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ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग: ओडिशा कांग्रेस ने भुवनेश्वर में सीईओ कार्यालय का किया घेराव

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ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग: ओडिशा कांग्रेस ने भुवनेश्वर में सीईओ कार्यालय का किया घेराव

सारांश

ओडिशा कांग्रेस का भुवनेश्वर में सीईओ कार्यालय घेराव महज़ एक स्थानीय प्रदर्शन नहीं — यह राष्ट्रीय विपक्ष की उस बड़ी मुहिम की अगली कड़ी है, जो चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठा रही है। महाभियोग और आपराधिक कार्रवाई की माँग के साथ, दाँव ऊँचा हो चुका है।

मुख्य बातें

ओडिशा कांग्रेस ने 25 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय का घेराव किया।
OPCC अध्यक्ष भक्त चरण दास ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या महाभियोग की माँग की।
आरोप: चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्ति जताई, जिन्हें नजरअंदाज किया गया।
फॉर्म-6 में कथित अवैध बदलाव और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के उल्लंघन का आरोप।
प्रियंका गांधी की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की माँग का भी उल्लेख किया गया।

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय का घेराव किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की माँग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताएँ बरती गई हैं और चुनाव आयोग को सरकार के हित में इस्तेमाल किया जा रहा है।

मार्च और प्रदर्शन का घटनाक्रम

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास के नेतृत्व में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एडीएम कार्यालय से सीईओ कार्यालय तक मार्च निकाला। मीडिया से बात करते हुए दास ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं।

दास ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से लगाए गए 'वोट चोरी' के आरोप अब सही साबित हो गए हैं। उन्होंने कहा, 'आज से नहीं, बल्कि पिछले तीन वर्षों से राहुल गांधी कह रहे हैं कि वोट चोरी हो रही है। उनके आरोप सही साबित हुए हैं।'

चुनाव आयोग पर लगाए गए प्रमुख आरोप

दास ने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज कराई, किंतु ज्ञानेश कुमार ने इन आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा निर्णय लेना जारी रखा। उनके अनुसार, दोनों आयुक्तों को एक ही दिन में चार बार आपत्ति जतानी पड़ी थी, जिसे भी अनसुना किया गया।

दास ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों आयुक्तों को आयोग के महत्वपूर्ण मॉड्यूल, सूचनाओं और निर्णयों की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली — यह संकेत करता है कि उन्हें आधिकारिक तौर पर इन मामलों से अवगत नहीं कराया गया। उन्होंने दावा किया कि आयोग की कई बैठकों के एजेंडे पहले से सार्वजनिक नहीं किए गए और उनकी कार्यवाही भी बाद में सार्वजनिक नहीं हुई।

फॉर्म-6 में बदलाव और कानूनी उल्लंघन के आरोप

दास ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए उपयोग होने वाले फॉर्म-6 में अवैध तरीके से बदलाव किया गया, जबकि आयोग के पास कथित तौर पर ऐसा करने का कानूनी अधिकार नहीं था। उन्होंने बताया कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।

दास के अनुसार, दोनों मौजूदा चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को लिखे पत्रों में आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 का उल्लंघन किया। यह ऐसे समय में आया है जब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर पहले से विवाद चल रहा था।

कांग्रेस की माँगें

दास ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उनके खिलाफ महाभियोग की माँग की। उन्होंने प्रियंका गांधी की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की माँग का भी उल्लेख किया। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान को दोहराया, जिसमें मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर करने वाले अधिकारियों को 'गद्दार' कहा गया था।

दास ने चुनाव आयोग के उस स्पष्टीकरण की भी आलोचना की, जिसमें कहा गया था कि मतभेद के बावजूद फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं — उन्होंने इसे 'बेहद हास्यास्पद' बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि दोनों आयुक्तों को अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराने के लिए आयोग के बाहर जाना क्यों पड़ा और मुख्य चुनाव आयुक्त को कथित कानून-उल्लंघन के बावजूद किसने राजनीतिक संरक्षण दिया।

आगे का रास्ता

गौरतलब है कि यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे उस राजनीतिक विवाद की एक कड़ी है, जिसमें विपक्षी दल SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची प्रबंधन पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। भुवनेश्वर का यह प्रदर्शन संकेत देता है कि आने वाले दिनों में विपक्ष का यह अभियान और तेज हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संस्थागत दरार की ओर इशारा करता है। लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि अभी तक ये आरोप कांग्रेस के बयानों पर आधारित हैं — स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता पर इस तरह के खुले राजनीतिक हमले नए नहीं हैं, लेकिन जब आरोप स्वयं आयोग के भीतर से उठने की बात कही जाए, तो यह मामला अलग स्तर पर जाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि इन आरोपों की संसदीय या न्यायिक जाँच की माँग अभी नहीं उठाई गई — जो इस आंदोलन की सीमा को भी उजागर करती है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा कांग्रेस ने सीईओ कार्यालय का घेराव क्यों किया?
ओडिशा कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पक्षपात के आरोपों को लेकर 25 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में यह प्रदर्शन किया। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की माँग की।
ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
कांग्रेस के अनुसार, ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों को नजरअंदाज किया, फॉर्म-6 में कथित अवैध बदलाव की अनुमति दी और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का उल्लंघन किया। ये सभी आरोप कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्या माँगें रखी हैं?
OPCC अध्यक्ष भक्त चरण दास ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उनके खिलाफ महाभियोग की माँग की। इसके साथ ही प्रियंका गांधी की ओर से आपराधिक कार्रवाई की माँग का भी उल्लेख किया गया।
फॉर्म-6 विवाद क्या है?
कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए उपयोग होने वाले फॉर्म-6 में चुनाव आयोग ने कथित तौर पर अवैध तरीके से बदलाव किया, जबकि ऐसा करने का उसे कानूनी अधिकार नहीं था। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने कथित तौर पर इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी, जिसे नजरअंदाज किया गया।
यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह प्रदर्शन उस व्यापक राष्ट्रीय बहस का हिस्सा है, जिसमें विपक्षी दल SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची प्रबंधन पर चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद इस विवाद को संस्थागत संकट का रूप देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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