तमिलनाडु विधानसभा का सर्वसम्मत प्रस्ताव: 3.28 लाख शिक्षकों को टीईटी से छूट की माँग
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को सर्वसम्मति से एक विशेष प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से पूर्ण छूट देने का आग्रह किया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में केंद्र से बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) में आवश्यक संशोधन की भी माँग की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए बताया कि टीईटी की अनिवार्यता लागू होने के बाद करीब 3.28 लाख कार्यरत शिक्षक अनिश्चितता की स्थिति में आ गए हैं। इन शिक्षकों की भर्ती टीईटी व्यवस्था लागू होने से पहले के नियमों और प्रक्रियाओं के तहत हुई थी। विधानसभा अध्यक्ष जेसीटी प्रभाकर ने ध्वनि मत के बाद प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित घोषित किया।
शिक्षकों पर असर
मंत्री राजमोहन के अनुसार, इस अनिवार्य परीक्षा ने वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा, प्रमोशन और रिटायरमेंट लाभों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि वैध भर्ती प्रक्रिया के तहत पहले से सेवा में आए शिक्षकों पर बाद में नई पात्रता शर्त थोपना अनुचित है। गौरतलब है कि इनमें से कई शिक्षक एक दशक से अधिक समय से कक्षाओं में पढ़ा रहे हैं।
सर्वदलीय समर्थन
यह प्रस्ताव तमिलनाडु विधानसभा में सभी प्रमुख दलों के समर्थन से पारित हुआ। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK), पट्टाली मक्कल काची (PMK), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के सदस्यों ने सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया। सदस्यों ने एकमत से कहा कि अनुभवी शिक्षकों को ऐसी परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए जो उनकी नियुक्ति के समय अस्तित्व में ही नहीं थी।
केंद्र से आरटीई संशोधन की माँग
प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से केंद्र सरकार से आरटीई कानून में संशोधन करने की माँग की गई है, ताकि प्रभावित शिक्षकों को कानूनी संरक्षण मिल सके। मंत्री राजमोहन ने स्पष्ट किया कि केवल राज्य सरकार के प्रशासनिक कदम टीईटी से जुड़े कानूनी पहलुओं को पूरी तरह हल करने में सक्षम नहीं हैं — इसके लिए केंद्रीय कानून में बदलाव अनिवार्य है। यह प्रस्ताव अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
आगे क्या होगा
पारित प्रस्ताव केंद्र सरकार को अग्रेषित किया जाएगा, जिसमें 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से पूर्ण छूट और आरटीई कानून में संशोधन की औपचारिक माँग होगी। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह शिक्षकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।