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झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस रिक्त पदों और शिकायत प्राधिकरण पर सरकार से माँगा शपथ पत्र

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झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस रिक्त पदों और शिकायत प्राधिकरण पर सरकार से माँगा शपथ पत्र

सारांश

झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा — पुलिस में कितने पद खाली हैं और शिकायत प्राधिकरण काम कर रहे हैं या नहीं? मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एस. सोनक की अध्यक्षता में सुनवाई हुई; जवाब शपथ पत्र के ज़रिए माँगा गया। अगली तारीख जनवरी 2027।

मुख्य बातें

झारखंड हाई कोर्ट ने 5 नवंबर 2026 को राज्य सरकार को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने झारखंड पुलिस के स्वीकृत और रिक्त पदों की संख्या बताने को कहा।
स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी (SPCA) का गठन होने की जानकारी सरकार ने दी, लेकिन कार्यशीलता पर विस्तृत ब्यौरा माँगा गया।
जिला स्तरीय पुलिस शिकायत प्राधिकरण के गठन और संचालन की स्थिति भी स्पष्ट करने का निर्देश।
मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में निर्धारित।

झारखंड हाई कोर्ट ने 5 नवंबर 2026 को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह शपथ पत्र के माध्यम से स्पष्ट करे कि झारखंड पुलिस में कुल कितने पद स्वीकृत हैं और उनमें से कितने पद इस समय रिक्त हैं। साथ ही, अदालत ने राज्य एवं जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण के गठन और उसकी कार्यशीलता की पूरी स्थिति भी माँगी है। यह सुनवाई एक ऐसे समय में हुई जब राज्य में पुलिस जवाबदेही को लेकर सवाल लगातार उठाए जा रहे हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एस. सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले में सुनवाई की। यह मामला अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसका विषय स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी (SPCA) और जिला स्तरीय पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद देश के कई राज्यों में ऐसी संस्थाओं का गठन और संचालन अधूरा बना हुआ है।

अदालत के प्रमुख सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या झारखंड में स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी और जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन किया जा चुका है, और यदि हाँ, तो क्या ये संस्थाएँ वास्तव में सक्रिय हैं। अदालत ने विशेष रूप से SPCA की कार्यशीलता की स्थिति विस्तार से स्पष्ट करने को कहा।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी का गठन किया जा चुका है। हालाँकि, इसके वास्तविक कामकाज और जिला स्तर पर ऐसी संस्थाओं की स्थापना के बारे में अदालत ने विस्तृत जानकारी की माँग की है।

पुलिस जवाबदेही का महत्त्व

इन प्राधिकरणों का मूल उद्देश्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना और पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही स्थापित करना है। पुलिस बल में रिक्त पदों की स्थिति न केवल प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित करती है, बल्कि आम नागरिकों को मिलने वाली सुरक्षा-सेवाओं पर भी सीधा असर डालती है।

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस भर्ती प्रक्रिया पर सार्वजनिक बहस तेज़ हो रही है। रिक्त पदों की संख्या यदि अधिक पाई जाती है, तो यह राज्य सरकार के लिए नीतिगत दबाव का विषय बन सकती है।

आगे क्या होगा

हाई कोर्ट ने सरकार को सभी बिंदुओं पर शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में निर्धारित की गई है। अदालत के इस कदम से राज्य में पुलिस भर्ती और शिकायत निवारण तंत्र की पारदर्शिता पर नई बहस शुरू होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ज़मीन पर नहीं। रिक्त पदों की जानकारी माँगना महज़ प्रशासनिक औपचारिकता नहीं — यह एक संकेत है कि अदालत भर्ती-अंतराल और जवाबदेही-शून्यता के बीच सीधा संबंध देख रही है। असली परीक्षा यह होगी कि सरकार का शपथ पत्र आँकड़े देता है या फिर वादे।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से क्या जानकारी माँगी है?
अदालत ने शपथ पत्र के ज़रिए झारखंड पुलिस में स्वीकृत और रिक्त पदों की संख्या, तथा राज्य एवं जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण के गठन और कार्यशीलता की पूरी स्थिति बताने को कहा है।
स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी (SPCA) क्या है और झारखंड में इसकी स्थिति क्या है?
SPCA एक स्वतंत्र संस्था है जो पुलिसकर्मियों के विरुद्ध शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई के लिए बनाई जाती है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि झारखंड में इसका गठन हो चुका है, लेकिन इसके वास्तविक कामकाज पर विस्तृत जवाब अभी माँगा गया है।
यह मामला अदालत के सामने कैसे आया?
यह मामला झारखंड हाई कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका के तहत है, जो राज्य और जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण के गठन से जुड़ा है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एस. सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 5 नवंबर 2026 को इसकी सुनवाई की।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई जनवरी 2027 में निर्धारित की है। तब तक सरकार को शपथ पत्र दाखिल करना होगा।
पुलिस में रिक्त पदों का आम नागरिकों पर क्या असर पड़ता है?
पुलिस बल में रिक्त पदों की अधिक संख्या सुरक्षा-सेवाओं की उपलब्धता, अपराध नियंत्रण और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर सीधा नकारात्मक प्रभाव डालती है। इसके साथ ही, यह कार्यरत पुलिसकर्मियों पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ाती है।
राष्ट्र प्रेस
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