डीए बकाया विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब मुख्य सचिव के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा आरंभ की गई आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। यह विवाद राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते (डीए) तथा महंगाई राहत (डीआर) की बकाया किस्तें न चुकाए जाने से उपजा है।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने निर्देश दिया कि सिविल अवमानना की कार्यवाही में मुख्य सचिव के विरुद्ध भी कोई कठोर कदम न उठाया जाए। इस प्रकार शीर्ष अदालत ने पंजाब सरकार को आपराधिक और सिविल — दोनों अवमानना कार्यवाहियों में एकसाथ अंतरिम राहत प्रदान की।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई दिसंबर 2026 तक के लिए स्थगित करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट शब्दों में कहा: 'आपको कुछ समय मिल गया है। एक सकारात्मक जवाब लेकर आएं। आप कितनी राशि जारी करेंगे?' कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह बकाया भुगतान के संबंध में एक ठोस और सकारात्मक प्रतिक्रिया की अपेक्षा रखता है।
सरकार पर शर्त — मार्च 2027 तक योजना अनिवार्य
अंतरिम राहत देने के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार पर एक अहम शर्त भी लगाई — राज्य को मार्च 2027 तक संपूर्ण बकाया राशि के भुगतान के लिए एक ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी। यह राहत सशर्त है और बकाये का प्रश्न अभी भी न्यायालय के सामने विचाराधीन रहेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले उच्च न्यायालय की सिविल अवमानना कार्यवाही के दौरान अनुपालन रिपोर्ट दाखिल न करने पर मुख्य सचिव पर ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के 3 अगस्त के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें पंजाब राज्य सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को अपने समस्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को डीए एवं डीआर की सभी बकाया किस्तें जारी करने का निर्देश दिया गया था।
राज्य सरकार के उस आदेश का अनुपालन न करने पर उच्च न्यायालय ने सिविल और आपराधिक, दोनों प्रकार की अवमानना कार्यवाही शुरू की। इसके बाद पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के इन आदेशों को सर्वोच्च न्यायालय में स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) के ज़रिए चुनौती दी।
उच्च न्यायालय ने भी सुनवाई टाली
इसी बीच, गुरुवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी आपराधिक अवमानना मामले की अपनी सुनवाई स्थगित कर दी। कोर्ट को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय पंजाब सरकार की एसएलपी पर सुनवाई कर रहा है, जिसके बाद उच्च न्यायालय ने अपनी कार्यवाही रोकना उचित समझा।
आगे क्या होगा
अब सभी की नज़रें दिसंबर 2026 में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब पंजाब सरकार को बकाया डीए और डीआर भुगतान के लिए अपनी विस्तृत कार्ययोजना सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखनी होगी। यह मामला लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वित्तीय हितों से सीधे जुड़ा है, और अदालत की सख्त टिप्पणी यह संकेत देती है कि राहत केवल अस्थायी है।