चुनाव आयोग स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, सरकार के निर्देश पर नहीं चलता: रामदास आठवले
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने 30 सितंबर 2026 को देहरादून में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और वह अपने चुनाव-संबंधी फैसले संविधान-प्रदत्त शक्तियों के आधार पर लेता है, न कि सरकार की गाइडलाइन पर। यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग कर रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
आठवले ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किए गए संविधान ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र अधिकार दिए हैं और इस संस्था का सरकार से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को चुनाव से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है।
एसआईआर विवाद पर आठवले का रुख
मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे विवाद पर आठवले ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दूसरे देश से आकर फर्जी दस्तावेजों के ज़रिये भारत की मतदाता सूची में नाम दर्ज करवाता है और जाँच में यह पुष्ट होता है, तो उसका नाम सूची से हटाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा मामले में किन परिस्थितियों में और किन लोगों के नाम हटाए गए, इसकी उन्हें विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देश के प्रत्येक उस नागरिक को, जिसे कानून के तहत मताधिकार प्राप्त है, उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव और इंडी गठबंधन पर तंज
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए आठवले ने कहा कि उन्हें लगता है कि अखिलेश यादव 'ख्याली दुनिया में जी रहे हैं।' आठवले ने यह भी बताया कि अखिलेश यादव दिल्ली में हुई इंडी गठबंधन की बैठक में स्वयं शामिल नहीं हुए और उनकी जगह पार्टी के कुछ अन्य नेताओं को भेजा गया।
उत्तर प्रदेश चुनाव पर आठवले का आकलन
आठवले ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि उन्हें समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच गठबंधन की कोई संभावना नहीं दिखती। उनके अनुसार दोनों दल अलग-अलग चुनावी रास्ते पर चलेंगे। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष की एकजुटता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
क्या होगा आगे
विपक्ष की मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग और एसआईआर पर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग की स्वायत्तता एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गई है। आठवले के बयान से सत्तारूढ़ गठबंधन की यह स्थिति स्पष्ट होती है कि वह चुनाव आयोग के कामकाज पर किसी बाहरी दबाव को उचित नहीं मानता। आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा संसद और सड़क — दोनों पर गरमाने की संभावना है।