ओपी राजभर का सवाल: एसआईआर में गड़बड़ी हुई तो सपा-बसपा के बीएलओ क्या कर रहे थे?
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने 18 अक्टूबर 2026 को आजमगढ़ में मीडिया से बात करते हुए मतदाता सूची (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पर पलटवार किया। राजभर ने तीखे अंदाज़ में पूछा कि अगर एसआईआर में त्रुटियाँ हुई हैं, तो इन दलों के बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) उस दौरान क्या कर रहे थे।
एसआईआर विवाद पर राजभर का पलटवार
मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री राजभर ने कहा, 'अगर एसआईआर में कोई गलतियाँ हुई हैं तो चुनाव आयोग समय-समय पर उन्हें सुधारने के अवसर देता है। अगर कोई त्रुटि है तो जिम्मेदारी उस व्यक्ति की है जो बूथ पर गया और बूथ लेवल अधिकारी के रूप में काम किया।' उन्होंने आगे कहा, 'हर पार्टी ने अपने बूथ-स्तरीय प्रतिनिधि नियुक्त किए थे। सपा, बसपा या दूसरी पार्टियों के बीएलओ जो इस कार्य में लगे हुए थे, वे क्या देख रहे थे। इनके बीएलओ क्या सिर्फ सो रहे थे।'
गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने हाल ही में मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। राजभर का यह बयान उसी संदर्भ में आया है और भाजपा-सुभासपा गठबंधन की ओर से एक सुनियोजित जवाबी आख्यान की तरह प्रतीत होता है।
कोलकाता घटना पर प्रतिक्रिया
मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कोलकाता में हुई हालिया घटना को 'दुखद' बताया। उन्होंने कहा, 'यह घटना दुखद है, वहाँ के मुख्यमंत्री ने जो ऐलान किया है, वह पीड़ित परिवार को राहत देने का काम है।' राजभर ने प्रधानमंत्री द्वारा दी गई सहायता राशि को भी 'अच्छा कदम' करार दिया।
रिजीम चेंज और बांग्लादेश तुलना पर स्पष्टीकरण
हाल ही में चर्चा में आए 'रिजीम चेंज' वाले बयान पर राजभर ने दो-टूक कहा, 'भारत और बांग्लादेश की तुलना संवैधानिक रूप से नहीं की जा सकती। भारत में ऐसा संभव नहीं है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ राजनीतिक हलकों में भारतीय लोकतंत्र की स्थिरता को लेकर बहस छिड़ी हुई है।
अभिजीत दिपके की जमानत और मार्च प्रतिबंध
अभिजीत दिपके की जमानत और मार्च पर प्रतिबंध के सवाल पर राजभर ने संक्षेप में कहा, 'यह अदालत का मामला है।' मार्च पर प्रतिबंध को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया, 'जहाँ अगर आपको अनुमति न हो, अगर वहाँ कार्यक्रम करेंगे, तो आप पर कार्रवाई नहीं होगी क्या।'
राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर पूर्व में साधा था निशाना
इससे पहले 17 अक्टूबर को राजभर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा था, 'राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने हमेशा संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। वे उसी चुनाव आयोग के तहत सांसद बने, जिसकी वे अब आलोचना कर रहे हैं।' उन्होंने कहा था, 'अगर उनका दावा है कि गड़बड़ियाँ हो रही हैं और वोट चुराए जा रहे हैं, तो उन्हें भी इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वे भी इसी व्यवस्था के तहत चुनाव जीते थे। हालाँकि, वे इस्तीफा देने की बात से पीछे हट रहे हैं।'
राजभर के इन बयानों से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची विवाद आगामी चुनावी मौसम तक एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना रहेगा।