अदाणी पोर्ट्स ने यूरोपीय कंपनी इवोस का ₹2.56 अरब यूरो में अधिग्रहण किया, वैश्विक विस्तार की बड़ी छलांग
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने 5 नवंबर 2026 को यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्वतंत्र लिक्विड स्टोरेज ऑपरेटर इवोस बी.वी. का 2.56 अरब यूरो की एंटरप्राइज़ वैल्यू पर पूर्ण नकद सौदे में अधिग्रहण करने की घोषणा की। नीदरलैंड स्थित इस कंपनी में इग्नियो इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी जाएगी। यह सौदा भारतीय बंदरगाह क्षेत्र के इतिहास में यूरोप में किया गया अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण माना जा रहा है।
सौदे की संरचना और वित्तीय विवरण
इस अधिग्रहण में इवोस का इक्विटी मूल्य 1.18 अरब यूरो आंका गया है। अधिग्रहण मल्टीपल CY25 के EV/EBITDA का 11.7 गुना है। सौदे के लिए आवश्यक धनराशि कर्ज के माध्यम से जुटाई जाएगी। अधिग्रहण के बाद संयुक्त इकाई का प्रो फॉर्मा नेट डेट टू EBITDA अनुपात 2.76 गुना रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2027 तक घटकर लगभग 2.5 गुना हो जाने की उम्मीद है।
सौदा अभी नियामकीय स्वीकृतियों और वर्क्स काउंसिल परामर्श प्रक्रिया के अधीन है, जो पूरी होने के बाद ही यह लेनदेन अंतिम रूप लेगा।
इवोस की क्षमता और यूरोप में उपस्थिति
नीदरलैंड में मुख्यालय वाली इवोस नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम और माल्टा में रणनीतिक रूप से स्थित आठ बंदरगाह आधारित टर्मिनलों के ज़रिए 6.3 मिलियन क्यूबिक मीटर की स्टोरेज क्षमता संचालित करती है। कंपनी की उपस्थिति प्रमुख ऊर्जा और औद्योगिक केंद्रों — एम्स्टर्डम रॉटरडैम एंटवर्प क्षेत्र, हैम्बर्ग और भूमध्यसागरीय क्षेत्र — में है।
कैलेंडर वर्ष 2025 में इवोस ने 392 मिलियन यूरो की आय और 219 मिलियन यूरो का EBITDA दर्ज किया, जो 56 प्रतिशत का मजबूत EBITDA मार्जिन दर्शाता है — यह उस क्षेत्र में एक ठोस परिचालन संकेतक है।
करण अदाणी का बयान
APSEZ के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने कहा, "APSEZ के लिए 'इवोस' एक महत्वपूर्ण अधिग्रहण है, जो हमें एक अरब टन कार्गो संभालने और एक वास्तविक वैश्विक, एकीकृत परिवहन प्लेटफॉर्म बनाने के हमारे लक्ष्य के करीब ले जाता है। हम अपने पोर्टफोलियो में 'इवोस' का स्वागत करते हुए बेहद खुश हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "हम यूरोप के साथ साझेदारी करने, वहाँ सस्टेनेबल एनर्जी ट्रांज़िशन में सहयोग देने और दीर्घकालिक मूल्य बनाने के लिए उत्सुक हैं। साथ ही, हम अपनी वित्तीय समझदारी को भी बनाए रखेंगे, जो हमारी विकास यात्रा का आधार है।"
वैश्विक रणनीति पर असर
यह सौदा ऐसे समय में आया है जब APSEZ भारत के बाहर अपनी परिचालन उपस्थिति तेज़ी से बढ़ा रही है — श्रीलंका, इज़राइल और तंज़ानिया में बंदरगाह परियोजनाओं के बाद यह यूरोप में पहला बड़ा कदम है। गौरतलब है कि लिक्विड स्टोरेज अवसंरचना — जो क्रूड ऑयल, रसायनों और नवीकरणीय ऊर्जा ईंधन के भंडारण के लिए अनिवार्य है — वैश्विक ऊर्जा संक्रमण के बीच विशेष रणनीतिक महत्व रखती है। APSEZ के लिए यह सौदा महज भौगोलिक विस्तार नहीं, बल्कि यूरोप के तेज़ी से बदलते ऊर्जा मानचित्र में एक दीर्घकालिक दाँव है।