केरल विधानसभा में निपाह और स्वास्थ्य संकट पर रियास बनाम मुरलीधरन: दो राजनीतिक परिवारों की सीधी टक्कर
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा में 22 जून 2025 को संक्रामक बीमारियों के प्रबंधन पर चल रही बहस अचानक तीखे राजनीतिक संघर्ष में तब्दील हो गई, जब सीपीआई (एम) विधायक व नेता विपक्ष मोहम्मद रियास और स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन आमने-सामने आ गए। तिरुवनंतपुरम में हुई इस नोकझोंक में जनस्वास्थ्य की चिंताओं के साथ-साथ केरल की पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी उभरकर सामने आई।
स्थगन प्रस्ताव और सदन में हंगामा
नेता विपक्ष मोहम्मद रियास — जो पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दामाद और पूर्व मंत्री (2021–26) भी हैं — ने राज्य में संक्रामक बीमारी की स्थिति पर तत्काल चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस पेश किया। हालाँकि, विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए प्रस्ताव खारिज कर दिया कि इस विषय पर तत्काल चर्चा की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद बहस सदन में जारी रही और माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
रियास के आरोप: तालमेल की कमी और देरी से दवाएँ
रियास ने आरोप लगाया कि केरल के प्रसिद्ध स्वास्थ्य मॉडल को ताज़ा संक्रामक रोग संकट से गहरा धक्का लगा है। उन्होंने दावा किया कि चार जिले बिना जिला चिकित्सा अधिकारियों के काम कर रहे हैं और कोझिकोड में उचित चिकित्सा नेतृत्व का अभाव है।
उन्होंने सवाल उठाया, 'क्या सरकार कोझिकोड के लिए एक भी मेडिकल अफसर उपलब्ध नहीं करा सकती थी?' रियास ने यह भी दावा किया कि निपाह वायरस की दवाएँ बीमारी की पुष्टि के पाँच दिन बाद राज्य में पहुँचीं और यह आपूर्ति भी विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों के दबाव में संभव हो सकी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर आरोप लगाया कि वह बीमारी की रोकथाम के बजाय तबादलों और पोस्टिंग में व्यस्त था। स्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय पर कटाक्ष करते हुए रियास ने कहा कि वहाँ के एक वरिष्ठ अधिकारी — स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्व निदेशक — निपाह वायरस से भी बड़ी चिंता का विषय बन गए थे।
मुरलीधरन का पलटवार: 24 घंटे में विदेश से दवाएँ मँगाई
स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन — जो पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण के पुत्र हैं — ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने तत्परता से कार्रवाई की और निपाह के उपचार के लिए आवश्यक दवाइयाँ 24 घंटे के भीतर विदेश से मँगाई गईं। मुरलीधरन ने स्पष्ट किया कि केरल में निपाह का केवल एक मामला दर्ज हुआ है और देश में कहीं भी इबोला का कोई मामला नहीं है।
उन्होंने कहा कि विभागों के बीच समन्वय और स्वास्थ्य व खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा संयुक्त निरीक्षण के ज़रिये राज्य में बीमारी की रोकथाम का सुदृढ़ तंत्र मौजूद है। मुरलीधरन ने विपक्ष पर 'अनावश्यक घबराहट फैलाने' का आरोप लगाया और रियास पर तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सरकार पर पिछले 10 साल के 'रील्स' और पिछले पाँच साल की 'वीणा बजाने' की विरासत का बोझ है — यह टिप्पणी पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज पर भी निशाना थी।
दो राजनीतिक परिवारों की विरासत की टक्कर
इस विवाद की एक खास परत यह भी रही कि सदन में आमने-सामने आए दोनों नेता केरल की दो प्रमुख राजनीतिक विरासतों का प्रतिनिधित्व करते हैं। रियास वामपंथी नेतृत्व की परंपरा के उत्तराधिकारी हैं, जबकि मुरलीधरन कांग्रेस के दिग्गज नेता करुणाकरण की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज़ हो रहा है।
आगे क्या होगा
स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन ने सदन को आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पद जल्द भरे जाएँगे और सभी आवश्यक एहतियाती उपाय पहले ही उठाए जा चुके हैं। गौरतलब है कि कोझिकोड में चिकित्सा नेतृत्व की कमी और जिला स्तर पर अधिकारियों की अनुपस्थिति के मुद्दे अब विपक्ष के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हो गए हैं। आने वाले दिनों में इन रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया पर सबकी नज़र रहेगी।