ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग: ओडिशा कांग्रेस ने भुवनेश्वर में सीईओ कार्यालय का किया घेराव
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय का घेराव किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की माँग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताएँ बरती गई हैं और चुनाव आयोग को सरकार के हित में इस्तेमाल किया जा रहा है।
मार्च और प्रदर्शन का घटनाक्रम
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास के नेतृत्व में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एडीएम कार्यालय से सीईओ कार्यालय तक मार्च निकाला। मीडिया से बात करते हुए दास ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं।
दास ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से लगाए गए 'वोट चोरी' के आरोप अब सही साबित हो गए हैं। उन्होंने कहा, 'आज से नहीं, बल्कि पिछले तीन वर्षों से राहुल गांधी कह रहे हैं कि वोट चोरी हो रही है। उनके आरोप सही साबित हुए हैं।'
चुनाव आयोग पर लगाए गए प्रमुख आरोप
दास ने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज कराई, किंतु ज्ञानेश कुमार ने इन आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा निर्णय लेना जारी रखा। उनके अनुसार, दोनों आयुक्तों को एक ही दिन में चार बार आपत्ति जतानी पड़ी थी, जिसे भी अनसुना किया गया।
दास ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों आयुक्तों को आयोग के महत्वपूर्ण मॉड्यूल, सूचनाओं और निर्णयों की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली — यह संकेत करता है कि उन्हें आधिकारिक तौर पर इन मामलों से अवगत नहीं कराया गया। उन्होंने दावा किया कि आयोग की कई बैठकों के एजेंडे पहले से सार्वजनिक नहीं किए गए और उनकी कार्यवाही भी बाद में सार्वजनिक नहीं हुई।
फॉर्म-6 में बदलाव और कानूनी उल्लंघन के आरोप
दास ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए उपयोग होने वाले फॉर्म-6 में अवैध तरीके से बदलाव किया गया, जबकि आयोग के पास कथित तौर पर ऐसा करने का कानूनी अधिकार नहीं था। उन्होंने बताया कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।
दास के अनुसार, दोनों मौजूदा चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को लिखे पत्रों में आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 का उल्लंघन किया। यह ऐसे समय में आया है जब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर पहले से विवाद चल रहा था।
कांग्रेस की माँगें
दास ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उनके खिलाफ महाभियोग की माँग की। उन्होंने प्रियंका गांधी की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की माँग का भी उल्लेख किया। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान को दोहराया, जिसमें मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर करने वाले अधिकारियों को 'गद्दार' कहा गया था।
दास ने चुनाव आयोग के उस स्पष्टीकरण की भी आलोचना की, जिसमें कहा गया था कि मतभेद के बावजूद फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं — उन्होंने इसे 'बेहद हास्यास्पद' बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि दोनों आयुक्तों को अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराने के लिए आयोग के बाहर जाना क्यों पड़ा और मुख्य चुनाव आयुक्त को कथित कानून-उल्लंघन के बावजूद किसने राजनीतिक संरक्षण दिया।
आगे का रास्ता
गौरतलब है कि यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे उस राजनीतिक विवाद की एक कड़ी है, जिसमें विपक्षी दल SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची प्रबंधन पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। भुवनेश्वर का यह प्रदर्शन संकेत देता है कि आने वाले दिनों में विपक्ष का यह अभियान और तेज हो सकता है।