17 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

लावरोव की कड़ी चेतावनी: यूक्रेन में पश्चिमी सैनिक तैनात हुए तो रूस मानेगा सीधा युद्ध

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
लावरोव की कड़ी चेतावनी: यूक्रेन में पश्चिमी सैनिक तैनात हुए तो रूस मानेगा सीधा युद्ध

सारांश

रूस के विदेश मंत्री लावरोव ने साफ कहा — यूक्रेन में पश्चिमी सैनिक उतरे तो रूस इसे सीधे युद्ध की घोषणा मानेगा, और वह युद्ध 'बहुत कम समय' तक चलेगा। साथ ही उन्होंने अमेरिका के साथ त्रिपक्षीय वार्ता का दरवाज़ा भी खुला रखा — यह मॉस्को की वही पुरानी रणनीति है: दबाव और कूटनीति एक साथ।

मुख्य बातें

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 17 सितंबर 2026 को येकातेरिनबर्ग में यूक्रेन में पश्चिमी सैनिकों की तैनाती को 'सीधे युद्ध की घोषणा' करार दिया।
लावरोव ने कहा कि यूरोप द्वारा रूस पर हमले की स्थिति में युद्ध 'बिल्कुल अलग' और 'बहुत कम समय' तक चलने वाला होगा।
मॉस्को ने अमेरिका के प्रस्तावित त्रिपक्षीय वार्ता प्रारूप का स्वागत किया, लेकिन रूस के 'शुरुआती उद्देश्यों' की पूर्ति को अनिवार्य शर्त बताया।
रूस की मूल माँग अपरिवर्तित — सीमाओं के पास नाटो की मौजूदगी समाप्त हो और रूसी भाषा तथा ऑर्थोडॉक्स आस्था के अधिकार सुनिश्चित हों।
लावरोव ने अमेरिका को शेष पश्चिम से अलग करते हुए कहा कि वॉशिंगटन संघर्ष की 'जड़ों को बेहतर समझता है'।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 17 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि यदि पश्चिमी देशों की सेनाएँ यूक्रेन की धरती पर उतारी जाती हैं, तो मॉस्को इसे रूस के विरुद्ध सीधे युद्ध की घोषणा के रूप में देखेगा। येकातेरिनबर्ग में आयोजित 'इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ यूथ' में दिए गए इस बयान ने पश्चिमी देशों के साथ पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और गहरा कर दिया है।

लावरोव ने क्या कहा

लावरोव ने येकातेरिनबर्ग में युवा महोत्सव के मंच से कहा, 'मैं यह साफ करना चाहता हूँ कि हमें इसमें शामिल होने की कोई इच्छा नहीं है, लेकिन अगर यूरोप — जो हर दिन रूस के खिलाफ युद्ध की तैयारी की बात करता है — रूस पर हमला करता है, तो वह बिल्कुल अलग तरह का युद्ध होगा और वह बहुत कम समय तक चलेगा।' यह बयान ऐसे समय आया है जब कई यूरोपीय देश यूक्रेन में अपने सैनिकों की संभावित तैनाती पर सार्वजनिक विचार-विमर्श कर रहे हैं।

कूटनीतिक रास्ते पर रूस का रुख

लावरोव ने एक साथ कड़ी चेतावनी और कूटनीतिक लचीलेपन का संकेत देते हुए कहा कि मॉस्को अब भी वार्ता के लिए तैयार है। उन्होंने उस त्रिपक्षीय बातचीत के प्रारूप का भी स्वागत किया, जिसका प्रस्ताव अमेरिका ने फिर से रखा है। हालाँकि उन्होंने जोड़ा कि किसी भी समझौते में रूस के 'शुरुआती उद्देश्यों' की पूर्ति और 'संघर्ष की जड़ में मौजूद कारणों' को समाप्त करना अनिवार्य होगा।

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले, मंगलवार 16 सितंबर को, यूक्रेन मुद्दे पर राजदूतों की एक बैठक में भी लावरोव ने यही रेखा खींची थी — रूस बातचीत से भागेगा नहीं, किंतु नाटो की अपनी सीमाओं पर मौजूदगी कभी स्वीकार नहीं करेगा।

रूस की मूल शर्तें और लक्ष्य

लावरोव के अनुसार, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा निर्धारित 'विशेष सैन्य अभियान' के लक्ष्यों में खतरों की मूल वजहों को समाप्त करना और 'रूसी लोगों के अधिकारों की रक्षा' — जिसमें उनकी मातृभाषा तथा ऑर्थोडॉक्स आस्था का अधिकार भी शामिल है — को सुनिश्चित करना प्रमुख है। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति से न केवल मौजूदा संकट सुलझेगा, बल्कि पूरे यूरेशियाई महाद्वीप, विशेषकर उसके यूरोपीय हिस्से, की स्थिति भी सुधरेगी।

अमेरिका और पश्चिमी देशों पर रूस का आकलन

लावरोव ने अमेरिका और शेष पश्चिम के बीच एक स्पष्ट अंतर किया। उनके अनुसार, 'सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका इस संघर्ष की जड़ों को समझता है, जबकि अन्य पश्चिमी देश ऐसा नहीं करते।' उन्होंने यह भी कहा कि रूस यूक्रेन में समाधान खोजने में अमेरिका की रुचि का स्वागत करता है और द्विपक्षीय तथा त्रिपक्षीय — दोनों तरह की बातचीत के लिए तैयार है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन संघर्ष के तीन वर्षों से अधिक बीत चुके हैं और शांति वार्ता की संभावनाएँ अभी भी अनिश्चित हैं। विश्लेषकों के अनुसार, लावरोव का यह दोहरा संदेश — युद्ध की चेतावनी और बातचीत की तैयारी — मॉस्को की उस रणनीतिक लाइन का हिस्सा है जिसमें वह पश्चिम को दबाव में रखते हुए अपनी शर्तों पर समझौते की गुंजाइश बनाए रखता है। फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से ठोस वार्ता की तारीख तय नहीं हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और लावरोव का यह बयान उन्हीं दरारों को और चौड़ा करने की कोशिश है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लावरोव ने यूक्रेन में पश्चिमी सैनिकों की तैनाती पर क्या कहा?
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 17 सितंबर 2026 को येकातेरिनबर्ग में स्पष्ट किया कि यूक्रेन में पश्चिमी सेनाओं की तैनाती को रूस सीधे युद्ध की घोषणा मानेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में युद्ध 'बिल्कुल अलग' और 'बहुत कम समय' तक चलने वाला होगा।
क्या रूस यूक्रेन पर शांति वार्ता के लिए तैयार है?
लावरोव के अनुसार रूस कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है और अमेरिका के प्रस्तावित त्रिपक्षीय वार्ता प्रारूप का स्वागत करता है। हालाँकि मॉस्को ने स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते में रूस के 'शुरुआती उद्देश्यों' की पूर्ति अनिवार्य होगी।
नाटो को लेकर रूस की क्या शर्त है?
रूस की अपरिवर्तित माँग है कि उसकी सीमाओं के पास नाटो की किसी भी प्रकार की सैन्य उपस्थिति समाप्त की जाए। लावरोव ने मंगलवार को राजदूतों की बैठक में भी यही दोहराया था कि यह शर्त किसी भी वार्ता में 'मूल लक्ष्य' बनी रहेगी।
रूस अमेरिका और यूरोप को एक नज़र से क्यों नहीं देखता?
लावरोव ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस संघर्ष की 'जड़ों को बेहतर समझता है', जबकि अन्य पश्चिमी देश ऐसा नहीं करते। यह बयान पश्चिमी गठबंधन में दरार पैदा करने की मॉस्को की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष में आगे क्या होने की संभावना है?
फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से वार्ता की कोई ठोस तारीख तय नहीं हुई है। रूस ने द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय — दोनों तरह की बातचीत के लिए सहमति जताई है, लेकिन अपनी मूल शर्तों पर कोई लचीलापन नहीं दिखाया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 11 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले