एसआईआर विवाद: उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से माँगा तत्काल स्पष्टीकरण, जनता में भ्रम की स्थिति
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने 25 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग (ECI) से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) विवाद पर अविलंब स्पष्टीकरण जारी करने की माँग की। कुशवाहा ने कहा कि इस विवाद के चलते आम जनता के बीच गहरी उलझन पैदा हो गई है, जिसे दूर करना आयोग की जिम्मेदारी है।
कुशवाहा का बयान
कुशवाहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर लिखा, 'एसआईआर से संबंधित विवाद पर जनता में काफी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है। विषय को एड्रेस करने की जरूरत है। कंफ्यूजन दूर करने हेतु चुनाव आयोग के द्वारा अविलंब सही स्थिति पर स्पष्टीकरण आना चाहिए।' यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में टकराव बढ़ता जा रहा है।
कांग्रेस का विरोध-प्रदर्शन
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन किए और उनके इस्तीफे तथा गिरफ्तारी की माँग की। प्रदर्शन नई दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़, ओडिशा समेत अनेक स्थानों पर हुए।
दिल्ली में युवा कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को लेकर मार्च किया। चंडीगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय का घेराव करने का प्रयास किया, जिसके दौरान कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए और यह कथित 'वोट चोरी' की साजिश है। गौरतलब है कि ये आरोप कांग्रेस एवं अन्य पक्षों की ओर से लगाए गए हैं और चुनाव आयोग ने इन्हें अभी तक स्वीकार नहीं किया है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
इसी बीच सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसमें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जाँच की माँग की गई है। यह याचिका एसआईआर विवाद को कानूनी दायरे में ले जाने का पहला संकेत है।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग ने 23 सितंबर 2026 को जारी एक प्रेस नोट में आयोग के भीतर मतभेद को संस्थागत टकराव के रूप में पेश किए जाने को खारिज किया था। आयोग के अनुसार, बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में आंतरिक आपत्तियाँ और लिखित टिप्पणियाँ स्थापित प्रक्रिया का हिस्सा हैं, और मतभेद की स्थिति में निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं। अब देखना यह होगा कि आयोग कुशवाहा समेत विभिन्न पक्षों की स्पष्टीकरण की माँग पर क्या रुख अपनाता है।