पंजाब के मुख्य सचिव पर हाईकोर्ट का ₹1 लाख जुर्माना, डीए केस में 3 नवंबर को तलब
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 27 अक्टूबर 2026 को डीए केस में पंजाब के मुख्य सचिव पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया और उन्हें 3 नवंबर को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया। न्यायालय के निर्देशों का पालन न किए जाने पर यह कार्रवाई दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद की गई।
अदालत का आदेश और मुख्य निर्देश
बेंच ने मुख्य सचिव को एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया, जिसमें स्पष्ट करना होगा कि हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों को क्यों लागू नहीं किया गया। यह आदेश तब आया जब पंजाब सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दो माह से अधिक समय से डिफेक्ट लिस्ट में लटकी हुई थी।
डीए केस की पृष्ठभूमि
पंजाब डीए केस पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक हाई-प्रोफाइल कानूनी विवाद है। यह मामला पंजाब सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबित महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के बकाये का भुगतान न किए जाने से जुड़ा है। गौरतलब है कि राज्य सरकारी कर्मचारी और पेंशनर लंबे समय से इस बकाये का इंतजार कर रहे हैं।
संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका खारिज
इससे पहले 16 अक्टूबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी ने यह आदेश खुली अदालत में सुनाया।
अरोड़ा ने गुरुग्राम की विशेष अदालत द्वारा 15 जून को उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें वित्तीय अनियमितताओं और जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े मामले में 9 मई को गिरफ्तार किया था।
हैम्पटन स्काई रियल्टी से जुड़ा मामला
यह मामला हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) से जुड़ा है, जिसके अरोड़ा पूर्व में प्रमुख रह चुके हैं। जाँच मोबाइल फोन के निर्यात से संबंधित ₹102.5 करोड़ के लेनदेन और कथित जीएसटी धोखाधड़ी पर केंद्रित है। ईडी की जाँच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के खरीदारों को मोबाइल फोन के कथित निर्यात में अनियमितताओं और जीएसटी रिफंड के कथित फर्जी दावों पर आधारित बताई जा रही है।
अरोड़ा की ओर से दलील दी गई थी कि कैबिनेट मंत्री का पद संभालने के बाद उन्होंने कंपनी के रोज़मर्रा के कामकाज में भाग लेना बंद कर दिया था। बचाव पक्ष का कहना था कि सभी संबंधित दस्तावेज — चालान, जीएसटी रिकॉर्ड, सीमा शुल्क दस्तावेज और बैंकिंग रिकॉर्ड — पहले से जाँच एजेंसी के पास उपलब्ध हैं, इसलिए सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की कोई आशंका नहीं है।
आगे की कार्रवाई
डीए केस में 3 नवंबर 2026 की सुनवाई निर्णायक होगी, जब पंजाब के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने पेश होना होगा और हलफनामा दाखिल करना होगा। न्यायालय का यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि राज्य सरकारी कर्मचारियों के बकाया डीए मामले में अनुपालन में और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।