सीईसी ज्ञानेश कुमार पर INDIA गठबंधन का हमला: 'BJP एजेंट' बताकर मांगा इस्तीफा, दिल्ली से रांची तक प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA गठबंधन का आंदोलन 6 अक्टूबर 2026 को और तीखा हो गया, जब नई दिल्ली से लेकर रांची तक विभिन्न दलों ने एक सुर में उनके तत्काल इस्तीफे की माँग की। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहा और फॉर्म 6 तथा फॉर्म 7 के कथित दुरुपयोग से मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं।
दिल्ली में विरोध: कांग्रेस का मोर्चा
नई दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद जीसी चंद्रशेखर ने कहा कि यह आंदोलन लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा, 'पिछले सप्ताह बेंगलुरु में जो हुआ, उसे लेकर हम चुनाव आयोग भी गए थे। वे फॉर्म 7 का इस्तेमाल करके वोट हटा रहे हैं। हम इसी बात का विरोध कर रहे हैं।' चंद्रशेखर ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते, विपक्ष की लड़ाई जारी रहेगी।
समाजवादी पार्टी की माँग: 'शर्म बची हो तो इस्तीफा दें'
समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व विधायक संतोष पांडेय ने ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, 'ज्ञानेश कुमार जिस तरह एक पार्टी के एजेंट बनकर बैठे हैं, अभी जिस तरह वह एक्सपोज हुए हैं, जनता सब देख रही है।' उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर लोकतंत्र का 'मजाक' उड़ाने का आरोप भी लगाया। पांडेय ने माँग की, 'अगर इनमें थोड़ी भी शर्म बची है तो इन्हें खुद इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर ये खुद इस्तीफा नहीं देते हैं तो ऐसे लोगों को पद से बर्खास्त करना चाहिए।'
रांची में JMM का स्वर: 'SIR प्रक्रिया असंवैधानिक'
रांची में JMM प्रवक्ता मनोज पांडेय ने विपक्ष के इस राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन को 'जनाक्रोश' की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा, 'जो जनाक्रोश सड़कों पर दिख रहा है, वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है और केंद्र की सरकार ने उन्हें अपना समर्थन दे रखा है।' मनोज पांडेय ने फॉर्म 6 को 'पूरी तरह असंवैधानिक' और SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न) प्रक्रिया को 'अनुचित एवं गैरकानूनी' करार देते हुए इसे रद्द करने की माँग की।
मुख्य आरोप: फॉर्म 6 और फॉर्म 7 का कथित दुरुपयोग
गौरतलब है कि विपक्ष के इस विरोध की जड़ में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया है। फॉर्म 6 का उपयोग नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए होता है, जबकि फॉर्म 7 किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने के लिए भरा जाता है। विपक्षी दलों का कथित तौर पर आरोप है कि इन फॉर्मों का चुनावी लाभ के लिए व्यवस्थित दुरुपयोग हो रहा है, विशेष रूप से बेंगलुरु में हाल के घटनाक्रम को लेकर। चुनाव आयोग की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक खंडन या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ चल रही हैं और मतदाता सूची संशोधन का काम जारी है। INDIA गठबंधन ने संकेत दिया है कि यदि उनकी माँगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और विस्तार दिया जाएगा। विपक्ष के इस एकजुट प्रदर्शन का चुनाव आयोग की स्वायत्तता और विश्वसनीयता पर दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका राजनीतिक विश्लेषक जता रहे हैं।