रांची छात्र आंदोलन पर सियासी घमासान: कांग्रेस का दावा '98% मांगें मानीं', भाजपा ने लगाए तानाशाही के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के विरुद्ध रांची में जारी छात्र आंदोलन ने 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी। जहाँ कांग्रेस और सहयोगी दल झारखंड सरकार के कदमों को पर्याप्त बता रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने राज्य सरकार पर तानाशाही और विपक्षी नेताओं को नजरबंद करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस का पक्ष: गतिरोध खत्म, सरकार ने माना मांगें
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, "98 प्रतिशत मांगे मान ली गई हैं और 14वीं जेपीएससी रद्द कर दी गई है। पीटी रद्द कर दी गई है। तीन सदस्यों का इस्तीफा हो चुका है। पैसों के लेन-देन को लेकर ईडी जांच का भरोसा मुख्यमंत्री सोरेन ने दिया है।"
भगत ने यह भी कहा कि अब कोई गतिरोध नहीं बचा है और सीआईडी (CID) ने बेहद कम समय में ठोस कार्रवाई की है। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी इस आंदोलन में राजनीतिक अवसर तलाश रही है।
समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया: पूरे देश में युवाओं का अपमान
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने आंदोलन को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा, "पेपर लीक की घटनाएं पूरे देश में हुई हैं। जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र और युवा महीनों तक प्रदर्शन करते रहे। उनके हाथ-पैर तोड़े गए और यहां तक कि गोलियां चलाई गईं।"
प्रसाद ने झारखंड सरकार से आग्रह किया कि वह छात्रों की जायज माँगों पर तत्काल समझौता करे। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शासन में देशभर में युवाओं का अपमान हो रहा है और यह पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से "बहुत महंगा पड़ेगा।"
भाजपा के आरोप: बसें बंद, भाजपा अध्यक्ष नजरबंद
भाजपा सांसद कालीचरण सिंह ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार ने छात्र आंदोलन को देखते हुए रांची आने-जाने वाली सभी बसें बंद कर दी हैं, जिससे आम नागरिक — बीमार, यात्री और कामकाजी लोग — भी प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने एक और गंभीर आरोप लगाया: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू को रविवार से झारखंड पुलिस ने घर पर नजरबंद कर रखा है। सिंह ने कहा, "संसद सत्र चल रहा है और वो संसद सदस्य होने के नाते दिल्ली आना चाहते हैं, लेकिन उन्हें नजरबंद किया गया है। इससे स्पष्ट है कि झारखंड में तानाशाही से सरकार चलाई जा रही है।"
सिंह ने विपक्ष पर दोहरेपन का आरोप भी लगाया — यह सवाल उठाते हुए कि जो दल अपने शासित राज्यों में शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधार पाए, वे झारखंड में छात्रों के नाम पर राजनीति क्यों कर रहे हैं।
जदयू और भाजपा की तेलंगाना इकाई ने भी साधा निशाना
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि झारखंड सरकार के बड़े फैसले — जेपीएससी परीक्षा रद्द करना और सदस्यों के इस्तीफे स्वीकार करना — स्वयं साबित करते हैं कि परीक्षाओं में गड़बड़ी और धोखाधड़ी हुई थी। उन्होंने चेताया कि यदि एसआईटी जाँच के नाम पर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश हुई, तो छात्र इसे स्वीकार नहीं करेंगे।
भाजपा की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने कांग्रेस पर "छात्रों की गूंज" अभियान के जरिए चुनिंदा राज्यों में छात्रों को उकसाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस NDA शासित राज्यों में तो छात्र आंदोलनों को हवा देती है, लेकिन झारखंड के छात्रों की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आक्रोश चरम पर है। झारखंड में 16 दिनों से जारी इस आंदोलन का राजनीतिक समाधान होता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। एसआईटी जाँच की दिशा और छात्रों की शेष माँगों पर सरकार का रुख इस आंदोलन का भविष्य तय करेगा।