वाईएसआरसीपी की मांग: सीनियर इन-सर्विस शिक्षकों को टीईटी से मिले छूट, RTE अधिनियम में हो संशोधन
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर माँग की कि 20 से 30 वर्षों की सेवा पूरी कर चुके वरिष्ठ इन-सर्विस शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट दी जाए। पार्टी ने इस उद्देश्य के लिए 'शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम' की धारा 23 में संशोधन और सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित फैसले की समीक्षा का भी आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल थे
इस शिष्टमंडल में सांसद गोला बाबूराव, पीवी मिथुन रेड्डी, वाईएस अविनाश रेड्डी, मड्डिला गुरुमूर्ति, शिक्षक एमएलसी एमवी रामचंद्र रेड्डी, पर्वता रेड्डी, चंद्रशेखर रेड्डी और कल्पलता रेड्डी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश की समीक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ, जिसमें टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था।
मुख्य तर्क: अनुभवी शिक्षकों पर अनुचित बोझ
वाईएसआरसीपी नेताओं ने तर्क दिया कि जो शिक्षक 2011 से पहले सेवा में आए और जिनकी आयु अब 50 वर्ष या उससे अधिक है, उन्हें दशकों की कक्षा-सेवा के बावजूद ऑनलाइन परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा अपरिहार्य हो, तो वह ऑफलाइन और केवल संबंधित विषय तक सीमित होनी चाहिए।
प्रभावित शिक्षकों की संख्या
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए वाईएसआरसीपी नेताओं ने बताया कि यह मुद्दा अकेले आंध्र प्रदेश में लगभग एक लाख शिक्षकों को प्रभावित करता है और पूरे देश में यह संख्या लाखों में है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार ने अब तक सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका क्यों नहीं दायर की और केंद्र की एनडीए सरकार ने RTE अधिनियम की धारा 23 में संशोधन क्यों नहीं किया।
नौकरी और प्रमोशन पर मँडराता संकट
वाईएसआरसीपी ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों के पास टीईटी योग्यता हासिल करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय है, फिर भी उन्हें नौकरी की सुरक्षा और पदोन्नति को लेकर अनावश्यक दबाव में रखा जा रहा है। पार्टी ने माँग की कि राज्य विधानसभा इस छूट के पक्ष में एक औपचारिक प्रस्ताव पारित करे।
आगे की रणनीति
वाईएसआरसीपी ने घोषणा की कि वह संसद में यह मुद्दा उठाएगी और यदि आवश्यकता पड़ी तो 'प्राइवेट मेंबर बिल' भी पेश करेगी। पार्टी ने स्पष्ट किया कि इन-सर्विस शिक्षकों के हक में उसकी कानूनी और विधायी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक ठोस राहत नहीं मिल जाती। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती है और सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।