क्या जन धन योजना ने लोगों को अपना भाग्य खुद लिखने की शक्ति दी?

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क्या जन धन योजना ने लोगों को अपना भाग्य खुद लिखने की शक्ति दी?

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 साल पहले जन धन योजना की शुरुआत की, जिससे गरीब परिवारों को बैंकिंग प्रणाली में शामिल किया गया। इस योजना का उद्देश्य वित्तीय समावेशन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इस लेख में हम जानेंगे कि यह योजना किस प्रकार से लोगों को अपने भाग्य की रचना करने में मदद कर रही है।

Key Takeaways

  • 11 साल पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जन धन योजना की शुरुआत की।
  • इस योजना ने वित्तीय समावेशन में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं।
  • 56.16 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले गए हैं।
  • महिलाओं का खाताधारक प्रतिशत 55.7% है।
  • खातों में कुल जमा राशि 2,67,756 करोड़ रुपए तक पहुंची है।

नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। 11 वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुनिश्चित किया था कि कोई भी गरीब परिवार बैंकिंग की प्रणाली से बाहर न रहे। इस दिशा में जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत एक क्रांतिकारी पहल की शुरुआत हुई। यह योजना भारत के वित्तीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन लेकर आई। जन धन योजना की 11वीं वर्षगांठ पर, पीएम मोदी ने कहा कि इस योजना ने लोगों को अपना भाग्य खुद लिखने की शक्ति दी।

पीएम मोदी ने कहा कि पीएमजेडीवाई ने वित्तीय समावेशन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाकर लोगों को गौरवान्वित किया है। 'माय गवर्नमेंट इंडिया' के एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने लिखा, "जब अंतिम व्यक्ति वित्तीय रूप से जुड़ा होता है, तो पूरा देश एक साथ आगे बढ़ता है। प्रधानमंत्री जन धन योजना ने यही किया। इसने सम्मान बढ़ाया और लोगों को अपना भाग्य खुद लिखने की शक्ति दी।"

प्रधानमंत्री मोदी ने 28 अगस्त 2014 को जन धन योजना की शुरुआत की थी, जो दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल बन गई। इससे गरीब और वंचित लोगों की बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित हुई। वित्त मंत्रालय के अनुसार, 13 अगस्त 2025 तक देशभर में 56.16 करोड़ पीएमजेडीवाई खाते खोले गए। इनमें से 55.7 प्रतिशत (31.31 करोड़) जन-धन खाताधारक महिलाएं हैं, जबकि 66.7 प्रतिशत (37.48 करोड़) जन-धन खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं।

यही नहीं, जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) खातों में कुल जमा राशि 2,67,756 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। जहां खातों की संख्या तीन गुना बढ़ी, वहीं कुल जमा राशि में लगभग 12 गुना वृद्धि हुई है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, 13 अगस्त 2025 तक प्रति खाता औसत जमा राशि 4,768 रुपए है। अगस्त 2015 की तुलना में प्रति खाता औसत जमा राशि में 3.7 गुना वृद्धि हुई। इसके अलावा, पीएमजेडीवाई खाताधारकों को 38.68 करोड़ रुपे कार्ड जारी किए गए हैं।

योजना के 11 साल पूरे होने पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने कहा कि वित्तीय समावेशन आर्थिक वृद्धि और विकास का एक प्रमुख चालक है। बैंक खातों तक सार्वभौमिक पहुंच गरीबों और वंचित वर्ग के लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में भागीदारी और इसके अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम बनाती है।

Point of View

बल्कि उन्हें अपने भाग्य को आकार देने की शक्ति भी देती है। इस पहल के सकारात्मक प्रभावों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि यह योजना देश के आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

जन धन योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
जन धन योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना और उन्हें वित्तीय सेवाओं का लाभ प्रदान करना है।
इस योजना की शुरुआत कब हुई थी?
जन धन योजना की शुरुआत 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी।
जन धन योजना के तहत कितने खाते खोले गए हैं?
14 अगस्त 2025 तक लगभग 56.16 करोड़ पीएमजेडीवाई खाते खोले गए हैं।
इस योजना का लाभ किसे मिलता है?
इस योजना का लाभ मुख्य रूप से गरीब और वंचित वर्ग के लोगों को मिलता है।
क्या महिलाओं को इस योजना में प्राथमिकता दी जाती है?
जी हां, जन धन योजना में 55.7 प्रतिशत खाताधारक महिलाएं हैं।