पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को हाई कोर्ट का अवमानना नोटिस, डीए बकाया न देने पर 17 नवंबर तक माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 3 नवंबर 2026 को पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को अवमानना नोटिस जारी किया, क्योंकि राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के बकाया भुगतान के संबंध में न्यायिक निर्देशों का पालन नहीं किया। अदालत ने सिन्हा को 17 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है, जिसमें स्पष्ट करना होगा कि न्यायिक निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह कार्यवाही सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान हुई। याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्पष्ट न्यायिक निर्देशों के बावजूद पंजाब सरकार ने डीए और डीआर की लंबित किस्तें जारी नहीं की हैं। गौरतलब है कि यह मामला हाई कोर्ट के 3 अगस्त के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें राज्य सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार — पंजाब में कार्यरत अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों पर लागू दरों के बराबर — सभी लंबित डीए और डीआर किस्तें जारी करने का निर्देश दिया गया था।
कोर्ट में क्या हुआ
मुख्य सचिव केएपी सिन्हा मंगलवार की सुनवाई के दौरान अदालत में स्वयं उपस्थित हुए। हालाँकि, आदेशों के क्रियान्वयन में देरी के बारे में सरकार का स्पष्टीकरण अदालत को संतुष्ट नहीं कर सका। अदालत ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि पहले भी कई अवसर दिए जा चुके थे, फिर भी बकाया राशि के भुगतान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए।
सुप्रीम कोर्ट का हवाला और हाई कोर्ट की स्पष्टता
सरकार ने अदालत को बताया कि उसने हाई कोर्ट के पूर्व निर्देशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और उस अपील में प्रक्रियात्मक खामियाँ दूर कर दी गई हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह मामला शीघ्र ही सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के लिए आ सकता है। इस पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में केवल अपील दायर करने से हाई कोर्ट के फैसले का प्रभाव स्वतः निलंबित नहीं होता। जब तक सुप्रीम कोर्ट निर्देशों पर रोक नहीं लगाता, राज्य सरकार कानूनी रूप से उनका पालन करने के लिए बाध्य है।
भुगतान की शर्तें और ब्याज का प्रावधान
हाई कोर्ट ने अपने 3 अगस्त के आदेश में निर्देश दिया था कि बकाया भुगतान पखवाड़े के भीतर जारी किया जाए। साथ ही, निर्धारित समय सीमा से अधिक की किसी भी देरी पर वास्तविक भुगतान होने तक 6 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से साधारण ब्याज लगाने का भी प्रावधान किया गया था। अब अवमानना नोटिस जारी होने के बाद सरकार पर न केवल बकाया चुकाने, बल्कि इस विलंब का औचित्य सिद्ध करने का भी दबाव है।
आगे की राह
अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित है, जब मुख्य सचिव को अदालत के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। यदि सरकार संतोषजनक स्पष्टीकरण देने या बकाया भुगतान का ठोस रोडमैप प्रस्तुत करने में विफल रहती है, तो अदालत अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ा सकती है। यह मामला राज्य के हज़ारों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हितों से सीधे जुड़ा है, जो वर्षों से बकाया डीए और डीआर का इंतज़ार कर रहे हैं।