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वाईएसआरसीपी की मांग: सीनियर इन-सर्विस शिक्षकों को टीईटी से मिले छूट, RTE अधिनियम में हो संशोधन

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वाईएसआरसीपी की मांग: सीनियर इन-सर्विस शिक्षकों को टीईटी से मिले छूट, RTE अधिनियम में हो संशोधन

सारांश

वाईएसआरसीपी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मिलकर माँग रखी कि 20-30 साल की सेवा दे चुके और 50 पार के शिक्षकों को टीईटी से छूट मिले। आंध्र प्रदेश में करीब एक लाख शिक्षक प्रभावित हैं। पार्टी ने संसद में प्राइवेट मेंबर बिल तक लाने की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी के प्रतिनिधिमंडल ने 13 अगस्त 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर सीनियर इन-सर्विस शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की माँग की।
माँग में RTE अधिनियम की धारा 23 में संशोधन और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की समीक्षा शामिल है।
अकेले आंध्र प्रदेश में लगभग एक लाख शिक्षक प्रभावित; देशभर में संख्या लाखों में।
2011 से पहले सेवा में आए और 50 वर्ष या अधिक आयु के शिक्षकों को परीक्षा से बाध्य करना अनुचित — वाईएसआरसीपी।
योग्यता हासिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2028 ; पार्टी ने संसद में प्राइवेट मेंबर बिल लाने की भी चेतावनी दी।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर माँग की कि 20 से 30 वर्षों की सेवा पूरी कर चुके वरिष्ठ इन-सर्विस शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट दी जाए। पार्टी ने इस उद्देश्य के लिए 'शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम' की धारा 23 में संशोधन और सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित फैसले की समीक्षा का भी आग्रह किया।

प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल थे

इस शिष्टमंडल में सांसद गोला बाबूराव, पीवी मिथुन रेड्डी, वाईएस अविनाश रेड्डी, मड्डिला गुरुमूर्ति, शिक्षक एमएलसी एमवी रामचंद्र रेड्डी, पर्वता रेड्डी, चंद्रशेखर रेड्डी और कल्पलता रेड्डी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश की समीक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ, जिसमें टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था।

मुख्य तर्क: अनुभवी शिक्षकों पर अनुचित बोझ

वाईएसआरसीपी नेताओं ने तर्क दिया कि जो शिक्षक 2011 से पहले सेवा में आए और जिनकी आयु अब 50 वर्ष या उससे अधिक है, उन्हें दशकों की कक्षा-सेवा के बावजूद ऑनलाइन परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा अपरिहार्य हो, तो वह ऑफलाइन और केवल संबंधित विषय तक सीमित होनी चाहिए।

प्रभावित शिक्षकों की संख्या

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए वाईएसआरसीपी नेताओं ने बताया कि यह मुद्दा अकेले आंध्र प्रदेश में लगभग एक लाख शिक्षकों को प्रभावित करता है और पूरे देश में यह संख्या लाखों में है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार ने अब तक सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका क्यों नहीं दायर की और केंद्र की एनडीए सरकार ने RTE अधिनियम की धारा 23 में संशोधन क्यों नहीं किया।

नौकरी और प्रमोशन पर मँडराता संकट

वाईएसआरसीपी ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों के पास टीईटी योग्यता हासिल करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय है, फिर भी उन्हें नौकरी की सुरक्षा और पदोन्नति को लेकर अनावश्यक दबाव में रखा जा रहा है। पार्टी ने माँग की कि राज्य विधानसभा इस छूट के पक्ष में एक औपचारिक प्रस्ताव पारित करे।

आगे की रणनीति

वाईएसआरसीपी ने घोषणा की कि वह संसद में यह मुद्दा उठाएगी और यदि आवश्यकता पड़ी तो 'प्राइवेट मेंबर बिल' भी पेश करेगी। पार्टी ने स्पष्ट किया कि इन-सर्विस शिक्षकों के हक में उसकी कानूनी और विधायी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक ठोस राहत नहीं मिल जाती। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती है और सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उन शिक्षकों पर इसे लागू करना जो दशकों से कक्षाओं में पढ़ा रहे हैं, नीतिगत कठोरता का उदाहरण है। विडंबना यह है कि जिस RTE अधिनियम को बच्चों के हक में बनाया गया, उसकी एक धारा अनुभवी शिक्षकों के रोज़गार पर संकट बन गई है। वाईएसआरसीपी की माँग राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, परंतु इसमें एक वैध नीतिगत प्रश्न भी है — क्या अनुभव और प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन, परीक्षा-आधारित योग्यता का विकल्प हो सकता है? केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की चुप्पी इस मुद्दे पर जवाबदेही से बचने जैसी प्रतीत होती है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाईएसआरसीपी ने टीईटी छूट की माँग क्यों की है?
वाईएसआरसीपी का तर्क है कि जो शिक्षक 2011 से पहले सेवा में आए और 20 से 30 साल पढ़ा चुके हैं, उन्हें 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र में टीईटी पास करने के लिए बाध्य करना अव्यावहारिक और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से RTE अधिनियम में संशोधन और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की समीक्षा की माँग की है।
टीईटी से कितने शिक्षक प्रभावित हैं?
वाईएसआरसीपी नेताओं के अनुसार अकेले आंध्र प्रदेश में लगभग एक लाख इन-सर्विस शिक्षक इस मुद्दे से प्रभावित हैं और पूरे देश में यह संख्या लाखों में है। ये वे शिक्षक हैं जिन्हें 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
RTE अधिनियम की धारा 23 में संशोधन की माँग क्यों है?
RTE अधिनियम की धारा 23 शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता तय करती है, जिसके तहत सर्वोच्च न्यायालय ने टीईटी को अनिवार्य ठहराया था। वाईएसआरसीपी चाहती है कि इस धारा में संशोधन कर वरिष्ठ इन-सर्विस शिक्षकों को इससे छूट दी जाए ताकि उनकी नौकरी और पदोन्नति सुरक्षित रह सके।
वाईएसआरसीपी आगे क्या कदम उठाएगी?
पार्टी ने घोषणा की है कि वह संसद में यह मुद्दा उठाएगी और ज़रूरत पड़ने पर 'प्राइवेट मेंबर बिल' पेश करेगी। साथ ही उसने माँग की है कि राज्य विधानसभा छूट के पक्ष में एक प्रस्ताव पारित करे।
क्या परीक्षा के स्वरूप में बदलाव की भी माँग है?
हाँ, वाईएसआरसीपी ने कहा कि यदि परीक्षा अनिवार्य रहती है, तो वह ऑफलाइन आयोजित होनी चाहिए और केवल उसी विषय की परीक्षा होनी चाहिए जो शिक्षक पढ़ाते हैं। सभी विषयों की ऑनलाइन परीक्षा को पार्टी ने अनुचित और भेदभावपूर्ण बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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