सराहना करते हुए इसे एक सुधारात्मक प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा, "मनरेगा का नाम बदलकर 'विकसित भारत-जी-राम जी' रखा गया है, जिसका उद्देश्य केवल ग्रामीण रोजगार और कल्याण योजना के रूप में नहीं, बल्कि विकास से जुड़ी गारंटी के रूप में स्थापित करना है, ताकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण के अनुरूप हो।"

राजभर ने कहा, "इस अधिनियम का लक्ष्य ग्रामीण रोजगार को आधुनिक बनाना है। इसके अलावा, मनरेगा की पुरानी कमजोरियों को दूर करने के लिए तकनीक पर आधारित पारदर्शिता, मजबूत जवाबदेही और दीर्घकालिक ग्रामीण उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। हर ग्रामीण परिवार को मिलने वाला निश्चित रोजगार, जो पहले 100 दिनों का था, अब बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। इसके साथ ही खेती करने वाले किसानों के लिए 60 दिन आरक्षित किए गए हैं। इस प्रकार यह अधिनियम 185 दिनों के काम की गारंटी देता है, जो कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त अधिकार बन गया है।"

मंत्री ने कहा, "रोजगार को चार क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जिसमें जल सुरक्षा, ग्रामीण संरचना, आजीविका संपत्ति और जलवायु संरक्षण के काम शामिल हैं। किसानों के हितों की रक्षा की गई है। यदि एप्लीकेशन देने के 15 दिन के भीतर काम नहीं मिलता है, तो व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता मिलेगा।"

Point of View

NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अपने पिता और चाचा की मेहनत की कमाई पर मुख्यमंत्री बने हैं और अब उन्हें दोबारा सत्ता में नहीं आने का बनता है।
मतदाता सूची में कितने मतदाताओं के नाम काटे गए?
लगभग 2 करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं।
राजभर ने किस नए विधेयक की तारीफ की?
'विकसित भारत-जी-राम जी' विधेयक की तारीफ की है।
मनरेगा में क्या बदलाव किया गया है?
मनरेगा में रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 दिन किए गए हैं।
क्या रोजगार के क्षेत्र में कोई नई योजना आई है?
हाँ, रोजगार को चार क्षेत्रों में बांटा गया है, जिसमें जल सुरक्षा और ग्रामीण संरचना शामिल हैं।
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