6 अक्टूबर 2026
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: राहुल गांधी के नेतृत्व में संसद से ECI तक विपक्ष का मार्च

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: राहुल गांधी के नेतृत्व में संसद से ECI तक विपक्ष का मार्च

सारांश

राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक का संसद से ECI तक मार्च — 13 करोड़ वोट हटाने के आरोप और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ। भाजपा ने SIR को लोकतंत्र के लिए ज़रूरी बताया और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने 6 अक्टूबर 2026 को संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और 13 करोड़ से अधिक लोगों के वोट कथित तौर पर हटाए जाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस सांसदों ने पश्चिम बंगाल , बिहार और महाराष्ट्र के चुनावों में चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
भाजपा नेता आरपी सिंह ने SIR (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) को मतदाता सूची की शुद्धता और लोकतंत्र के लिए आवश्यक बताया।
हरियाणा मंत्री अनिल विज ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और विपक्ष को अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए।
विपक्ष ने संकेत दिए कि आंदोलन पोलिंग बूथ स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया ब्लॉक का विरोध प्रदर्शन 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में तेज हो गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग (ECI) कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला। कांग्रेस सांसदों ने इस प्रदर्शन को 'आजादी की दूसरी लड़ाई' का नाम दिया।

विरोध मार्च का घटनाक्रम

विपक्षी सांसदों का आरोप था कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से कुछ ज़रूरी सवालों के जवाब चाहते हैं, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि यदि उन्हें चुनाव आयोग तक जाने दिया गया तो वे वहाँ पहुँचेंगे, और यदि रोका गया तो पुलिस जहाँ ले जाएगी, वे वहाँ जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक देश को 'लोकतंत्र के दुश्मनों' से मुक्त नहीं कराया जाता, यह आंदोलन नहीं रुकेगा।

विपक्ष के मुख्य आरोप

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने दावा किया कि 13 करोड़ से अधिक लोगों के वोट मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र के चुनावों में चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उनका यह भी दावा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इशारे पर यह काम किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र में हजारों वोट कथित तौर पर काटे गए।

यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है। गौरतलब है कि विपक्ष के इस प्रदर्शन ने SIR और ECI की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय बहस को नया आयाम दे दिया है।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा नेता आरपी सिंह ने कहा कि विपक्ष को लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार है, लेकिन जिस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हो रहा है, वह जानबूझकर खड़ा किया गया विवाद है। उन्होंने कहा कि वोटों को लेकर कोई ठोस समस्या नहीं है और लोकतंत्र के लिए SIR (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) ज़रूरी है, साथ ही मतदाता सूची को शुद्ध करना आवश्यक है।

हरियाणा सरकार में मंत्री अनिल विज ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में है और अदालत ने नोटिस जारी किया है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन हो, तो उस पर अनावश्यक टिप्पणी से बचना चाहिए। उन्होंने इंडिया ब्लॉक को 'स्वार्थ के लिए एकत्रित लोगों का गठबंधन' बताया।

भाजपा नेता अशोक वाजपेयी ने कहा कि विपक्ष का दायित्व है कि वह सदन में चर्चा करे और सरकार की नीतियों की आलोचना करे। उनके अनुसार, विपक्ष संसदीय मंच छोड़कर सड़कों पर इसलिए उतर रहा है क्योंकि उसके पास मुद्दों पर पर्याप्त तर्क नहीं हैं। भाजपा ने यह भी कहा कि जनता विपक्ष को पहले ही नकार चुकी है।

आम जनता और विस्तार की रणनीति पर असर

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध केवल नई दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि वे पोलिंग बूथ स्तर तक जाकर उन लोगों की जानकारी सामने लाएंगे, जिनके वोट कथित तौर पर हटाए गए हैं। विपक्ष का दावा है कि अब आम जनता के साथ-साथ छात्र भी इस मुद्दे पर सड़कों पर उतर आए हैं।

क्या होगा आगे

सुप्रीम कोर्ट में SIR से जुड़ा मामला अभी विचाराधीन है और अदालत का अगला आदेश इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वे देशभर में अपना अभियान तेज करेंगे, जबकि भाजपा SIR को मतदाता सूची की शुद्धता के लिए अनिवार्य बताती है। इस राजनीतिक तनाव का असर आने वाले राज्य चुनावों की तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह SIR की वैधता और मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने के आरोप पर बड़ी लड़ाई का पहला मोर्चा है। जब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हो, तब सड़क पर उतरना राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है — इससे संस्थागत विश्वसनीयता पर सवाल भी उठते हैं। भाजपा का SIR-समर्थन तर्कसंगत लग सकता है, लेकिन जिस राज्यों — बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र — का विपक्ष उल्लेख कर रहा है, वहाँ चुनावी विवाद की पृष्ठभूमि इस बहस को केवल प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक बनाती है। असली सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का ऐसा ढाँचा देगा, जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की मांग क्या है?
इंडिया ब्लॉक के विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँग रहे हैं। उनका आरोप है कि ज्ञानेश कुमार के इशारे पर मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक लोगों के वोट कथित तौर पर हटाए गए हैं।
SIR (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों है?
SIR यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने की चुनाव आयोग की प्रक्रिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जबकि भाजपा इसे लोकतंत्र के लिए ज़रूरी बताती है।
6 अक्टूबर के विरोध मार्च में क्या हुआ?
6 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकाला। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि उन्हें ज्ञानेश कुमार से मिलने नहीं दिया जा रहा और पुलिस ने उन्हें रोका।
सुप्रीम कोर्ट की इस मामले में क्या भूमिका है?
हरियाणा के मंत्री अनिल विज के अनुसार SIR से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में है और अदालत ने नोटिस जारी किया है। भाजपा का कहना है कि जब तक अदालत फैसला नहीं देती, विपक्ष को अनावश्यक टिप्पणी से बचना चाहिए।
विपक्ष का यह आंदोलन आगे कहाँ तक जाएगा?
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा है कि यह विरोध केवल नई दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा और वे पोलिंग बूथ स्तर पर जाकर कथित रूप से हटाए गए वोटों की जानकारी जनता के सामने रखेंगे। विपक्ष का दावा है कि छात्र भी इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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