दिल्ली-एनसीआर में बारिश और तेज हवाओं से राहत, एक्यूआई 'येलो जोन' में; 22 सितंबर तक का मौसम पूर्वानुमान
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली-एनसीआर में 17 सितंबर, गुरुवार की सुबह हुई हल्की बारिश और तेज हवाओं ने लोगों को बढ़ती गर्मी और उमस से बड़ी राहत दिलाई है। इस मौसमी बदलाव का असर तापमान के साथ-साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर भी साफ दिखा, जिसके चलते पूरा एनसीआर 'येलो जोन' में आ गया है।
मुख्य मौसम आँकड़े
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 17 सितंबर को दिल्ली का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) का स्तर 65 से 75 प्रतिशत के बीच रहा। आसमान में बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी रही।
आने वाले दिनों का पूर्वानुमान
18 सितंबर को तापमान 33 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने और आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। 19 सितंबर को पारा 34 से 24 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है।
20 सितंबर से मौसम में और सुधार की संभावना है — तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है, लेकिन आसमान साफ रहने की उम्मीद है। 21 और 22 सितंबर को मुख्य रूप से साफ आसमान रहने का पूर्वानुमान है, जिससे दिल्लीवासियों को इस पूरे सप्ताह बदलते मौसम का अनुभव होगा।
दिल्ली के विभिन्न इलाकों में वायु गुणवत्ता
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के आँकड़ों के मुताबिक, गुरुवार सुबह दिल्ली के प्रमुख क्षेत्रों का AQI इस प्रकार रहा: अलीपुर — 101, आनंद विहार — 115, अशोक विहार — 103, आया नगर — 87, बवाना — 73, बुराड़ी क्रॉसिंग — 114, कैंटोनमेंट एरिया — 69, चांदनी चौक — 106 और कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स — 91।
गुरुवार सुबह हुई बारिश और तेज हवाओं की वजह से प्रदूषण स्तर में गिरावट दर्ज की गई, और अधिकांश इलाके 'मध्यम' से 'संतोषजनक' श्रेणी में आ गए।
नोएडा और गाजियाबाद में AQI की स्थिति
नोएडा में सेक्टर-125 का AQI 168, सेक्टर-62 का 103, सेक्टर-1 का 120 और सेक्टर-116 का 161 दर्ज किया गया। गाजियाबाद में गोविंदपुरम — 60, इंदिरापुरम — 93, संजय नगर — 139, वसुंधरा — 126 और वेद विहार-लोनी — 114 का AQI रहा।
गौरतलब है कि मानसून के अंतिम चरण में इस तरह की हल्की बारिश हवा में धूल और प्रदूषणकारी कणों को बैठाने में अहम भूमिका निभाती है। आने वाले दिनों में मौसम साफ होने के साथ AQI में फिर से उतार-चढ़ाव संभव है, खासकर यदि हवा की गति कम हो जाए।