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औषधि विवाद: पूर्व विधायक शोभना जॉर्ज पर अंडे-गुड़हल ब्यूटी ट्रीटमेंट के आरोप, स्वास्थ्य मंत्री ने जांच के दिए आदेश

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औषधि विवाद: पूर्व विधायक शोभना जॉर्ज पर अंडे-गुड़हल ब्यूटी ट्रीटमेंट के आरोप, स्वास्थ्य मंत्री ने जांच के दिए आदेश

सारांश

सरकारी आयुर्वेदिक संस्थान औषधि में कथित अनधिकृत ब्यूटी ट्रीटमेंट का मामला केरल विधानसभा तक पहुँचा। पूर्व चेयरपर्सन शोभना जॉर्ज ने आरोप खारिज किए और सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक पलटवार किया, जबकि स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन ने जांच के आदेश दे दिए।

मुख्य बातें

सरकारी संस्थान औषधि की पूर्व चेयरपर्सन शोभना जॉर्ज पर पंचकर्म अस्पताल के एयर-कंडीशंड कमरे में अनधिकृत ब्यूटी ट्रीटमेंट कराने का आरोप।
आंतरिक जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर 3 किलो गुड़हल की कलियों , अंडों, नींबू रस और इलादी नारियल तेल के उपयोग का उल्लेख; रिकॉर्ड में कोई जिक्र नहीं।
सजींद्रन ने केरल विधानसभा में मामला उठाया; स्वास्थ्य मंत्री के.
मुरलीधरन ने जांच के आदेश दिए।
शोभना जॉर्ज ने सभी आरोप नकारे, सबूत पेश करने की चुनौती दी और फेसबुक पर व्यंग्यात्मक वीडियो साझा किए।
शोभना चेंगन्नूर से तीन बार कांग्रेस विधायक रहीं; 2016 में सीपीआई(एम) में शामिल हुईं और बाद में औषधि की चेयरपर्सन बनीं।

केरल के सरकारी आयुर्वेदिक संस्थान औषधि की पूर्व चेयरपर्सन और कांग्रेस की पूर्व विधायक शोभना जॉर्ज एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संस्थान के पंचकर्म अस्पताल में एक अनधिकृत ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया, जिसमें कथित तौर पर 3 किलो गुड़हल के फूलों की कलियाँ, मुर्गी के अंडे, नींबू का रस और इलादी नारियल तेल का उपयोग किया गया। तिरुवनंतपुरम से उठा यह विवाद अब केरल विधानसभा और राज्य की राजनीति में गूंज रहा है।

आंतरिक जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया

एक आंतरिक जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर खुलासा हुआ है कि औषधि के पंचकर्म अस्पताल के एक डीलक्स एयर-कंडीशंड कमरे में यह ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस उपचार का अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं है।

रिपोर्ट में यह भी प्रश्न उठाया गया है कि ऐसे उपचार के लिए — जो संस्थान की स्वीकृत चिकित्सा सेवाओं का हिस्सा नहीं है — सरकारी धन और सरकारी चिकित्सकों की सेवाओं का उपयोग क्यों किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला कुछ समय से लंबित था, परंतु अब तक कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई थी।

विधानसभा में उठा मामला, मंत्री ने दिए जांच के आदेश

कांग्रेस विधायक वी. पी. सजींद्रन ने केरल विधानसभा में इस मामले को उठाते हुए कथित ट्रीटमेंट में उपयोग की गई सामग्री पर सवाल खड़े किए। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने स्वीकार किया कि इस संबंध में एक रिपोर्ट मौजूद है और मामले की विधिवत जांच कराई जाएगी।

मुरलीधरन ने यह भी माना कि रिपोर्ट के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था — जो स्वयं एक प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है।

शोभना जॉर्ज का खंडन और सोशल मीडिया पर पलटवार

शोभना जॉर्ज ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने औषधि में कोई ट्रीटमेंट नहीं कराया और अपने आलोचकों को सबूत पेश करने की खुली चुनौती दी है। साथ ही उन्होंने विधानसभा में झूठे आरोप लगाने के लिए सजींद्रन के खिलाफ स्पीकर से शिकायत करने की बात भी कही है।

सोशल मीडिया पर शोभना ने व्यंग्यात्मक अंदाज में पलटवार किया। फेसबुक पर एक वीडियो में उन्होंने लिखा, 'मैं गुड़हल की कलियाँ और मुर्गी के अंडे लगाकर पलारुवी में नहाने आई हूँ।' एक अन्य वीडियो में, जब किसी ने पूछा कि नाश्ते में अंडे क्यों नहीं हैं, तो उन्होंने व्यंग्य में जवाब दिया कि वे सुबह ही 100 अंडे खा चुकी हैं — और बिना गुड़हल की कलियों के अंडे नहीं खाएंगी।

शोभना जॉर्ज का राजनीतिक सफर

शोभना जॉर्ज का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वे चेंगन्नूर से तीन बार केरल विधानसभा के लिए कांग्रेस विधायक के रूप में चुनी गई थीं।

2005 में उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. करुणाकरण के गुट का समर्थन करने के बाद पार्टी से इस्तीफा दे दिया। बाद में करुणाकरण ने 'डेमोक्रेटिक इंदिरा कांग्रेस (करुणाकरण)' का गठन किया, जो कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की सहयोगी बनी। शोभना ने 2006 का विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं।

2016 के विधानसभा चुनावों से पहले वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — में शामिल हो गईं। एलडीएफ सरकार के कार्यकाल में उन्होंने राज्य के दो अलग-अलग सरकारी निगमों का नेतृत्व किया, जिसमें औषधि की चेयरपर्सन का पद भी शामिल था।

आगे क्या होगा

स्वास्थ्य मंत्री की जांच के आदेश के बाद अब यह देखना होगा कि जांच की दिशा और दायरा क्या होगा। यह मामला केवल एक ब्यूटी ट्रीटमेंट के आरोप तक सीमित नहीं रहा — यह सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता, सार्वजनिक धन के उपयोग और राजनीतिक नियुक्तियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है। जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष और उस पर की जाने वाली कार्रवाई केरल की राजनीति में नए समीकरण तय कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परत कहीं गहरी है — सरकारी आयुर्वेदिक संस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियों की जवाबदेही का सवाल। रिपोर्ट के अनुसार, अगर वाकई बिना रिकॉर्ड के सरकारी फंड और डॉक्टरों का उपयोग हुआ, तो यह अकेली घटना नहीं है — यह सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे में 'अध्यक्ष-विशेषाधिकार' की उस संस्कृति की अभिव्यक्ति है जो राज्य की पार्टी-लाइन से परे फैली है। स्वास्थ्य मंत्री का यह स्वीकारना कि रिपोर्ट पहले से मौजूद थी पर कार्रवाई नहीं हुई, प्रशासनिक निष्क्रियता का संकेत है। जांच का वास्तविक परीक्षण यह होगा कि क्या निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे — या यह मामला भी विधानसभा में शोर मचाने के बाद चुपचाप दफन हो जाएगा।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शोभना जॉर्ज पर औषधि में क्या आरोप लगे हैं?
आरोप है कि सरकारी आयुर्वेदिक संस्थान औषधि की चेयरपर्सन रहते हुए शोभना जॉर्ज ने पंचकर्म अस्पताल के एक डीलक्स एयर-कंडीशंड कमरे में एक अनधिकृत ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया। एक आंतरिक जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर 3 किलो गुड़हल की कलियों, अंडों और नींबू रस के उपयोग का उल्लेख है, जिसका अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई जिक्र नहीं है।
केरल स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले में क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने स्वीकार किया कि इस संबंध में एक रिपोर्ट पहले से मौजूद है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि अब इस मामले की विधिवत जांच कराई जाएगी।
शोभना जॉर्ज ने इन आरोपों का क्या जवाब दिया?
शोभना जॉर्ज ने सभी आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है और अपने आलोचकों को सबूत पेश करने की खुली चुनौती दी है। उन्होंने फेसबुक पर व्यंग्यात्मक वीडियो भी साझा किए और विधानसभा में झूठे आरोप लगाने के लिए विधायक सजींद्रन के खिलाफ स्पीकर से शिकायत करने की बात कही।
शोभना जॉर्ज का राजनीतिक इतिहास क्या है?
शोभना जॉर्ज चेंगन्नूर से तीन बार कांग्रेस विधायक रहीं। 2005 में के. करुणाकरण गुट का समर्थन करने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ी, 2006 का चुनाव हारीं और 2016 में सीपीआई(एम) में शामिल हो गईं। एलडीएफ कार्यकाल में उन्होंने दो सरकारी निगमों का नेतृत्व किया।
औषधि क्या है और इस विवाद से इसकी छवि पर क्या असर पड़ा है?
औषधि केरल सरकार का एक सरकारी आयुर्वेदिक संस्थान है जो पंचकर्म चिकित्सा सहित आयुर्वेदिक उपचार प्रदान करता है। इस विवाद ने संस्थान में सार्वजनिक धन के उपयोग की पारदर्शिता और राजनीतिक नियुक्तियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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