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क्या सीएम माझी की दूरदर्शी परियोजना ओडिशा को क्योंझर के सनाघागरा में दूसरा क्षेत्रीय पादप संसाधन केंद्र देगी?

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क्या सीएम माझी की दूरदर्शी परियोजना ओडिशा को क्योंझर के सनाघागरा में दूसरा क्षेत्रीय पादप संसाधन केंद्र देगी?

सारांश

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने क्योंझर जिले के सनाघागरा में राज्य के दूसरे क्षेत्रीय पादप संसाधन केंद्र की स्थापना पर चर्चा की। यह केंद्र जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण-पर्यटन को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करेगा। जानिए इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बारे में अधिक जानकारी।

मुख्य बातें

ओडिशा में दूसरा क्षेत्रीय पादप संसाधन केंद्र स्थापित किया जाएगा।
केंद्र का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण है।
परियोजना में विभिन्न प्रकार के उद्यान शामिल होंगे।
यह केंद्र पर्यावरण-पर्यटन को बढ़ावा देगा।
निर्माण में स्थानीय सामग्रियों का उपयोग किया जाएगा।

भुवनेश्वर, 15 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने लोक सेवा भवन में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और क्योंझर जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में क्योंझर जिले के सनाघागरा में राज्य के दूसरे क्षेत्रीय पादप संसाधन केंद्र (आरपीआरसी) की स्थापना पर विचार-विमर्श किया गया।

यह आगामी केंद्र मुख्यमंत्री माझी की एक स्वप्निल परियोजना है, जिसे भुवनेश्वर स्थित मौजूदा आरपीआरसी के बाद राज्य का दूसरा प्रमुख जैव-विविधता एवं अनुसंधान केंद्र माना जा रहा है। इसे लगभग 134 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, यह केंद्र जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण-पर्यटन, अनुसंधान, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देगा। प्रस्तावित केंद्र में थीम आधारित उद्यान और प्राकृतिक अनुभव क्षेत्र होंगे, जहां ओडिशा की विविध आर्किड प्रजातियां, गुलाब, बांस, कैक्टस और जंगली फलों का आकर्षक प्रदर्शन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री माझी ने निर्देश दिया कि इस स्थल को सालभर खुला रहने वाला पर्यटक आकर्षण बनाया जाए। उन्होंने क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही को देखते हुए मानव-हाथी संघर्ष रोकने के उपाय जैसे गहरी खाइयों के निर्माण का आदेश दिया। साथ ही, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए मच्छकंदना नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह को संरक्षित रखने पर बल दिया।

परियोजना में आर्किड संरक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र, कमल उद्यान, फर्न उद्यान, जंगली खाद्य फलों का उद्यान, औषधीय पौधों का उद्यान, पुष्प बाजार और बच्चों के खेल क्षेत्र शामिल होंगे। निर्माण में स्थानीय पत्थर और लकड़ी जैसी सामग्रियों का उपयोग किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि यह परियोजना वर्ष 2027 तक पूरी कर ली जाए।

बैठक में मुख्य सचिव मनोज आहूजा, अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन विभाग) सत्यव्रत साहू, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख सुरेश पंथ, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव शाश्वत मिश्रा तथा वर्चुअल माध्यम से क्योंझर के कलेक्टर विशाल सिंह और डीएफओ धनराज हनुमंत धमधेरे उपस्थित थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पर्यावरण-पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। इस तरह की पहलों से राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और स्थानीय समुदायों को विकास के अवसर मिलेंगे।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस क्षेत्रीय पादप संसाधन केंद्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण, पर्यावरण-पर्यटन को बढ़ावा देना और सामुदायिक सहभागिता को सशक्त करना है।
कब तक यह परियोजना पूरी होगी?
सरकार का लक्ष्य है कि यह परियोजना वर्ष 2027 तक पूरी की जाए।
इस केंद्र में कौन-कौन से उद्यान होंगे?
इस केंद्र में आर्किड संरक्षण केंद्र, कमल उद्यान, फर्न उद्यान, औषधीय पौधों का उद्यान और बच्चों के खेल क्षेत्र शामिल होंगे।
इस परियोजना से स्थानीय लोगों को क्या लाभ होगा?
इस परियोजना से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और पर्यावरण-पर्यटन के जरिए उनकी आय में वृद्धि होगी।
क्या इस केंद्र का निर्माण स्थानीय सामग्रियों से होगा?
हाँ, इस केंद्र के निर्माण में स्थानीय पत्थर और लकड़ी जैसी सामग्रियों का उपयोग किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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