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टीईटी छूट प्रस्ताव पास: शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू बोलीं — शिक्षकों की गरिमा से समझौता नहीं

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टीईटी छूट प्रस्ताव पास: शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू बोलीं — शिक्षकों की गरिमा से समझौता नहीं

सारांश

जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने टीईटी छूट का प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा। शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने शिक्षकों की गरिमा की दुहाई दी, डिप्टी सीएम चौधरी ने ईसीआई विवाद और भाजपा के राज्य-दर्जे के वादे पर तीखे सवाल उठाए — एक ही दिन में कई मुद्दे उबले।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने 24 सितंबर 2026 को टीईटी छूट प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजा।
शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि परीक्षा को अनिवार्य करना शिक्षकों की गरिमा का प्रश्न है; सरकार सर्वोच्च न्यायालय में भी लड़ रही है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों से 4,700 से अधिक किताबें हटाई हैं; किताब बैन पर समिति के सदस्यों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
डिप्टी सीएम सुरिंदर कुमार चौधरी ने कहा कि ईसीआई पर आरोप आयोग के दो सदस्यों ने ही लगाए हैं; पारदर्शिता की माँग की।
चौधरी ने भाजपा से जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के चुनावी वादे का हिसाब माँगा।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने 24 सितंबर 2026 को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट का प्रस्ताव पास किया, जिसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने स्पष्ट किया कि यह कदम प्रदेश के कार्यरत शिक्षकों की गरिमा और मानसिक शांति की रक्षा के लिए उठाया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि ऐसा नहीं है कि शिक्षक टीईटी नहीं दे सकते, परंतु उन्हें यह परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उनकी गरिमा (डिग्निटी) का प्रश्न है। उन्होंने कहा, 'जहाँ भी शिक्षकों की गरिमा को नुकसान पहुँचता है, हम उनके साथ खड़े हैं।'

उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि पूरे देश के शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। इसके बाद मुख्यमंत्री — जो विधि मंत्री भी हैं — ने सुझाया कि सरकार को सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना चाहिए। इट्टू के अनुसार, इसके अतिरिक्त पूरी विधानसभा ने एकजुट होकर एक प्रस्ताव पास किया और भारत सरकार को भेजा है ताकि केंद्र इस मुद्दे की संवेदनशीलता समझे।

शिक्षकों की चिंता और सरकार का रुख

इट्टू ने कहा कि शिक्षक बच्चों का भविष्य गढ़ते हैं और उन्हें अनावश्यक मानसिक तनाव में डालना उचित नहीं। उन्होंने भरोसा दिलाया, 'अगर आगे और कोई कदम उठाने की ज़रूरत होगी, हम वह भी करेंगे ताकि शिक्षकों की गरिमा को किसी भी स्तर पर आँच न आए।' सरकार पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में भी इस मामले को उठा चुकी है।

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में शिक्षा क्षेत्र में कई बड़े बदलाव एक साथ हो रहे हैं। गौरतलब है कि यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ, जो सदन में व्यापक सहमति का संकेत देता है।

किताबों पर बैन और जवाबदेही

जम्मू-कश्मीर सरकार ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों और कॉलेज पुस्तकालयों से 4,700 से अधिक किताबें हटाई हैं, जिन्हें राष्ट्र-विरोधी अथवा आपत्तिजनक सामग्री वाली बताया गया है। इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि यदि कोई पुस्तक प्रतिबंधित होती है तो उसके लिए समिति के सदस्य ही जवाबदेह होंगे।

डिप्टी सीएम का बयान और ईसीआई विवाद

डिप्टी सीएम सुरिंदर कुमार चौधरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और यहाँ के लोगों के हित में जो भी विधेयक पारित होगा, सरकार उसके साथ है। हर विधेयक की अपनी अहमियत है और यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि पारित न हुआ विधेयक महत्त्वहीन है।

चौधरी ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्षी माँग के संदर्भ में कहा कि ईसीआई पर लगे आरोप किसी राजनीतिक दल या एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि आयोग के दो सदस्यों ने ही लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ईसीआई को स्पष्ट करना चाहिए कि भारतीय लोकतंत्र में यह स्थिति क्यों उत्पन्न हुई।

चौधरी ने भाजपा से सवाल करते हुए याद दिलाया कि पार्टी ने चुनाव पूर्व वादा किया था कि सरकार बनते ही जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा — यह वादा संसद और सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी दोहराया गया था। उन्होंने कहा, 'हम भाजपा से पूछेंगे कि वह वादा कहाँ गया।'

क्या होगा आगे

विधानसभा का टीईटी प्रस्ताव अब केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है। साथ ही जम्मू-कश्मीर सरकार सर्वोच्च न्यायालय में पहले से दायर याचिका को आगे बढ़ाएगी। शिक्षकों की गरिमा का यह सवाल और राज्य के दर्जे की माँग — दोनों मुद्दे आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बने रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका कानूनी वज़न सीमित है — सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के सामने एक विधानसभा प्रस्ताव केंद्र को बाध्य नहीं करता। असली सवाल यह है कि क्या सरकार न्यायालय में ठोस तर्क पेश कर पाएगी, या यह प्रस्ताव महज राजनीतिक संदेश है। किताब-बैन और ईसीआई विवाद को एक ही सत्र में उठाना दर्शाता है कि सदन में एजेंडा अब बहुत व्यापक हो चला है — जो गहरी राजनीतिक ऊर्जा का संकेत है, लेकिन नीतिगत स्पष्टता का नहीं।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने टीईटी छूट प्रस्ताव क्यों पास किया?
विधानसभा ने यह प्रस्ताव इसलिए पास किया ताकि केंद्र सरकार को कार्यरत शिक्षकों की स्थिति की गंभीरता का एहसास हो और वे टीईटी की अनिवार्यता से उन्हें राहत दे सकें। शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू के अनुसार, यह शिक्षकों की गरिमा और मानसिक तनाव से बचाने का प्रश्न है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी जम्मू-कश्मीर सरकार टीईटी का विरोध क्यों कर रही है?
सर्वोच्च न्यायालय ने देशभर के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर सरकार का तर्क है कि वहाँ के पहले से नियुक्त और अनुभवी शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उनके सम्मान के विरुद्ध है। सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में भी इस मामले को उठाया है और विधानसभा प्रस्ताव के साथ-साथ न्यायिक रास्ते पर भी आगे बढ़ेगी।
जम्मू-कश्मीर में 4,700 से अधिक किताबें क्यों हटाई गईं?
जम्मू-कश्मीर सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों और कॉलेज पुस्तकालयों से वे पुस्तकें हटाई हैं जिन्हें राष्ट्र-विरोधी अथवा आपत्तिजनक सामग्री वाली बताया गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि इस प्रक्रिया में निर्धारित समिति के सदस्य जवाबदेह होंगे।
ईसीआई प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग किसने और क्यों उठाई?
विपक्ष ने ईसीआई प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग उठाई है। डिप्टी सीएम सुरिंदर कुमार चौधरी ने कहा कि जब आयोग के दो सदस्य ही आरोप लगाएँ, तो ईसीआई को खुलकर स्पष्टीकरण देना चाहिए क्योंकि यह संस्था लोकतंत्र की नींव है।
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने का भाजपा का वादा क्या था?
भाजपा ने चुनाव से पहले वादा किया था कि सरकार बनते ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा। यह वादा संसद और सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी दोहराया गया था। डिप्टी सीएम चौधरी ने इस वादे का हिसाब माँगते हुए कहा कि सरकार इस पर जवाब देगी।
राष्ट्र प्रेस
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