PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर 12 साल की आर्थिक उपलब्धियाँ: 59 करोड़ जनधन खाते, $785 अरब विदेशी मुद्रा भंडार
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को 76 वर्ष के हो गए। पीएम के रूप में उनके 12 वर्षों के कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था ने कई उल्लेखनीय पड़ाव पार किए हैं — जनधन योजना के ज़रिए करोड़ों को बैंकिंग से जोड़ने से लेकर स्टार्टअप क्रांति और रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार तक। आंकड़ों के अनुसार, आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
जनधन योजना: बैंकिंग से जुड़ा हर नागरिक
मोदी के पहले कार्यकाल में शुरू हुई प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) ने देश के वंचित और कमज़ोर वर्ग को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। 2 सितंबर 2026 तक इस योजना के अंतर्गत 59.21 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें कुल ₹3.17 लाख करोड़ की राशि जमा है।
इनमें से 32.98 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं — जो वित्तीय समावेशन में लैंगिक बराबरी की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, 46.03 करोड़ खाते ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, जो दर्शाता है कि योजना का लाभ मुख्यतः देश के दूरदराज़ इलाकों तक पहुँचा है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम: 502 से 2.47 लाख का सफर
भारत में स्टार्टअप संस्कृति को नई उड़ान देने में भी मोदी सरकार की नीतियों की भूमिका रेखांकित की जाती है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या अगस्त 2026 तक 2.47 लाख से अधिक हो गई है।
गौरतलब है कि 2016 में यही संख्या मात्र 502 थी। यानी एक दशक से कम समय में यह संख्या लगभग 492 गुना बढ़ी है। यह वृद्धि 'स्टार्टअप इंडिया' पहल और सरकारी नियामकीय सुधारों के साथ-साथ निजी इक्विटी एवं वेंचर कैपिटल निवेश के विस्तार से संभव हुई है।
जीडीपी वृद्धि: दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्था
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। आंकड़ों के अनुसार, यह भारत को फिलहाल दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था की श्रेणी में रखता है। इस वृद्धि को मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र — दोनों से सहारा मिल रहा है।
भारत की जीडीपी का कुल आकार अब लगभग $4.15 ट्रिलियन है। यह ऐसे समय में आया है जब कई विकसित अर्थव्यवस्थाएँ मंदी और उच्च ब्याज दरों के दबाव से जूझ रही हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार: सर्वकालिक उच्चतम स्तर, विश्व में चौथा स्थान
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में $785.7 अरब के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुँच गया। इस आँकड़े के साथ भारत अब वैश्विक स्तर पर चीन, जापान और स्विट्ज़रलैंड के बाद चौथे स्थान पर है।
उल्लेखनीय है कि इस भंडार में लगातार 10 हफ्तों से वृद्धि हो रही है और इस दौरान इसमें करीब $120 अरब का इज़ाफा हुआ है। मज़बूत विदेशी मुद्रा भंडार रुपये की स्थिरता और आयात के लिए ज़रूरी कवर सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है।
आगे की राह
मोदी सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि इन समष्टि-आर्थिक उपलब्धियों को ज़मीनी स्तर पर रोज़गार सृजन और आय वृद्धि में कैसे तब्दील किया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टार्टअप इकोसिस्टम और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार के बीच संयोजन ही अगले पाँच वर्षों में भारत की वृद्धि की गति तय करेगा।