मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर RJD-NCP का हमला, भाजपा की कठपुतली बताकर इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता शक्ति सिंह यादव ने 5 अक्टूबर 2026 को पटना में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए, यह कहते हुए कि भारत निर्वाचन आयोग अपने संवैधानिक दायित्व से भटककर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अधीन कार्य कर रहा है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों को इस आरोप का आधार बताया। इसी दिन नागपुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता अनिल देशमुख ने भी आयोग पर तीखा हमला बोला।
RJD के आरोप और ज्ञानेश कुमार पर सवाल
शक्ति सिंह यादव ने कहा कि यह 'प्रमाणित हो चुका है' कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने भाजपा के हित में काम किया। उनके अनुसार, केरल के पूर्व मुख्य सचिव ने स्वयं बयान दिया है कि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें भाजपा का टिकट देने का प्रस्ताव रखा था — जो कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद की निष्पक्षता पर सीधा सवाल है। यह आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
यादव ने यह भी कहा कि बिहार चुनाव में SIR की भूमिका से संबंधित प्रमाण सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की थी, जो आंतरिक असहमति का गंभीर संकेत है।
कानूनी जवाबदेही पर सवाल
यादव ने केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए उस कानून की आलोचना की जिसके तहत, उनके अनुसार, पद से हटने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती। उन्होंने तर्क दिया कि जब प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पर पद छोड़ने के बाद कार्रवाई संभव है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को यह विशेष संरक्षण क्यों मिले। उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।
NCP (SP) की तीन बड़ी मांगें
नागपुर में अनिल देशमुख ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के हाथों की 'कठपुतली' बन गया है और देशभर में मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पूरे देश में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिनमें से अकेले महाराष्ट्र में 2 करोड़ 60 लाख से अधिक नाम काटे गए हैं। ये आँकड़े देशमुख ने पेश किए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
देशमुख ने तीन ठोस मांगें रखीं — पहली, केंद्र सरकार चुनाव आयोग से जवाब माँगे और मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल हटाए; दूसरी, ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध FIR दर्ज करके उन्हें जेल भेजा जाए; तीसरी, देश में आगे होने वाले सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएँ।
व्यापक संदर्भ और लोकतांत्रिक चिंताएँ
यह ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा चुके हैं। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर विवाद कोई नया नहीं है, लेकिन एक ही दिन में दो अलग-अलग राज्यों से इस स्तर के आरोप लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरे हैं। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। आने वाले दिनों में सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई और सरकार की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।