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चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था, ज्ञानेश कुमार हटाने की प्रक्रिया नहीं जानते राहुल: ओपी राजभर

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चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था, ज्ञानेश कुमार हटाने की प्रक्रिया नहीं जानते राहुल: ओपी राजभर

सारांश

यूपी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने लखनऊ मार्च में विपक्ष पर दोहरा हमला बोला — चुनाव आयोग को संवैधानिक संस्था बताकर उसे क्लीन चिट दी और राहुल गांधी को मुख्य चुनाव आयुक्त हटाने की प्रक्रिया न जानने पर घेरा। मतदाता सूची और धार्मिक आस्था — दोनों मोर्चों पर विपक्ष को निशाने पर लिया।

मुख्य बातें

यूपी मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 3 नवंबर 2026 को लखनऊ में 'अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ' मार्च में भाग लिया।
राजभर ने चुनाव आयोग को संवैधानिक संस्था बताते हुए BJP और NDA पर लगाए गए आरोपों को निराधार कहा।
राहुल गांधी की मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर राजभर ने कहा कि इस प्रक्रिया में लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति की भूमिका होती है।
राजभर ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि पहले मृत मतदाताओं के नाम पर वोट डलवाए जाते थे, इसीलिए नाम हटने से उन्हें आपत्ति है।
अखिलेश यादव द्वारा धीरेंद्र शास्त्री की आलोचना पर राजभर ने उन पर भगवान कृष्ण में आस्था न रखने और राजनीतिक दोगलेपन का आरोप लगाया।

उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 3 नवंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित 'अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ' मार्च में भाग लेते हुए चुनाव आयोग को पूरी तरह संवैधानिक संस्था करार दिया और विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को इस प्रक्रिया की बुनियादी जानकारी तक नहीं है।

चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोप निराधार: राजभर

राजभर ने स्पष्ट कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और वह अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही है। उनके अनुसार, आयोग के कामकाज को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पर आरोप लगाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दल बूथ स्तर पर मतदाता सूची में अपने वोट जोड़ने और घटाने का काम करते हैं।

राजभर ने यह भी कहा कि मतदाता सूची से उन नामों का हटाया जाना पूरी तरह स्वाभाविक है जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या BJP को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

मृत मतदाताओं के नाम हटाने पर विपक्ष की चिंता क्यों?

राजभर ने विपक्ष पर सीधा आरोप लगाया कि पहले चुनावों के दौरान मृत व्यक्तियों के नाम पर भी मतदान कराया जाता था। अब जब ऐसे नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं तो विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर शोर मचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की यही बेचैनी उनकी असली मंशा को उजागर करती है।

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी दलों ने राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किए हैं।

राहुल गांधी की ज्ञानेश कुमार हटाने की मांग पर राजभर का पलटवार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक विरोध जारी रहेगा। इस पर राजभर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी को मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया की जानकारी होती तो वह सड़क पर इस्तीफे की मांग नहीं करते। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति की भूमिका होती है।

राजभर ने राहुल गांधी को सलाह दी कि उन्हें पहले इस संवैधानिक प्रक्रिया को समझना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के एक पुराने वीडियो का भी उल्लेख किया जिसमें 'आलू डालने पर सोना निकलने वाली मशीन' के दावे की चर्चा थी, और इस पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी खुद कई बार अपनी बातों का अर्थ नहीं समझ पाते।

अखिलेश यादव और धार्मिक आस्था पर राजभर की टिप्पणी

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के एक बयान की समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा आलोचना किए जाने पर राजभर ने पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव भगवान कृष्ण को नहीं मानते और मथुरा व अयोध्या में दर्शन को लेकर भी उन पर सवाल उठाए।

राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव की राजनीति में कभी 'अली-अली' तो कभी 'बजरंगबली' के नारे दिखाई देते हैं — वह न इधर के रहे और न उधर के। यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण की बहस को और तीखा करती है।

आगे क्या

विपक्ष का 'अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ' अभियान कई राज्यों में जारी रहने की संभावना है। मतदाता सूची की शुचिता और चुनाव आयोग की स्वायत्तता का मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनावों तक राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न ही सरकार ने कोई सत्यापन-योग्य डेटा सार्वजनिक किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया की जानकारी का राजभर का तर्क तथ्यात्मक है, परंतु यह असली लोकतांत्रिक सवाल — कि चुनाव आयोग निष्पक्ष है या नहीं — को दरकिनार कर देता है। अखिलेश यादव पर धार्मिक टिप्पणी बताती है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम प्रकाश राजभर ने चुनाव आयोग के बारे में क्या कहा?
राजभर ने चुनाव आयोग को संवैधानिक संस्था बताते हुए कहा कि वह अपना काम कर रही है। उन्होंने आयोग के कामकाज को लेकर BJP और NDA पर लगाए गए आरोपों को निराधार करार दिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
राजभर के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति की भूमिका होती है — यह केवल सड़क पर मांग करने से संभव नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने राहुल गांधी को इस संवैधानिक प्रक्रिया को समझने की सलाह दी।
राजभर ने मतदाता सूची से नाम हटाने के मुद्दे पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाना स्वाभाविक है। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि पहले मृत मतदाताओं के नाम पर भी वोट डलवाए जाते थे, इसीलिए अब नाम हटने से विपक्ष में बेचैनी है।
'अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ' मार्च क्या है?
यह विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित एक राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन अभियान है। 3 नवंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित मार्च में राजभर ने सत्तापक्ष की ओर से जवाब दिया।
राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
राजभर ने अखिलेश यादव पर भगवान कृष्ण में आस्था न रखने का आरोप लगाया और मथुरा-अयोध्या दर्शन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश की राजनीति में कभी 'अली-अली' तो कभी 'बजरंगबली' के नारे दिखते हैं — वह न इधर के रहे, न उधर के।
राष्ट्र प्रेस
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