एसआईआर पर BJP का पलटवार: चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार, कांग्रेस बेवजह हंगामा कर रही
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 11 अक्टूबर 2026 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर नई दिल्ली में हुए सीजेपी के प्रदर्शन और कांग्रेस के वोट चोरी के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया। BJP नेताओं ने एक स्वर में कहा कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) कराना निर्वाचन आयोग का संवैधानिक अधिकार है और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना बेबुनियाद है।
BJP का सीधा जवाब
बिहार भाजपा उपाध्यक्ष हरि भूषण ठाकुर ने कहा, 'जिस मुद्दे पर कांग्रेस आंदोलन कर रही है, वह कोई मुद्दा ही नहीं है। चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर देश के 100 से अधिक पूर्व आईएएस और आईएफएस अधिकारियों ने खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने देश की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की है।'
ठाकुर ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 1989 से पहले बूथ कैप्चरिंग इतनी सामान्य घटना थी कि उस वर्ष इसे कानूनी अपराध घोषित करना पड़ा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कांग्रेस शासनकाल में सेवानिवृत्त चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री अथवा सांसद बनाया गया — जबकि आज वही पार्टी आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठा रही है।
एसआईआर प्रक्रिया क्या है और इसमें क्या हुआ
ठाकुर के अनुसार, पूरी एसआईआर प्रक्रिया में लगभग 35 लाख लोग कार्यरत हैं, जिनमें करीब 9 लाख सरकारी बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) और शेष राजनीतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंट (BLA) हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया 60 दिनों की है और ड्राफ्ट प्रकाशन के समय सभी दलों के जिलाध्यक्षों को ड्राफ्ट प्रति दी जाती है तथा एक महीने तक आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलता है।
BJP नेता ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे मृतक, स्थायी रूप से पलायन कर चुके अथवा डुप्लीकेट मतदाता हैं। उन्होंने कांग्रेस के अपने नेताओं को ही उद्धृत करते हुए कहा कि संसद के रिकॉर्ड में दर्ज है कि कांग्रेस नेताओं — जिनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं — ने स्वयं कहा था कि किसी राज्य में 50 लाख तो किसी में 70 लाख फर्जी मतदाता हैं।
राज्यपाल और BJP सांसद की प्रतिक्रिया
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि राजनीतिक राय रखना किसी का अधिकार है, किंतु इस प्रकार कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न करना किसी के हित में नहीं। उन्होंने अपील की कि शिकायत हो तो लोकतांत्रिक मंचों पर बात रखी जाए, न कि अफरातफरी के जरिए।
BJP सांसद नरेश बंसल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, वामपंथी दल, अरविंद केजरीवाल और सीजेपी सभी सुर्खियाँ बटोरने की होड़ में देश को अराजकता की ओर धकेल रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ये ताकतें देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए विदेशी शक्तियों के साथ काम कर रही हैं। गौरतलब है कि यह एक राजनीतिक आरोप है जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संदर्भ
बंसल ने सीजेपी के प्रदर्शन से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर कहा कि न्यायालय का निर्णय कानून-व्यवस्था और शांति दोनों को ध्यान में रखता है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सबको है, परंतु अफरातफरी की अनुमति नहीं दी जा सकती।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब एसआईआर की प्रक्रिया अभी जारी है और विपक्ष के आरोप निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता को केंद्र में ला रहे हैं। BJP की कड़ी प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा संसद और सड़क — दोनों जगह गरमाया रह सकता है।