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चुनाव आयुक्तों ने 14 बार जताई आपत्ति, दीपक बैज ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप

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चुनाव आयुक्तों ने 14 बार जताई आपत्ति, दीपक बैज ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप

सारांश

छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने CEC ज्ञानेश कुमार पर सीधा आरोप लगाया — चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई, पर उन्हें कथित तौर पर नज़रअंदाज़ किया गया। साथ ही झीरम NIA फैसले पर भी पार्टी ने असंतोष जताया।

मुख्य बातें

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने 25 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं, जिन्हें कथित तौर पर नज़रअंदाज़ किया गया।
बैज ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से BJP को फायदा पहुँचा; चुनाव आयोग का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।
झीरम मामले में NIA अदालत के फैसले पर कांग्रेस असंतुष्ट; सज़ा पाए 10 लोग निचले स्तर के नक्सली बताए गए।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ प्रदेश नेतृत्व की बैठक प्रस्तावित, जिसमें झीरम व चुनावी मुद्दों पर चर्चा होगी।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने 25 सितंबर 2026 को रायपुर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग और सरकार के बीच कथित मिलीभगत से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को फायदा पहुँचाया गया। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों की निष्पक्ष जाँच की माँग की।

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियाँ — 14 मौकों पर उठे सवाल

बैज ने बताया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 मौकों पर विभिन्न फैसलों को लेकर औपचारिक आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं। इन फैसलों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े निर्णय भी शामिल बताए गए हैं। बैज के अनुसार, इन आपत्तियों को कथित तौर पर नज़रअंदाज़ किया गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्टों में सामने आई जानकारी सही है, तो चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के बीच कथित सांठगांठ का मुद्दा लंबे समय से उठाते आ रहे हैं।

BJP को फायदा पहुँचाने का आरोप

बैज ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को प्रभावित किया, जिससे BJP को सीधा लाभ मिला। उनके अनुसार, चुनाव आयोग और सरकार मिलकर वोट, सीट और राजनीतिक दलों को प्रभावित करने का काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि ये आरोप किसी ठोस न्यायिक निष्कर्ष पर नहीं, बल्कि कथित रिपोर्टों पर आधारित हैं और आयोग की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कांग्रेस का कहना है कि अब सामने आ रही जानकारी उनके पुराने सवालों को बल देती है और पार्टी इस मुद्दे पर आवाज़ उठाना जारी रखेगी।

झीरम घटना पर भी बैज की प्रतिक्रिया

बैज ने झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की अदालत के हालिया फैसले पर भी गहरी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से न तो कांग्रेस और न ही पीड़ित परिवार संतुष्ट हैं।

बैज के अनुसार, जिन 10 लोगों को सज़ा सुनाई गई है, वे निचले स्तर के नक्सली या 'संगम सदस्य' हैं, जबकि वरिष्ठ नक्सलियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कांग्रेस को अपेक्षित न्याय नहीं मिला।

राहुल गांधी के साथ बैठक प्रस्तावित

बैज ने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ एक बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में झीरम मामले, NIA अदालत के फैसले, पीड़ित परिवारों और घायलों के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।

यह बैठक ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो जाती है जब झीरम मामले की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस खुलकर असंतोष व्यक्त कर रही है और आगे की कानूनी रणनीति तय करने की ज़रूरत महसूस की जा रही है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग की आंतरिक असहमतियों के कथित खुलासे भारतीय चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं। हालाँकि, आलोचकों का यह भी कहना है कि जब तक इन दावों की स्वतंत्र जाँच न हो, इन्हें केवल राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक खंडन या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनका आधार कथित रिपोर्टें हैं — न कोई शपथपत्र, न आयोग का आंतरिक दस्तावेज़ सार्वजनिक हुआ है। असली सवाल यह है कि क्या संधू और जोशी की आपत्तियाँ वास्तव में दर्ज हुई थीं और क्या उन्हें विधिसम्मत प्रक्रिया के बाहर नज़रअंदाज़ किया गया — इसकी पुष्टि के बिना यह आरोप चुनावी आख्यान से आगे नहीं बढ़ता। झीरम मामले पर भी कांग्रेस की नाराज़गी समझ में आती है, पर 'वरिष्ठ नक्सलियों को बचाने' का दावा किसी न्यायिक या जाँच-आधारित साक्ष्य के बिना केवल राजनीतिक बयान है। मीडिया को दोनों मुद्दों में आरोप और तथ्य के बीच की रेखा स्पष्ट रखनी होगी।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपक बैज ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर क्या आरोप लगाए हैं?
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों को कथित तौर पर नज़रअंदाज़ किया, जो मतदाता सूची और SIR से जुड़े फैसलों पर थीं। उन्होंने इसे BJP के पक्ष में काम करने की कोशिश बताया और निष्पक्ष जाँच की माँग की।
चुनाव आयुक्तों ने कितनी बार आपत्ति दर्ज कराई थी?
बैज के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर विभिन्न फैसलों को लेकर आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं। इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े निर्णय भी शामिल बताए गए हैं।
झीरम घाटी मामले में NIA अदालत के फैसले पर कांग्रेस क्यों नाराज़ है?
बैज ने कहा कि NIA अदालत ने झीरम मामले में जिन 10 लोगों को सज़ा सुनाई, वे निचले स्तर के नक्सली या 'संगम सदस्य' हैं। कांग्रेस का आरोप है कि वरिष्ठ नक्सलियों को बचाया जा रहा है और पीड़ित परिवारों को अपेक्षित न्याय नहीं मिला।
राहुल गांधी के साथ प्रस्तावित बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच प्रस्तावित बैठक में झीरम घाटी हमले का NIA फैसला, पीड़ित परिवारों के मुद्दे और घायलों की स्थिति पर चर्चा होगी। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी पार्टी की आगे की रणनीति तय की जा सकती है।
क्या चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर कोई जवाब दिया है?
रिपोर्ट लिखे जाने तक चुनाव आयोग की ओर से बैज के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या खंडन सामने नहीं आया है। ये आरोप कथित रिपोर्टों पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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