ढाका में सीपीबी मुख्यालय पर हमला, बीएनपी कार्यकर्ताओं पर 'जय बांग्ला' विवाद में हिंसा के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के पुराना पलटन इलाके में स्थित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ बांग्लादेश (सीपीबी) के मुख्यालय मुक्ति भवन पर कथित तौर पर सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उससे जुड़े संगठनों के सदस्यों ने हमला किया। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना सोमवार रात उस समय हुई जब सीपीबी से संबद्ध छात्र संगठन के पूर्व अध्यक्ष दीपक शील की हिरासत से रिहाई के बाद कार्यकर्ता पलटन इलाके में जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए थे।
घटनाक्रम कैसे बढ़ा
बीडी न्यूज 24 के अनुसार, दीपक शील की रिहाई के बाद सीपीबी से जुड़े संगठनों — जुबो यूनियन तथा बांग्लादेश स्टूडेंट्स यूनियन — के कार्यकर्ताओं ने पलटन चौराहे पर एक संक्षिप्त रैली निकाली। रैली के दौरान 'जय बांग्ला' के नारे लगाए गए। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बीएनपी से जुड़े संगठनों — जुबो दल और छात्र दल — के कथित तौर पर लगभग 40 से 50 सदस्यों ने इस नारे पर आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच पहले जुबानी टकराव और फिर मारपीट का आरोप लगाया गया।
बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, जुबो दल और छात्र दल के सदस्यों ने इसके जवाब में 'अवामी लीग का ठिकाना, इस बंगाल में नहीं होगा' के नारे लगाए। काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच जुबानी टकराव चलने के बाद सीपीबी के दो कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया।
मुक्ति भवन कार्यालय पर धावा
प्रत्यक्षदर्शियों और सीपीबी नेताओं के अनुसार, चौराहे पर भड़की यह हिंसा बाद में सीपीबी के केंद्रीय कार्यालय मुक्ति भवन तक फैल गई। बड़ी संख्या में लोगों ने परिसर में घुसकर हमला किया। बांग्लादेश स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष माहिर शाहरियार ने बीडी न्यूज 24 से कहा, 'हमारे कार्यालय पर हमला हुआ है। हमलावर स्थानीय बीएनपी नेता हैं, संभवतः पलटन इकाई या उससे जुड़े संगठनों के सदस्य। वे हमें अवामी लीग का समर्थक बताने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय नेताओं और सहयोगी संगठनों के सदस्यों के साथ हम इस समय अंदर फंसे हुए हैं।'
सीपीबी नेताओं की प्रतिक्रिया
सीपीबी की प्रेसीडियम सदस्य जॉली तालुकदार ने प्रोथोम आलो से कहा, 'सरकार को अपनी ही पार्टी के सदस्यों पर लगाम लगानी चाहिए। कोई राजनीतिक दल के कार्यालय के सामने आकर हमला कैसे कर सकता है?' वहीं सीपीबी के महासचिव अब्दुल्ला काफ़ी रतन ने स्पष्ट किया, 'जय बांग्ला हमारे मुक्ति संग्राम का नारा है। अगर किसी ने हमारे जुलूस के दौरान यह नारा लगाया भी, तो यह कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यालय पर हमला करने का बहाना नहीं हो सकता।'
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि 'जय बांग्ला' का नारा ऐतिहासिक रूप से 1971 के मुक्ति संग्राम से जुड़ा है और पूर्व में शेख हसीना की अगुवाई वाली अवामी लीग से भी संबद्ध रहा है। बांग्लादेश में राजनीतिक धुव्रीकरण के इस दौर में यह नारा संवेदनशील विवाद का विषय बन गया है। सीपीबी का तर्क है कि इस नारे को किसी एक दल की संपत्ति नहीं माना जा सकता। यह ऐसी घटनाओं की श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है जो बांग्लादेश में वामपंथी और विपक्षी राजनीतिक दलों के लिए बढ़ते दबाव को रेखांकित करती है।
आगे की स्थिति पर सभी राजनीतिक दलों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नज़र बनी हुई है, क्योंकि इस तरह की घटनाएँ बांग्लादेश में राजनीतिक असहिष्णुता की बढ़ती प्रवृत्ति की ओर इशारा करती हैं।