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एसआईआर विवाद: बिहार NDA में फूट, कुशवाहा ने EC से माँगा स्पष्टीकरण, चिराग बोले — आयोग खुद दे जवाब

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एसआईआर विवाद: बिहार NDA में फूट, कुशवाहा ने EC से माँगा स्पष्टीकरण, चिराग बोले — आयोग खुद दे जवाब

सारांश

बिहार NDA में एसआईआर विवाद पर एकता नहीं — कुशवाहा ने EC से तुरंत स्पष्टीकरण माँगा, चिराग पासवान ने कहा कि सरकार में रहते हुए भी वे किसी का बचाव नहीं करेंगे, जबकि ललन सिंह ने कांग्रेस पर पलटवार किया। एक ही गठबंधन, तीन अलग सुर।

मुख्य बातें

उपेंद्र कुशवाहा (RLM, राज्यसभा सांसद) ने एक्स पोस्ट में चुनाव आयोग से एसआईआर विवाद पर 'तुरंत स्पष्टीकरण' जारी करने की माँग की।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह 'ललन सिंह' ने CEC ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं पर हमले का आरोप लगाया।
LJP-RV प्रमुख चिराग पासवान ने NDA सरकार में मंत्री होने के बावजूद CEC का बचाव करने से मना किया; कहा — चुनाव आयोग स्वयं जवाब दे।
विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा एसआईआर प्रक्रिया पर कथित आपत्तियों की खबरें हैं।
चुनाव आयोग ने अब तक इन टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) और मतदाता नामों को हटाने के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के बढ़ते हमलों के बीच, बिहार में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने 25 सितंबर 2026 को इस विवाद पर एकमत होने की बजाय अलग-अलग और कहीं-कहीं परस्पर विरोधी रुख अपनाए। एक ही गठबंधन के भीतर से इस तरह के खुले मतभेद चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर जारी बहस को और गहरा करते हैं।

कुशवाहा की अपील: भ्रांति दूर करे EC

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि एसआईआर विवाद को लेकर जनता में 'काफी भ्रांति' है और चुनाव आयोग को 'वास्तविक स्थिति के बारे में तुरंत स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले से जुड़ी चिंताओं की जाँच संबंधित अधिकारियों द्वारा होनी चाहिए।

गौरतलब है कि कुशवाहा की यह टिप्पणी उन खबरों के बाद सामने आई, जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के कुछ पहलुओं पर आपत्ति जताए जाने की बात कही गई है। NDA के भीतर से आई यह आवाज़ विपक्ष की माँग से पूरी तरह अलग नहीं दिखती।

ललन सिंह का पलटवार: कांग्रेस की परंपरा है संस्थाओं पर हमला

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह 'ललन सिंह' ने इस विवाद पर सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव किया और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 'कांग्रेस इसे बेवजह मुद्दा बना रही है' और उसे 'अपनी हार के असली कारणों पर पुनर्विचार करना चाहिए।' उनके अनुसार, 'संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कांग्रेस की परंपरा रही है।'

चिराग पासवान का तटस्थ रुख: आयोग खुद दे जवाब

केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी-राम विलास (LJP-RV) के प्रमुख चिराग पासवान ने NDA के भीतर सबसे अलग और सबसे स्पष्ट रुख पेश किया। उन्होंने कहा, 'सरकार का हिस्सा होने के नाते, मैं किसी का बचाव नहीं करूंगा।' पासवान ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग एक 'स्वतंत्र संवैधानिक संस्था' है और यदि उस पर सवाल उठ रहे हैं, तो 'मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी है कि वह अपना पक्ष मजबूती से रखे।'

विपक्ष के राजनीतिक बयानों पर पासवान ने कहा, 'अगर वे आरोप नहीं लगाएंगे, तो वे अपनी राजनीति कैसे आगे बढ़ाएंगे?' — यानी उन्होंने विपक्ष की आलोचना को स्वाभाविक राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हुए उसे खारिज करने से इनकार किया।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह तनाव ऐसे समय में उभरा है जब विपक्षी दल मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार पर सीधे निशाना साध रहे हैं। यह कोई पहली बार नहीं है जब चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं पर सत्तापक्ष के सहयोगियों ने ही सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हों — लेकिन इस बार एक ही गठबंधन के तीन प्रमुख नेताओं का एक साथ अलग-अलग सुर में बोलना राजनीतिक रूप से उल्लेखनीय है।

आगे क्या होगा

चुनाव आयोग ने अब तक इन टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। कुशवाहा और पासवान की सार्वजनिक अपील के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग कब और किस रूप में स्थिति स्पष्ट करता है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर अपना दबाव जारी रखने का संकेत दे चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सत्तापक्ष के सहयोगियों को भी असहज कर रहा है। चिराग पासवान का सीधा यह कहना कि 'मैं किसी का बचाव नहीं करूंगा' — एक केंद्रीय मंत्री के लिए असामान्य रूप से स्पष्ट बयान है। मुख्यधारा की कवरेज इस घटनाक्रम को महज 'NDA की आलोचना' के रूप में देख रही है, जबकि असली कहानी यह है कि गठबंधन राजनीति में जवाबदेही की माँग अब संस्थागत चुप्पी से टकरा रही है। चुनाव आयोग जितनी देर स्पष्टीकरण से बचेगा, उतना ही यह विवाद उसकी साख को कमज़ोर करता रहेगा।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (SIR) विवाद क्या है और इस पर विरोध क्यों हो रहा है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे CEC ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से क्या माँगा है?
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने अपने एक्स अकाउंट पर कहा कि एसआईआर विवाद को लेकर जनता में 'काफी भ्रांति' है और चुनाव आयोग को 'वास्तविक स्थिति के बारे में तुरंत स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित चिंताओं की जाँच होनी चाहिए।
चिराग पासवान ने CEC का बचाव क्यों नहीं किया?
केंद्रीय मंत्री और LJP-RV प्रमुख चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और सरकार का हिस्सा होने के नाते वे किसी का बचाव नहीं करेंगे। उनके अनुसार, यदि आयोग पर सवाल उठ रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी है कि वे खुद अपना पक्ष मजबूती से रखें।
ललन सिंह ने इस विवाद पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह 'ललन सिंह' ने CEC ज्ञानेश कुमार का पूरी तरह बचाव करते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह 'संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने' की अपनी परंपरा पर चल रही है और इसे 'बेवजह' मुद्दा बना रही है।
NDA के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद का क्या मतलब है?
एक ही गठबंधन के तीन प्रमुख नेताओं का अलग-अलग रुख अपनाना दर्शाता है कि एसआईआर विवाद केवल विपक्षी राजनीति नहीं, बल्कि NDA सहयोगियों के लिए भी असहजता का विषय बन चुका है। चुनाव आयोग ने अब तक इन टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राष्ट्र प्रेस
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