झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस रिक्त पदों और शिकायत प्राधिकरण पर सरकार से माँगा शपथ पत्र
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाई कोर्ट ने 5 नवंबर 2026 को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह शपथ पत्र के माध्यम से स्पष्ट करे कि झारखंड पुलिस में कुल कितने पद स्वीकृत हैं और उनमें से कितने पद इस समय रिक्त हैं। साथ ही, अदालत ने राज्य एवं जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण के गठन और उसकी कार्यशीलता की पूरी स्थिति भी माँगी है। यह सुनवाई एक ऐसे समय में हुई जब राज्य में पुलिस जवाबदेही को लेकर सवाल लगातार उठाए जा रहे हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एस. सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले में सुनवाई की। यह मामला अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसका विषय स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी (SPCA) और जिला स्तरीय पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद देश के कई राज्यों में ऐसी संस्थाओं का गठन और संचालन अधूरा बना हुआ है।
अदालत के प्रमुख सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या झारखंड में स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी और जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन किया जा चुका है, और यदि हाँ, तो क्या ये संस्थाएँ वास्तव में सक्रिय हैं। अदालत ने विशेष रूप से SPCA की कार्यशीलता की स्थिति विस्तार से स्पष्ट करने को कहा।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी का गठन किया जा चुका है। हालाँकि, इसके वास्तविक कामकाज और जिला स्तर पर ऐसी संस्थाओं की स्थापना के बारे में अदालत ने विस्तृत जानकारी की माँग की है।
पुलिस जवाबदेही का महत्त्व
इन प्राधिकरणों का मूल उद्देश्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना और पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही स्थापित करना है। पुलिस बल में रिक्त पदों की स्थिति न केवल प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित करती है, बल्कि आम नागरिकों को मिलने वाली सुरक्षा-सेवाओं पर भी सीधा असर डालती है।
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस भर्ती प्रक्रिया पर सार्वजनिक बहस तेज़ हो रही है। रिक्त पदों की संख्या यदि अधिक पाई जाती है, तो यह राज्य सरकार के लिए नीतिगत दबाव का विषय बन सकती है।
आगे क्या होगा
हाई कोर्ट ने सरकार को सभी बिंदुओं पर शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में निर्धारित की गई है। अदालत के इस कदम से राज्य में पुलिस भर्ती और शिकायत निवारण तंत्र की पारदर्शिता पर नई बहस शुरू होने की संभावना है।