2 अक्टूबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी प्रदर्शन: NDA नेताओं का पलटवार, SP ने माँगा इस्तीफा

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सीईसी ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी प्रदर्शन: NDA नेताओं का पलटवार, SP ने माँगा इस्तीफा

सारांश

सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर विपक्ष के प्रदर्शन ने सियासी बवाल खड़ा कर दिया। NDA नेताओं ने विपक्ष को 'लोकतंत्र का हत्यारा' करार दिया, तो SP ने इस्तीफे की माँग के साथ सर्वोच्च न्यायालय से स्वतः संज्ञान की अपील की — चुनाव आयोग की साख केंद्र में आ गई है।

मुख्य बातें

जंतर-मंतर पर 2 अक्टूबर 2026 को विपक्ष ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर में अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन किया।
बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा — 'विपक्ष की पूँजी सिर्फ गाली देना है।' बिहार मंत्री रामकृपाल यादव ने विपक्ष को 'लोकतंत्र का हत्यारा' बताते हुए चुनाव आयोग का बचाव किया।
SP प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने ज्ञानेश कुमार पर 14 पक्षपाती फैसलों का आरोप लगाया।
SP अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की माँग पहले ही कर चुके हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विपक्षी प्रदर्शन ने 2 अक्टूबर 2026 को तीखा राजनीतिक संघर्ष खड़ा कर दिया। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने का आरोप लगाया, जबकि विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर पक्षपात के गंभीर आरोप दोहराए।

NDA का पलटवार: 'विपक्ष की पूँजी सिर्फ आलोचना'

पटना में बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध चल रहे अभियान को विपक्ष की स्वाभाविक प्रवृत्ति बताते हुए कहा, 'सरकार चलाने वाले को कई तरह की योजनाएं बनानी पड़ती हैं, कई तरह के नियम, कानून और निर्णय लेने पड़ते हैं। अब विपक्ष को बैठकर सिर्फ गाली देना है, वही उसकी पूँजी है।' उनके इस बयान ने सत्तापक्ष की आक्रामक राजनीतिक रणनीति को उजागर किया।

बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने और तीखे तेवर अपनाते हुए कहा, 'विपक्ष के लोगों का लोकतंत्र में कोई भरोसा नहीं है। उन्हें संवैधानिक संस्थाओं में भी भरोसा नहीं है। ये लोग लोकतंत्र के हत्यारे हैं और संविधान में विश्वास नहीं रखते।' उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और जनता विपक्ष के प्रदर्शन या अनशन से प्रभावित नहीं होगी।

विपक्ष की माँग: इस्तीफा और सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान

लखनऊ में समाजवादी पार्टी (SP) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने जंतर-मंतर प्रदर्शन का समर्थन करते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया, 'ज्ञानेश कुमार ने 14 ऐसे मनमाने फैसले किए जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लाभ पहुँचाने के लिए थे। तीन सदस्यों की कमेटी होने के बावजूद उन्होंने अपना फैसला थोपने का काम किया है। बहुत से ऐसे फैसले थे जिनकी जानकारी तक नहीं दी गई।'

चांद ने यह भी बताया कि SP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि सर्वोच्च न्यायालय को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर देशभर में बहस छिड़ी हुई है।

मुख्य विवाद: एसआईआर और संस्थागत भरोसा

विवाद की जड़ में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) है, जिसमें विपक्ष कथित गड़बड़ियों का आरोप लगा रहा है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना कोई नई बात नहीं है — विभिन्न दलों ने समय-समय पर ऐसे आरोप लगाए हैं, लेकिन किसी संस्थागत प्रमुख के विरुद्ध इस स्तर का सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन अपेक्षाकृत दुर्लभ है।

NDA नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और विपक्ष पर चुनावी हार को संस्थाओं पर थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

आगे क्या होगा

अखिलेश यादव की सर्वोच्च न्यायालय से स्वतः संज्ञान की माँग के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अदालत इस विषय पर कोई कदम उठाती है। यह राजनीतिक टकराव आगामी चुनावी कार्यक्रम और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता के सवाल को केंद्र में रखते हुए तेज़ होने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि चुनाव आयोग की संस्थागत साख पर गहराते सवालों का प्रतिबिंब है। NDA की 'लोकतंत्र के हत्यारे' जैसी तीखी भाषा और विपक्ष के '14 मनमाने फैसलों' के आरोप — दोनों ही बिना ठोस सार्वजनिक साक्ष्य के दावे हैं, जो असली जवाबदेही से ध्यान भटकाते हैं। अखिलेश यादव की सर्वोच्च न्यायालय से अपील संकेत देती है कि विपक्ष को संसदीय या चुनावी रास्तों पर भरोसा नहीं रहा। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि एसआईआर की वास्तविक खामियों की स्वतंत्र जाँच के बिना, दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक शोर बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर विपक्ष का प्रदर्शन किस मुद्दे पर था?
यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के विरोध में 2 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित किया गया।
NDA नेताओं ने विपक्षी प्रदर्शन पर क्या कहा?
बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि विपक्ष की 'पूँजी सिर्फ गाली देना है', जबकि मंत्री रामकृपाल यादव ने विपक्ष को 'लोकतंत्र का हत्यारा' बताते हुए चुनाव आयोग को संवैधानिक संस्था करार दिया।
समाजवादी पार्टी ने सीईसी पर क्या आरोप लगाए?
SP प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने 14 ऐसे मनमाने फैसले लिए जो BJP को लाभ पहुँचाने के लिए थे, और तीन सदस्यीय समिति के बावजूद फैसले एकतरफा थोपे गए। SP ने उनसे स्वतः इस्तीफे की माँग की है।
अखिलेश यादव ने सर्वोच्च न्यायालय से क्या माँग की है?
SP अध्यक्ष अखिलेश यादव ने माँग की है कि सर्वोच्च न्यायालय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद में स्वतः संज्ञान ले।
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची को व्यापक स्तर पर जाँचा और अद्यतन किया जाता है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में गड़बड़ियाँ की गईं, जबकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है।
राष्ट्र प्रेस
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