क्या वायु प्रदूषण पर कांग्रेस का हमला केंद्र सरकार को जगाएगा?
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस ने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है।
- एनसीएपी अब एक कागजी कार्यक्रम बनकर रह गया है।
- भारत के 44% शहर गंभीर वायु प्रदूषण से प्रभावित हैं।
- सरकार को एनसीएपी के फंड में वृद्धि करनी चाहिए।
- कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के लिए मानकों को लागू किया जाना चाहिए।
नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस पार्टी ने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) अब 'नोशनल' क्लीन एयर प्रोग्राम के रूप में बदल गया है, अर्थात् यह केवल कागजी दस्तावेज बनकर रह गया है।
जयराम रमेश ने रविवार को एक बयान में कहा, "सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के एक नए अध्ययन ने यह साबित कर दिया है कि भारत में वायु गुणवत्ता एक गंभीर संकट बन चुकी है, और इस पर सरकार का जवाब असंतोषजनक और अपर्याप्त है।" इस अध्ययन में यह बताया गया है कि भारत के लगभग 44 प्रतिशत नगर लगातार वायु प्रदूषण के गंभीर प्रभाव में हैं।
उन्होंने कहा कि जिस एनसीएपी को नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, वह वास्तव में नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम बन गया है। अब इसकी गहन समीक्षा और सुधार की तत्काल आवश्यकता है।
जयराम रमेश ने कहा, "पहला कदम यह स्वीकार करना होना चाहिए कि भारत के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। इसी संकट को ध्यान में रखते हुए एयर पॉल्यूशन (कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) एक्ट, 1981 और नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (एनएएक्यूएस) की पुनर्समीक्षा और व्यापक सुधार की आवश्यकता है।"
कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार को एनसीएपी के तहत मिलने वाले फंड में वृद्धि करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि "एनसीएपी को 25 हजार करोड़ रुपए का कार्यक्रम बनाया जाना चाहिए और इसे देश के सबसे अधिक प्रदूषित 1,000 शहरों और कस्बों तक विस्तारित किया जाना चाहिए।"
उन्होंने यह भी कहा कि एनसीएपी को अपने प्रदर्शन का मानक पीएम 2.5 के स्तर को बनाना चाहिए। जयराम रमेश ने मांग की कि कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के लिए निर्धारित वायु प्रदूषण मानकों को तत्काल लागू किया जाना चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 10 सालों में वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर प्रभावों को कमतर दिखाने का प्रयास किया गया है। सरकार सच से अज्ञात नहीं है, बल्कि यह अपनी अक्षमता को छिपाने की कोशिश कर रही है।