5 अक्टूबर 2026
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर RJD-NCP का हमला, भाजपा की कठपुतली बताकर इस्तीफे की मांग

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर RJD-NCP का हमला, भाजपा की कठपुतली बताकर इस्तीफे की मांग

सारांश

एक ही दिन पटना और नागपुर से विपक्ष का दोहरा हमला — RJD और NCP (SP) दोनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भाजपा का एजेंट होने का आरोप लगाया। 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने के दावे और इस्तीफे की माँग के साथ यह विवाद अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है।

मुख्य बातें

RJD नेता शक्ति सिंह यादव ने 5 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भाजपा के लिए काम करने का आरोप लगाया।
यादव के अनुसार, केरल के पूर्व मुख्य सचिव ने दावा किया है कि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें भाजपा टिकट का प्रस्ताव रखा था।
दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई, यह आरोप भी सामने आया।
NCP (SP) नेता अनिल देशमुख ने दावा किया कि देशभर में 13 करोड़ और महाराष्ट्र में 2 करोड़ 60 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए।
देशमुख ने ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने, उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की माँग की।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता शक्ति सिंह यादव ने 5 अक्टूबर 2026 को पटना में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए, यह कहते हुए कि भारत निर्वाचन आयोग अपने संवैधानिक दायित्व से भटककर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अधीन कार्य कर रहा है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों को इस आरोप का आधार बताया। इसी दिन नागपुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता अनिल देशमुख ने भी आयोग पर तीखा हमला बोला।

RJD के आरोप और ज्ञानेश कुमार पर सवाल

शक्ति सिंह यादव ने कहा कि यह 'प्रमाणित हो चुका है' कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने भाजपा के हित में काम किया। उनके अनुसार, केरल के पूर्व मुख्य सचिव ने स्वयं बयान दिया है कि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें भाजपा का टिकट देने का प्रस्ताव रखा था — जो कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद की निष्पक्षता पर सीधा सवाल है। यह आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

यादव ने यह भी कहा कि बिहार चुनाव में SIR की भूमिका से संबंधित प्रमाण सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की थी, जो आंतरिक असहमति का गंभीर संकेत है।

कानूनी जवाबदेही पर सवाल

यादव ने केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए उस कानून की आलोचना की जिसके तहत, उनके अनुसार, पद से हटने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती। उन्होंने तर्क दिया कि जब प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पर पद छोड़ने के बाद कार्रवाई संभव है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को यह विशेष संरक्षण क्यों मिले। उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।

NCP (SP) की तीन बड़ी मांगें

नागपुर में अनिल देशमुख ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के हाथों की 'कठपुतली' बन गया है और देशभर में मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पूरे देश में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिनमें से अकेले महाराष्ट्र में 2 करोड़ 60 लाख से अधिक नाम काटे गए हैं। ये आँकड़े देशमुख ने पेश किए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।

देशमुख ने तीन ठोस मांगें रखीं — पहली, केंद्र सरकार चुनाव आयोग से जवाब माँगे और मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल हटाए; दूसरी, ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध FIR दर्ज करके उन्हें जेल भेजा जाए; तीसरी, देश में आगे होने वाले सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएँ।

व्यापक संदर्भ और लोकतांत्रिक चिंताएँ

यह ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा चुके हैं। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर विवाद कोई नया नहीं है, लेकिन एक ही दिन में दो अलग-अलग राज्यों से इस स्तर के आरोप लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरे हैं। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। आने वाले दिनों में सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई और सरकार की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सर्वोच्च न्यायालय में SIR से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत किए जाने का दावा; और दो, आयोग के भीतर आयुक्तों के बीच 14 बार की असहमति का आरोप। असली परीक्षा यह है कि क्या न्यायालय इन दावों को सत्यापन-योग्य साक्ष्य मानता है। 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आँकड़ा, यदि सही निकला, तो यह महज़ राजनीतिक आरोप नहीं रहेगा — यह संवैधानिक संकट बन जाएगा।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RJD ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए हैं?
RJD नेता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भाजपा के अधीन होकर काम कर रहे हैं और SIR के फैसले पक्षपाती हैं। उन्होंने केरल के पूर्व मुख्य सचिव के हवाले से यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें भाजपा टिकट का प्रस्ताव रखा था, जो अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदाता सूचियों की समीक्षा और सफाई की एक प्रक्रिया है जिसमें मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में जीवित और सक्रिय मतदाताओं के नाम भी काटे जा रहे हैं, और इससे जुड़े प्रमाण सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं।
अनिल देशमुख ने मतदाता सूची को लेकर क्या दावा किया?
NCP (SP) नेता अनिल देशमुख ने दावा किया कि पूरे देश में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिनमें अकेले महाराष्ट्र में 2 करोड़ 60 लाख से अधिक नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव में मतदान कर चुके लोगों के नाम भी हटाए जा रहे हैं, जो संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या मांगें रखी हैं?
विपक्ष ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं — पहली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा; दूसरी, उनके खिलाफ FIR दर्ज करके कानूनी कार्रवाई; और तीसरी, भविष्य के सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराना। RJD ने यह भी मांग की कि पद से हटने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त पर कार्रवाई को छूट देने वाले कानून को बदला जाए।
क्या चुनाव आयोग या सरकार ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 तक चुनाव आयोग या केंद्र सरकार की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सर्वोच्च न्यायालय में SIR से जुड़ी सुनवाई की स्थिति आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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