चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था, ज्ञानेश कुमार हटाने की प्रक्रिया नहीं जानते राहुल: ओपी राजभर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 3 नवंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित 'अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ' मार्च में भाग लेते हुए चुनाव आयोग को पूरी तरह संवैधानिक संस्था करार दिया और विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को इस प्रक्रिया की बुनियादी जानकारी तक नहीं है।
चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोप निराधार: राजभर
राजभर ने स्पष्ट कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और वह अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही है। उनके अनुसार, आयोग के कामकाज को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पर आरोप लगाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दल बूथ स्तर पर मतदाता सूची में अपने वोट जोड़ने और घटाने का काम करते हैं।
राजभर ने यह भी कहा कि मतदाता सूची से उन नामों का हटाया जाना पूरी तरह स्वाभाविक है जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या BJP को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
मृत मतदाताओं के नाम हटाने पर विपक्ष की चिंता क्यों?
राजभर ने विपक्ष पर सीधा आरोप लगाया कि पहले चुनावों के दौरान मृत व्यक्तियों के नाम पर भी मतदान कराया जाता था। अब जब ऐसे नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं तो विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर शोर मचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की यही बेचैनी उनकी असली मंशा को उजागर करती है।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी दलों ने राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किए हैं।
राहुल गांधी की ज्ञानेश कुमार हटाने की मांग पर राजभर का पलटवार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक विरोध जारी रहेगा। इस पर राजभर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी को मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया की जानकारी होती तो वह सड़क पर इस्तीफे की मांग नहीं करते। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति की भूमिका होती है।
राजभर ने राहुल गांधी को सलाह दी कि उन्हें पहले इस संवैधानिक प्रक्रिया को समझना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के एक पुराने वीडियो का भी उल्लेख किया जिसमें 'आलू डालने पर सोना निकलने वाली मशीन' के दावे की चर्चा थी, और इस पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी खुद कई बार अपनी बातों का अर्थ नहीं समझ पाते।
अखिलेश यादव और धार्मिक आस्था पर राजभर की टिप्पणी
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के एक बयान की समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा आलोचना किए जाने पर राजभर ने पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव भगवान कृष्ण को नहीं मानते और मथुरा व अयोध्या में दर्शन को लेकर भी उन पर सवाल उठाए।
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव की राजनीति में कभी 'अली-अली' तो कभी 'बजरंगबली' के नारे दिखाई देते हैं — वह न इधर के रहे और न उधर के। यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण की बहस को और तीखा करती है।
आगे क्या
विपक्ष का 'अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ' अभियान कई राज्यों में जारी रहने की संभावना है। मतदाता सूची की शुचिता और चुनाव आयोग की स्वायत्तता का मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनावों तक राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रहेगा।