ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: वामपंथी दलों और छात्र संगठनों का चुनाव आयोग तक मार्च, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
वामपंथी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के सदस्यों ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के मुख्यालय की ओर विरोध मार्च निकाला और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। पुलिस ने मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
मार्च का मार्ग और प्रमुख भागीदार
प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस स्थित बंगला साहिब गुरुद्वारे के निकट एकत्र हुए और पटेल चौक के पास स्थित ECI मुख्यालय की ओर कूच किया। इस मार्च में अखिल भारतीय छात्र संघ (AISF) और अखिल भारतीय युवा संघ (AIYF) के सदस्य बड़ी तादाद में शामिल हुए।
वरिष्ठ नेताओं में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की नेता वृंदा करात, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेता पी. संदोष कुमार और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी शामिल रहे। ECI मुख्यालय के बाहर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात थे।
प्रदर्शनकारियों की आवाज़
पत्रकारों से बातचीत में योगेंद्र यादव ने कहा, 'अगर आप एक जंतर-मंतर बंद कर देंगे, तो सैकड़ों जंतर-मंतर बन जाएंगे। आप एक व्यक्ति को चुप करा सकते हैं, लेकिन जनता को नहीं। यह आंदोलन अपने स्वरूप में जारी रहेगा क्योंकि यह इस देश की जनता के सबसे बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है।'
पी. संदोष कुमार ने भी आंदोलन को तेज करने की चेतावनी देते हुए कहा, 'आने वाले दिनों में हम अपना आंदोलन और तेज करेंगे, और बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होंगे। हम ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे।'
यातायात व्यवधान और पुलिस बंदोबस्त
मार्च के मद्देनजर दिल्ली यातायात पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर यात्रियों को सचेत किया कि दोपहर 1:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक बंगला साहिब गुरुद्वारे से जंतर-मंतर के बीच के मार्गों पर यातायात बदलाव किए जाएंगे। लोगों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने और यातायात कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि ECI के भीतर SIR से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर आंतरिक मतभेद हैं। गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA ब्लॉक के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें कई नेताओं को अस्थायी रूप से हिरासत में लिया गया था। आलोचकों का कहना है कि SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
आगे क्या होगा
प्रदर्शन आयोजकों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं होता, विरोध का सिलसिला जारी रहेगा। यह मुद्दा लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर व्यापक राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है।