लावरोव का UN में ऐलान: यूक्रेन से वार्ता के दौरान भी 'विशेष सैन्य अभियान' जारी रहेगा
सारांश
मुख्य बातें
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 24 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की यूक्रेन-विषयक बैठक में स्पष्ट किया कि मॉस्को किसी भी शांति वार्ता के दौरान अपना 'विशेष सैन्य अभियान' नहीं रोकेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और यूरोप दोनों युद्धविराम के लिए दबाव बना रहे हैं।
लावरोव का मूल बयान
यूनाइटेड किंगडम स्थित रूसी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विदेश मंत्री लावरोव के बयान की जानकारी साझा की। लावरोव ने कहा कि रूस स्थायी और न्यायपूर्ण शांति के लिए बातचीत को तैयार है, लेकिन 'पिछले कड़वे अनुभवों' को देखते हुए वार्ता के दौरान सैन्य अभियान किसी भी रूप में नहीं रोका जाएगा।
उनका यह रुख मिन्स्क समझौतों की विफलता की स्मृति की ओर इशारा करता है, जब रूस का आरोप था कि युद्धविराम का उपयोग यूक्रेन ने अपनी सेना को फिर से तैयार करने के लिए किया था।
अमेरिकी मध्यस्थता पर रूस का रुख
लावरोव ने बताया कि स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर की हालिया मॉस्को यात्रा के दौरान अमेरिका ने संघर्ष समाधान में अपनी रुचि दोहराई। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का भी उल्लेख किया, जो अगस्त 2025 में एंकरेज शिखर बैठक के बाद दिया गया था। ट्रंप ने कहा था कि लक्ष्य महज युद्धविराम नहीं, बल्कि रूस और यूक्रेन के बीच एक स्थायी शांति समझौता होना चाहिए जो युद्ध को पूरी तरह समाप्त करे।
रूस ने कहा कि वह ऐसी 'स्थायी और न्यायपूर्ण शांति' के लिए वार्ता के लिए तैयार है।
यूरोप पर लावरोव का तीखा प्रहार
लावरोव ने यूरोप की भूमिका पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यूरोपीय पक्ष चाहता है कि लड़ाई अस्थायी रूप से रुके ताकि कीव सरकार को समय मिले और उसके 'कम हो चुके सैन्य हथियारों और गोला-बारूद के भंडार' को दोबारा भरा जा सके। उनके अनुसार, यह युद्धविराम की माँग असल में यूक्रेन की सैन्य क्षमता बहाल करने की कोशिश है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का नाम लेते हुए लावरोव ने कहा कि यूरोपीय संघ के अधिकारी यूक्रेन को वित्तीय और सैन्य सहायता को 'यूरोपीय मूल्यों की रक्षा' के नाम पर उचित ठहराते हैं। लावरोव ने इस दावे को खारिज करते हुए यूरोपीय संघ पर नस्लवाद और नाजीवाद के महिमामंडन का आरोप लगाया — जो कि रूसी पक्ष का दावा है और जिसे यूक्रेन और पश्चिमी देश सिरे से नकारते हैं।
भू-राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा का सत्र चल रहा है और कई देश रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह कम-से-कम तीसरा मौका है जब रूस ने युद्धविराम की शर्त के बिना वार्ता की पेशकश दोहराई है, लेकिन अपनी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव किए बिना।
आने वाले दिनों में अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि शांति वार्ता की दिशा में अगला कदम क्या होगा।