11 अक्टूबर 2026
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एसआईआर पर BJP का पलटवार: चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार, कांग्रेस बेवजह हंगामा कर रही

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एसआईआर पर BJP का पलटवार: चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार, कांग्रेस बेवजह हंगामा कर रही

सारांश

एसआईआर को लेकर कांग्रेस और सीजेपी के विरोध पर BJP ने तीखा जवाब दिया — चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार बताया और कांग्रेस के अपने नेताओं के संसदीय बयानों से फर्जी मतदाताओं का हवाला देकर विपक्ष को घेरा।

मुख्य बातें

BJP ने 11 अक्टूबर 2026 को एसआईआर विवाद पर कांग्रेस और सीजेपी के आरोपों का खंडन किया।
बिहार BJP उपाध्यक्ष हरि भूषण ठाकुर ने कहा — एसआईआर कराना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार है; हटाए गए नाम मृतक, पलायनित या डुप्लीकेट मतदाताओं के हैं।
एसआईआर प्रक्रिया में लगभग 35 लाख लोग कार्यरत, जिनमें 9 लाख सरकारी BLO; प्रक्रिया की अवधि 60 दिन ।
BJP ने कांग्रेस नेताओं के संसदीय बयानों का हवाला दिया जिनमें 50-70 लाख फर्जी मतदाताओं का जिक्र था।
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने अपील की — शिकायत लोकतांत्रिक मंचों पर रखें, कानून-व्यवस्था न बिगाड़ें।
BJP सांसद नरेश बंसल ने विपक्ष पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर अराजकता फैलाने का राजनीतिक आरोप लगाया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 11 अक्टूबर 2026 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर नई दिल्ली में हुए सीजेपी के प्रदर्शन और कांग्रेस के वोट चोरी के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया। BJP नेताओं ने एक स्वर में कहा कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) कराना निर्वाचन आयोग का संवैधानिक अधिकार है और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना बेबुनियाद है।

BJP का सीधा जवाब

बिहार भाजपा उपाध्यक्ष हरि भूषण ठाकुर ने कहा, 'जिस मुद्दे पर कांग्रेस आंदोलन कर रही है, वह कोई मुद्दा ही नहीं है। चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर देश के 100 से अधिक पूर्व आईएएस और आईएफएस अधिकारियों ने खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने देश की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की है।'

ठाकुर ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 1989 से पहले बूथ कैप्चरिंग इतनी सामान्य घटना थी कि उस वर्ष इसे कानूनी अपराध घोषित करना पड़ा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कांग्रेस शासनकाल में सेवानिवृत्त चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री अथवा सांसद बनाया गया — जबकि आज वही पार्टी आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठा रही है।

एसआईआर प्रक्रिया क्या है और इसमें क्या हुआ

ठाकुर के अनुसार, पूरी एसआईआर प्रक्रिया में लगभग 35 लाख लोग कार्यरत हैं, जिनमें करीब 9 लाख सरकारी बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) और शेष राजनीतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंट (BLA) हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया 60 दिनों की है और ड्राफ्ट प्रकाशन के समय सभी दलों के जिलाध्यक्षों को ड्राफ्ट प्रति दी जाती है तथा एक महीने तक आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलता है।

BJP नेता ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे मृतक, स्थायी रूप से पलायन कर चुके अथवा डुप्लीकेट मतदाता हैं। उन्होंने कांग्रेस के अपने नेताओं को ही उद्धृत करते हुए कहा कि संसद के रिकॉर्ड में दर्ज है कि कांग्रेस नेताओं — जिनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं — ने स्वयं कहा था कि किसी राज्य में 50 लाख तो किसी में 70 लाख फर्जी मतदाता हैं।

राज्यपाल और BJP सांसद की प्रतिक्रिया

पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि राजनीतिक राय रखना किसी का अधिकार है, किंतु इस प्रकार कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न करना किसी के हित में नहीं। उन्होंने अपील की कि शिकायत हो तो लोकतांत्रिक मंचों पर बात रखी जाए, न कि अफरातफरी के जरिए।

BJP सांसद नरेश बंसल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, वामपंथी दल, अरविंद केजरीवाल और सीजेपी सभी सुर्खियाँ बटोरने की होड़ में देश को अराजकता की ओर धकेल रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ये ताकतें देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए विदेशी शक्तियों के साथ काम कर रही हैं। गौरतलब है कि यह एक राजनीतिक आरोप है जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संदर्भ

बंसल ने सीजेपी के प्रदर्शन से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर कहा कि न्यायालय का निर्णय कानून-व्यवस्था और शांति दोनों को ध्यान में रखता है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सबको है, परंतु अफरातफरी की अनुमति नहीं दी जा सकती।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब एसआईआर की प्रक्रिया अभी जारी है और विपक्ष के आरोप निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता को केंद्र में ला रहे हैं। BJP की कड़ी प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा संसद और सड़क — दोनों जगह गरमाया रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उन्हें सुधारने का तंत्र कितना प्रभावी है। 60-दिवसीय आपत्ति प्रक्रिया की मौजूदगी सैद्धांतिक रूप से पर्याप्त दिखती है, परंतु निचले स्तर पर जागरूकता और पहुँच की कमी इसे व्यवहार में कमजोर बना सकती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है: विवाद केवल संवैधानिक वैधता का नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (SIR) क्या होता है और इसे क्यों कराया जाता है?
एसआईआर यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत भारत निर्वाचन आयोग मतदाता सूचियों को अद्यतन करता है — मृत, पलायनित या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और नए पात्र मतदाता जोड़े जाते हैं। यह संवैधानिक ढाँचे के अंतर्गत आयोग का नियमित अधिकार है।
कांग्रेस और सीजेपी एसआईआर का विरोध क्यों कर रहे हैं?
कांग्रेस और सीजेपी का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया में वैध मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहे हैं। इसी माँग को लेकर नई दिल्ली में सीजेपी ने प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग उठाई।
BJP ने एसआईआर विवाद पर क्या कहा?
बिहार BJP उपाध्यक्ष हरि भूषण ठाकुर ने कहा कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार है और जिनके नाम कटे हैं वे मृतक, पलायनित या डुप्लीकेट मतदाता हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के उन संसदीय बयानों का भी हवाला दिया जिनमें 50 से 70 लाख तक फर्जी मतदाताओं का जिक्र था।
एसआईआर प्रक्रिया में आम नागरिक आपत्ति कैसे दर्ज करा सकते हैं?
BJP नेता हरि भूषण ठाकुर के अनुसार, ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद सभी राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों को ड्राफ्ट प्रति दी जाती है और नागरिकों को एक महीने तक आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलता है। पूरी प्रक्रिया 60 दिनों में पूरी होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी के प्रदर्शन पर क्या रुख अपनाया?
BJP सांसद नरेश बंसल के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में कानून-व्यवस्था और शांति दोनों का ध्यान रखा गया है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, परंतु अफरातफरी की अनुमति नहीं दी जा सकती।
राष्ट्र प्रेस
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