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भूपेंद्र यादव: एसआईआर नहीं, जनता से विपक्ष का टूटा जुड़ाव है हार का कारण

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भूपेंद्र यादव: एसआईआर नहीं, जनता से विपक्ष का टूटा जुड़ाव है हार का कारण

सारांश

BJP के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव ने पटना में विपक्ष को सीधी चुनौती दी — एसआईआर 1950 से चली आ रही संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसे 8 बार अपनाया जा चुका है। 1.60 लाख BLA में से महज दो आपत्तियाँ दर्ज होना विपक्ष की खोखली राजनीति को उजागर करता है।

मुख्य बातें

भूपेंद्र यादव ने 5 नवंबर 2026 को पटना में कहा कि चुनावी जीत-हार का संबंध एसआईआर से नहीं, बल्कि जनता से विपक्ष के टूटे जुड़ाव से है।
एसआईआर संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक सामान्य प्रक्रिया है; 1950 से 2024 तक 8 बार हो चुकी है।
बिहार में 7.89 करोड़ मतदाताओं का घर-घर सत्यापन हुआ; 1.60 लाख BLA में से केवल 2 आपत्तियाँ दर्ज कराई गईं — यह तथ्य सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान सामने आया।
कांग्रेस ने 89 लाख नाम काटे जाने का दावा किया, लेकिन फॉर्म-7 के ज़रिये औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से संसद में आकर खुली चर्चा करने की अपील की।
BJP का 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव ने 5 नवंबर 2026 को पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भ्रम फैलाने और लोकतंत्र के नाम पर अराजकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनावी जीत-हार का कोई संबंध एसआईआर से नहीं है — असली कारण जनता से विपक्ष का टूटा हुआ जुड़ाव है।

एसआईआर पर विपक्ष के आरोप और सरकार का जवाब

भूपेंद्र यादव ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है, जो संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित की जाती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1950 से 2024 तक ऐसे आठ गहन पुनरीक्षण हो चुके हैं और पहले कभी किसी राजनीतिक दल ने इस पर आपत्ति नहीं जताई थी।

यादव ने कहा कि इस प्रक्रिया के तहत मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं के नामों को दुरुस्त किया जाता है — जो किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है।

बिहार में सत्यापन प्रक्रिया और आपत्तियों का आँकड़ा

बिहार में लगभग 7.89 करोड़ मतदाताओं के लिए घर-घर जाकर सत्यापन किया गया। राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) को प्रारूप मतदाता सूची भी उपलब्ध कराई गई थी। यादव ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि 1.60 लाख BLA में से केवल दो आपत्तियाँ दर्ज कराई गईं।

उन्होंने कांग्रेस पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने 89 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का दावा किया था, लेकिन निर्वाचन आयोग द्वारा फॉर्म-7 भरने का अवसर दिए जाने के बावजूद औपचारिक आपत्तियाँ दर्ज नहीं कराई गईं। यादव का तर्क था कि यदि विपक्ष को वास्तविक आपत्ति थी, तो उसे संवैधानिक प्रक्रिया का उपयोग करना चाहिए था।

विपक्ष की दोहरी नीति पर प्रहार

यादव ने कहा कि विपक्ष का रवैया स्पष्ट रूप से दोहरा है — जहाँ जीत मिलती है, वहाँ लोकतंत्र की जीत बताई जाती है, और जहाँ हार होती है, वहाँ एसआईआर और ईवीएम पर दोष मढ़ा जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केरल में जीत को लोकतंत्र की जीत बताने वाले दल बिहार और अन्य राज्यों में हार के बाद चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगते हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और समाजवादी पार्टी (SP) के थिंक टैंक पर चरमपंथी विचारधारा के लोगों का प्रभाव बढ़ा है, जो इन दलों के निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं।

नागरिकता, घुसपैठ और दिल्ली प्रदूषण पर बयान

घुसपैठ के सवाल पर यादव ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के अंतर्गत मतदाता की पात्रता के लिए भारतीय नागरिकता और 18 वर्ष की आयु अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पात्र नागरिकों को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा, जबकि अपात्र प्रविष्टियाँ हटाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

दिल्ली के वायु प्रदूषण पर यादव ने कहा कि सरकार इस विषय पर संवेदनशील है और निर्माण कार्यों पर रोक, वर्क फ्रॉम होम तथा NCR के लिए एकीकृत कार्ययोजना जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से संसद में आकर इन विषयों पर खुली चर्चा करने की अपील भी की।

BJP का 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान

यादव ने बताया कि BJP का 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान जनता तक सच्चाई पहुँचाने, भ्रम दूर करने और सामाजिक एकता बनाए रखने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा BJP की पंच निष्ठाओं में सर्वोच्च स्थान पर है। आने वाले दिनों में यह अभियान पूरे देश में विस्तार पाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि सहमति से। असली सवाल यह है कि क्या सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता और नागरिक सहभागिता पर्याप्त थी — यह बिंदु यादव के भाषण में अनुत्तरित रहा। विपक्ष का दोहरापन उजागर करना एक वैध राजनीतिक पैंतरा है, लेकिन निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सार्वजनिक विश्वास तब ही मज़बूत होगा जब सरकार और आयोग दोनों आलोचना को टालने की जगह उससे संवाद करें।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और यह विवाद में क्यों है?
एसआईआर यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत निर्वाचन आयोग मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं के नाम हटाता है। यह प्रक्रिया 1950 से 2024 के बीच 8 बार हो चुकी है। विपक्ष इस बार इसे बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने से जोड़ रहा है, जिसे BJP नेता भूपेंद्र यादव ने भ्रामक करार दिया है।
बिहार में मतदाता सूची सत्यापन के दौरान कितनी आपत्तियाँ दर्ज हुईं?
बिहार में 7.89 करोड़ मतदाताओं के लिए घर-घर सत्यापन किया गया और राजनीतिक दलों के 1.60 लाख बूथ लेवल एजेंटों (BLA) को प्रारूप मतदाता सूची उपलब्ध कराई गई थी। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान सामने आया कि इनमें से केवल 2 आपत्तियाँ दर्ज कराई गईं।
कांग्रेस ने 89 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का दावा किया, इस पर क्या हुआ?
भूपेंद्र यादव के अनुसार, कांग्रेस ने 89 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगाया, लेकिन निर्वाचन आयोग द्वारा फॉर्म-7 के ज़रिये औपचारिक आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिए जाने के बावजूद पार्टी ने ऐसा नहीं किया। यादव ने इसे विपक्ष की राजनीतिक असंगति बताया।
BJP का 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान क्या है?
यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा चलाया जा रहा राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करना और लोकतांत्रिक संवाद को मज़बूत करना है। भूपेंद्र यादव ने बताया कि लोकतंत्र की रक्षा BJP की पंच निष्ठाओं में प्रथम स्थान पर है।
भूपेंद्र यादव ने राहुल गांधी से क्या अपील की?
भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से संसद में आकर मतदाता सूची, एसआईआर और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर खुली चर्चा करने की अपील की। उनका कहना था कि यदि विपक्ष के पास वास्तविक आपत्तियाँ हैं, तो उन्हें संवैधानिक मंच पर सामने रखना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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