एसआईआर विवाद: बिहार NDA में फूट, कुशवाहा ने EC से माँगा स्पष्टीकरण, चिराग बोले — आयोग खुद दे जवाब
सारांश
मुख्य बातें
मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) और मतदाता नामों को हटाने के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के बढ़ते हमलों के बीच, बिहार में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने 25 सितंबर 2026 को इस विवाद पर एकमत होने की बजाय अलग-अलग और कहीं-कहीं परस्पर विरोधी रुख अपनाए। एक ही गठबंधन के भीतर से इस तरह के खुले मतभेद चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर जारी बहस को और गहरा करते हैं।
कुशवाहा की अपील: भ्रांति दूर करे EC
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि एसआईआर विवाद को लेकर जनता में 'काफी भ्रांति' है और चुनाव आयोग को 'वास्तविक स्थिति के बारे में तुरंत स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले से जुड़ी चिंताओं की जाँच संबंधित अधिकारियों द्वारा होनी चाहिए।
गौरतलब है कि कुशवाहा की यह टिप्पणी उन खबरों के बाद सामने आई, जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के कुछ पहलुओं पर आपत्ति जताए जाने की बात कही गई है। NDA के भीतर से आई यह आवाज़ विपक्ष की माँग से पूरी तरह अलग नहीं दिखती।
ललन सिंह का पलटवार: कांग्रेस की परंपरा है संस्थाओं पर हमला
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह 'ललन सिंह' ने इस विवाद पर सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव किया और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 'कांग्रेस इसे बेवजह मुद्दा बना रही है' और उसे 'अपनी हार के असली कारणों पर पुनर्विचार करना चाहिए।' उनके अनुसार, 'संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कांग्रेस की परंपरा रही है।'
चिराग पासवान का तटस्थ रुख: आयोग खुद दे जवाब
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी-राम विलास (LJP-RV) के प्रमुख चिराग पासवान ने NDA के भीतर सबसे अलग और सबसे स्पष्ट रुख पेश किया। उन्होंने कहा, 'सरकार का हिस्सा होने के नाते, मैं किसी का बचाव नहीं करूंगा।' पासवान ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग एक 'स्वतंत्र संवैधानिक संस्था' है और यदि उस पर सवाल उठ रहे हैं, तो 'मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी है कि वह अपना पक्ष मजबूती से रखे।'
विपक्ष के राजनीतिक बयानों पर पासवान ने कहा, 'अगर वे आरोप नहीं लगाएंगे, तो वे अपनी राजनीति कैसे आगे बढ़ाएंगे?' — यानी उन्होंने विपक्ष की आलोचना को स्वाभाविक राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हुए उसे खारिज करने से इनकार किया।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह तनाव ऐसे समय में उभरा है जब विपक्षी दल मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार पर सीधे निशाना साध रहे हैं। यह कोई पहली बार नहीं है जब चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं पर सत्तापक्ष के सहयोगियों ने ही सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हों — लेकिन इस बार एक ही गठबंधन के तीन प्रमुख नेताओं का एक साथ अलग-अलग सुर में बोलना राजनीतिक रूप से उल्लेखनीय है।
आगे क्या होगा
चुनाव आयोग ने अब तक इन टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। कुशवाहा और पासवान की सार्वजनिक अपील के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग कब और किस रूप में स्थिति स्पष्ट करता है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर अपना दबाव जारी रखने का संकेत दे चुका है।