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जन धन योजना के 12 साल: 59.09 करोड़ खाते, ₹3.17 लाख करोड़ जमा; मोदी ने एक्स पर की तारीफ

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जन धन योजना के 12 साल: 59.09 करोड़ खाते, ₹3.17 लाख करोड़ जमा; मोदी ने एक्स पर की तारीफ

सारांश

28 अगस्त 2014 को शुरू हुई जन धन योजना अब 12 साल में 59.09 करोड़ खातों और ₹3.17 लाख करोड़ जमा के साथ दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल बन चुकी है — जिसकी असली ताकत यह है कि इसके 56% खाताधारक महिलाएं और 78% खाते ग्रामीण भारत में हैं।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) ने 28 अगस्त 2026 को अपने 12 वर्ष पूरे किए।
अब तक 59.09 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए; कुल जमा राशि ₹3.17 लाख करोड़ से अधिक।
कुल खाताधारकों में 56% महिलाएं और 78% खाते ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
41 करोड़ से अधिक रुपे डेबिट कार्ड जारी; प्रत्येक खाते पर ₹2 लाख दुर्घटना बीमा और ₹10,000 ओवरड्राफ्ट सुविधा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट साझा कर योजना को 'अभूतपूर्व पैमाने और परिवर्तनकारी परिणाम' वाला बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के 12 वर्ष पूरे होने पर इसकी उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि इस योजना ने भारत में वित्तीय समावेशन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 59.09 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं और इन खातों में कुल जमा राशि ₹3.17 लाख करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है।

मोदी ने एक्स पर क्या कहा

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर MyGov India की एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, "अभूतपूर्व पैमाने और परिवर्तनकारी परिणाम! जन धन योजना का अभूतपूर्व प्रभाव पड़ा है। #12YearsOfJanDhan" उन्होंने कहा कि इस योजना ने करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ

वित्त मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, PMJDY की शुरुआत 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री मोदी के शुरुआती प्रमुख कार्यक्रमों में से एक के रूप में हुई थी। पिछले 12 वर्षों में यह योजना वैश्विक स्तर पर वित्तीय समावेशन का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है और इसे दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल माना जाता है।

योजना की एक उल्लेखनीय उपलब्धि यह है कि कुल खाताधारकों में 56 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि योजना का सबसे अधिक लाभ उन वर्गों तक पहुंचा है जो पहले औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से वंचित थे।

रुपे कार्ड और बीमा सुविधाएँ

मंत्रालय के बयान के अनुसार, अब तक 41 करोड़ से अधिक रुपे डेबिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला है। प्रत्येक खाताधारक को रुपे कार्ड के साथ ₹2 लाख तक का दुर्घटना बीमा कवर और जरूरत पड़ने पर ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।

इसके अलावा, योजना के माध्यम से लाखों लोगों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ा गया है, जिससे असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को जीवन एवं दुर्घटना बीमा का लाभ मिल रहा है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब एक दशक पहले तक बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच व्यक्ति के रहने के स्थान, आर्थिक स्थिति या बैंक से दूरी पर निर्भर करती थी। MyGov India के अनुसार, आज बैंकिंग सेवाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। गौरतलब है कि PMJDY का उद्देश्य केवल बैंक खाते खोलना नहीं था, बल्कि गरीब, वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना भी था।

आगे की राह

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ₹3.17 लाख करोड़ की जमा राशि और 59 करोड़ से अधिक खातों के साथ PMJDY अब भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। आने वाले वर्षों में इस नींव पर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और अन्य सरकारी योजनाओं की पहुंच और गहरी होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितने खाते सक्रिय रूप से उपयोग में हैं और क्या जमा राशि का वितरण समान है। ₹3.17 लाख करोड़ की कुल जमा को 59 करोड़ खातों से भाग करें तो औसत शेष राशि बेहद कम निकलती है, जो दर्शाती है कि बड़ी संख्या में खाते न्यूनतम उपयोग में हैं। महिलाओं की 56% भागीदारी सराहनीय है, लेकिन वित्तीय स्वायत्तता तभी सार्थक होगी जब ये खाते केवल DBT प्राप्ति के माध्यम न रहकर बचत और ऋण के वास्तविक उपकरण बनें। योजना की असली परीक्षा अगले 12 वर्षों में होगी — जब खाते खोलने की उपलब्धि से आगे बढ़कर वित्तीय साक्षरता और उत्पादक उपयोग को मापा जाएगा।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री जन धन योजना क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?
प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) भारत सरकार की वित्तीय समावेशन पहल है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त 2014 को लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य देश के गरीब, वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।
जन धन योजना के 12 साल में कितने खाते खुले और कितनी राशि जमा है?
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 12 वर्षों में 59.09 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं और इन खातों में कुल जमा राशि ₹3.17 लाख करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही 41 करोड़ से अधिक रुपे डेबिट कार्ड भी जारी किए जा चुके हैं।
जन धन योजना से महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों को क्या फायदा हुआ?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, PMJDY के कुल खाताधारकों में 56% महिलाएं हैं और 78% खाते ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। इससे वे वर्ग सबसे अधिक लाभान्वित हुए हैं जो पहले औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से दूर थे।
जन धन खाते पर कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
जन धन खाताधारकों को मुफ्त रुपे डेबिट कार्ड के साथ ₹2 लाख तक का दुर्घटना बीमा कवर और ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा मिलती है। इसके अलावा, खाताधारकों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से भी जोड़ा गया है।
क्या जन धन योजना वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, PMJDY को दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल माना जाता है और यह वैश्विक स्तर पर वित्तीय समावेशन का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है। 12 वर्षों में 59 करोड़ से अधिक खाते खोलकर इसने भारत के वित्तीय परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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