13 अक्टूबर 2026
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केरल स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन का विपक्ष पर तंज: 'सत्ता खोने की कोई दवा नहीं', विधानसभा में हंगामा

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केरल स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन का विपक्ष पर तंज: 'सत्ता खोने की कोई दवा नहीं', विधानसभा में हंगामा

सारांश

केरल विधानसभा में 'दवाओं की कमी' पर बहस राजनीतिक तमाशे में बदल गई — जब स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन ने कहा कि 'सत्ता खोने वालों की दवा नहीं बनती।' विपक्ष के वॉकआउट के पीछे असली सवाल है: 24 दवाओं की स्वीकृत कमी पर सरकार जवाबदेह कब होगी?

मुख्य बातें

केरल के स्वास्थ्य मंत्री के.
मुरलीधरन ने 13 अक्टूबर 2026 को विधानसभा में वामपंथी विपक्ष पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि 'सत्ता गंवाने वालों के लिए कोई दवा नहीं है।' CPI(M) विधायक के.वी.
सुमेष ने सरकारी अस्पतालों में दवा संकट पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया, जिसे स्पीकर ने अस्वीकार कर दिया।
मंत्री ने माना कि 24 प्रकार की दवाओं की कमी है, लेकिन कहा कि इसे दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं।
मंत्री ने पिछली LDF सरकार पर मार्च में खरीद आदेश न देने और दवा कंपनियों का बकाया न चुकाने का आरोप लगाया।
विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने मंत्री के जवाब देने के तरीके और निजी अस्पतालों से संभावित डील पर सवाल उठाए।
स्थगन प्रस्ताव खारिज होने के बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया।

केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम स्थित राज्य विधानसभा में वामपंथी विपक्ष पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि केरल में केवल एक दवा अनुपलब्ध है — और वह है 'सत्ता गंवाने वालों के दर्द का इलाज।' सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कथित कमी पर चल रही बहस के बीच यह टिप्पणी आई, जिसने सदन में नई तकरार को जन्म दे दिया।

स्थगन प्रस्ताव से शुरू हुई बहस

मामला उस समय शुरू हुआ जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के विधायक के.वी. सुमेष ने राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को लेकर स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत किया। सुमेष ने आरोप लगाया कि केरल की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर है और सरकारी अस्पतालों में दवाओं का गंभीर संकट बना हुआ है। मंत्री मुरलीधरन ने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि जिन समस्याओं की बात की जा रही है, वे स्वास्थ्य विभाग में वास्तव में हैं ही नहीं।

पिछली एलडीएफ सरकार पर पलटवार

मंत्री मुरलीधरन ने आक्रामक रुख अपनाते हुए पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च में चुनावी आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान पूर्व सरकार ने दवाओं के लिए खरीद आदेश जारी नहीं किए, जिसकी वजह से मौजूदा कमी की स्थिति बनी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकार ने दवा आपूर्ति कंपनियों का भारी बकाया नहीं चुकाया, जिससे आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल 24 प्रकार की दवाओं की कमी है और इसे दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं।

विपक्ष की पलटी प्रतिक्रिया

विधायक सुमेष ने मंत्री के इस रवैये की कड़ी आलोचना की और कहा कि वे एक गंभीर स्वास्थ्य संकट को हल्के में ले रहे हैं। उन्होंने दवाओं की कमी पर प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि सरकार को केवल पिछली सरकार की कमियाँ गिनानी थीं, तो जनता ने उन्हें सत्ता क्यों सौंपी। सुमेष ने मांग की कि मंत्री अपने विभाग की ज़मीनी हकीकत से अवगत हों। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग में राजनीतिक आधार पर तबादले किए जा रहे हैं और मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की।

विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन का हस्तक्षेप

विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने मंत्री के जवाब देने के तरीके पर आपत्ति जताई और स्पीकर से सवाल किया कि क्या सदन का संचालन इसी प्रकार होना उचित है। विजयन ने इस बात को भी रेखांकित किया कि मंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि 24 प्रकार की दवाओं की आपूर्ति कम है, और पूछा कि इसे कमी नहीं तो क्या कहा जाएगा। उन्होंने इस संकट के बीच निजी अस्पतालों से जुड़ी संभावित डील पर भी सवाल उठाए। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केरल में स्वास्थ्य बजट और सार्वजनिक क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता पहले से ही जाँच के दायरे में है।

वॉकआउट और आगे की स्थिति

मंत्री मुरलीधरन ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए उन पर 'एजेंटों की ओर से बोलने' का आरोप लगाया और कहा कि उनके दावे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं, जिससे सदन में एक बार फिर हंगामा हो गया। अंततः स्पीकर ने स्थगन प्रस्ताव की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके विरोध में विपक्षी सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए। यह विवाद आने वाले दिनों में केरल की स्वास्थ्य नीति पर राजनीतिक बहस को और तेज़ कर सकता है, खासकर तब जब 24 दवाओं की कमी की सत्यापन-योग्य पुष्टि सार्वजनिक नहीं हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसने एक असुविधाजनक सच्चाई को ढक दिया — कि उन्होंने स्वयं 24 दवाओं की कमी स्वीकार की। असल सवाल यह है कि एक राज्य जो अपनी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए देशभर में आदर्श माना जाता रहा है, वहाँ आपूर्ति श्रृंखला की यह विफलता कैसे हुई — और उत्तर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के पास नहीं है। विपक्ष की राजनीतिक आलोचना उचित हो सकती है, लेकिन वॉकआउट से जनता के सवाल हल नहीं होते। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक गई, वह यह है कि निजी अस्पतालों से 'संभावित डील' का आरोप — जो विजयन ने उठाया — वस्तुतः जाँच योग्य गंभीर प्रश्न है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन ने विधानसभा में क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा कि केरल में केवल एक दवा अनुपलब्ध है — 'सत्ता गंवाने वालों के दर्द का इलाज।' यह बयान 13 अक्टूबर 2026 को सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कथित कमी पर बहस के दौरान आया।
केरल के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी कितनी गंभीर है?
मंत्री मुरलीधरन ने स्वयं स्वीकार किया कि 24 प्रकार की दवाओं की कमी है, और उन्होंने कहा कि इसे दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं। हालाँकि, CPI(M) विधायक के.वी. सुमेष ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए संकट को अधिक व्यापक बताया।
विपक्ष ने केरल विधानसभा में वॉकआउट क्यों किया?
स्पीकर ने CPI(M) विधायक के.वी. सुमेष के स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिसके विरोध में विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष का आरोप था कि मंत्री ने स्वास्थ्य संकट को हल्के में लिया और राजनीतिक तबादलों पर मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप नहीं हुआ।
पिछली LDF सरकार पर मंत्री ने क्या आरोप लगाए?
मंत्री मुरलीधरन ने आरोप लगाया कि पिछली LDF सरकार ने मार्च में आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान दवाओं के लिए खरीद आदेश जारी नहीं किए और दवा कंपनियों का भारी बकाया भी नहीं चुकाया।
इस विवाद में पिनाराई विजयन की क्या भूमिका रही?
विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने मंत्री के जवाब देने के तरीके पर आपत्ति जताई और स्पीकर से सवाल किया कि सदन का यह संचालन उचित है या नहीं। उन्होंने निजी अस्पतालों से जुड़ी संभावित डील का भी मुद्दा उठाया और मंत्री की 24 दवाओं की कमी की स्वीकृति को कमी का प्रमाण बताया।
राष्ट्र प्रेस
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