दिग्विजय सिंह का टीईटी अनिवार्यता पर पुनर्विचार के लिए मुख्यमंत्री को पत्र

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दिग्विजय सिंह का टीईटी अनिवार्यता पर पुनर्विचार के लिए मुख्यमंत्री को पत्र

सारांश

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शिक्षकों की टीईटी अनिवार्यता पर मुख्यमंत्री यादव से पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने आर्थिक संकट से बचाने के लिए न्यायालय में याचिका दायर करने का सुझाव भी दिया है।

Key Takeaways

  • दिग्विजय सिंह ने टीईटी अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग की।
  • टीईटी परीक्षा में असफल होने पर शिक्षकों की सेवा समाप्त हो सकती है।
  • 40-50 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षकों के लिए परीक्षा की अनिवार्यता अनुचित मानी जा रही है।
  • राज्य सरकार को शिक्षकों का पक्ष न्यायालय में रखने का सुझाव दिया गया है।
  • शिक्षकों की चिंता और आर्थिक संकट पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

भोपाल, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक पत्र भेजकर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका या क्यूरेटिव याचिका दायर करने का भी सुझाव दिया है।

दिग्विजय सिंह ने पत्र में उल्लेख किया कि वर्ष 2009 में केंद्र सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया था, जिसे मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल 2010 से लागू किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र से संबंधित मामलों में निर्णय देते हुए सभी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया है। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष शेष हैं, उन्हें इस परीक्षा से छूट दी गई है। परीक्षा में असफल होने पर उनकी सेवा समाप्त होने का संकट उत्पन्न हो सकता है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि मध्य प्रदेश शासन के शिक्षा विभाग द्वारा मार्च 2026 में जारी आदेश के अनुसार सभी शिक्षकों को टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में संभावित है। इस आदेश के कारण स्कूल शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग के दो लाख से अधिक शिक्षकों में गहरी चिंता व्याप्त है। 25 से 30 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए इस तरह की परीक्षा का अनिवार्य होना अनुचित है। असफलता की स्थिति में हजारों शिक्षकों की आजीविका संकट में पड़ सकती है और उनके परिवारों के सामने आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही 40 से 50 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षकों के लिए इस तरह की परीक्षा की अनिवार्यता भी न्यायसंगत नहीं है।

दिग्विजय सिंह ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि प्रभावित शिक्षक संगठनों के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दायर करने की तैयारी चल रही है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार स्वयं शिक्षकों का पक्ष न्यायालय में रखे, जिससे शिक्षकों को आर्थिक राहत मिलेगी और सरकार के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा।

पत्र में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय महाराष्ट्र राज्य से संबंधित था और मध्य प्रदेश इस मामले में पक्षकार नहीं था। इसके बावजूद राज्य में इसे लागू कर दिया गया। जबकि मध्य प्रदेश में पहले से ही व्यावसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से टीईटी के समान कठोर परीक्षा प्रणाली लागू है, जिसके आधार पर वर्ग 1, 2 और 3 के शिक्षकों की नियुक्ति की जाती रही है।

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि राज्य सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका या क्यूरेटिव याचिका दायर कर अपना पक्ष रखना चाहिए।

Point of View

NationPress
06/04/2026

Frequently Asked Questions

टीईटी का क्या मतलब है?
टीईटी का मतलब शिक्षकों की पात्रता परीक्षा है, जो शिक्षकों की योग्यता को मापने के लिए आयोजित की जाती है।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को क्या पत्र लिखा?
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से टीईटी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।
टीईटी परीक्षा में असफल होने पर क्या होता है?
टीईटी परीक्षा में असफल होने पर शिक्षकों की सेवा समाप्त हो सकती है या उन्हें सेवानिवृत्त किया जा सकता है।
क्या शिक्षकों को टीईटी से छूट मिली है?
हाँ, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष शेष हैं, उन्हें टीईटी परीक्षा से छूट दी गई है।
इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
राज्य सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने का सुझाव दिया गया है।
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