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आंध्र प्रदेश: टीईटी छूट मांगने पर 3 शिक्षक निलंबित, वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने की कड़ी निंदा

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आंध्र प्रदेश: टीईटी छूट मांगने पर 3 शिक्षक निलंबित, वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने की कड़ी निंदा

सारांश

टीईटी से छूट की माँग लेकर दिल्ली गए तीन शिक्षकों को आंध्र प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया — और वह भी उन आरोपों के आधार पर जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं था। वाईएसआरसीपी का कहना है यह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर सीधा हमला है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी सांसद एम.
गुरुमूर्ति ने 14 अगस्त को तीन सरकारी शिक्षकों के निलंबन की कड़ी निंदा की।
निलंबित शिक्षक — संगमेश्वर रेड्डी , वेंकटनाथ रेड्डी और अमरनाथ रेड्डी — टीईटी से छूट की माँग लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मिले थे।
निलंबन आदेशों में डीएससी अनियमितताओं में भागीदारी का आरोप लगाया गया, जिसे वाईएसआरसीपी ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया।
टीचर्स एमएलसी कल्पलता ने भी निलंबन की निंदा करते हुए तत्काल बहाली की माँग की।
यह मुद्दा लाखों नौकरीपेशा शिक्षकों को प्रभावित करने वाली टीईटी अनिवार्यता से जुड़ा है।

आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के सांसद एम. गुरुमूर्ति ने शुक्रवार, 14 अगस्त को तीन सरकारी शिक्षकों के निलंबन की कड़ी निंदा की। ये शिक्षक नौकरी कर रहे शिक्षकों के लिए अनिवार्य टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) से छूट की माँग को लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मिले थे, और इसी के बाद उन्हें निलंबित किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

वाईएसआरसीपी के आरोपों के अनुसार, स्टेट टीचर्स यूनियन (एसटीयू) के जिला अध्यक्ष संगमेश्वर रेड्डी और वाईएसआर टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि वेंकटनाथ रेड्डीअमरनाथ रेड्डी को आंध्र प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया। इससे एक दिन पहले, गुरुवार को वाईएसआरसीपी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर नौकरीपेशा वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी से छूट दिलाने की माँग रखी थी।

निलंबन आदेशों पर विवाद

सांसद गुरुमूर्ति ने कहा कि निलंबन के आदेशों में डीएससी (District Selection Committee) मुद्दे में इन शिक्षकों की कथित भागीदारी का हवाला दिया गया, जबकि तीनों शिक्षकों ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान न तो डीएससी का मुद्दा उठाया और न ही इस संबंध में कोई ज्ञापन सौंपा। उनका कहना था कि उनकी एकमात्र माँग नौकरी कर रहे शिक्षकों के लिए टीईटी से छूट की थी।

गुरुमूर्ति ने सवाल उठाया, 'उन्होंने क्या गलत किया? क्या शिक्षकों के लिए लड़ना और टीईटी से छूट का मुद्दा केंद्र सरकार के ध्यान में लाना कोई अपराध है?' उन्होंने इसे सरकार की 'बदले की भावना' वाली कार्रवाई करार देते हुए तत्काल निलंबन वापस लेने की माँग की।

टीचर्स एमएलसी कल्पलता की प्रतिक्रिया

टीचर्स एमएलसी कल्पलता ने भी इस निलंबन की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि तीनों शिक्षकों को सिर्फ इसलिए दंडित किया गया क्योंकि वे वाईएसआरसीपी सांसदों और एमएलसी के साथ केंद्रीय मंत्री के समक्ष टीईटी छूट का मुद्दा रखने में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि निलंबन आदेशों में गलत तरीके से यह दर्ज किया गया कि शिक्षकों ने डीएससी अनियमितताओं से जुड़ी किसी रैली में भाग लिया, जो तथ्यात्मक रूप से असत्य है।

आम शिक्षकों पर असर

कल्पलता ने कहा कि टीईटी का यह मुद्दा लाखों नौकरीपेशा शिक्षकों को प्रभावित करता है, और शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों को राज्य व केंद्र सरकार के सामने अपने सदस्यों की समस्याएँ उठाने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है। उनके अनुसार, ऐसे प्रतिनिधित्व पर दंड देना यह संदेश देता है कि शिक्षा विभाग को 'रेड बुक' की राजनीति के ज़रिए चलाया जा रहा है — ताकि सवाल उठाने वाले किसी भी व्यक्ति को डराया जा सके।

आगे क्या होगा

गुरुमूर्ति ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जायज चिंताएँ उठाने पर शिक्षकों को परेशान करती रही, तो शिक्षक समुदाय इसका उचित जवाब देगा। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब आंध्र प्रदेश में नौकरीपेशा शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता पहले से ही एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। निलंबन वापस लेने की माँग को लेकर शिक्षक संगठनों का दबाव आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि शिक्षकों की यात्रा का उद्देश्य केवल टीईटी छूट था, प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि टीईटी की अनिवार्यता राष्ट्रीय स्तर पर भी विवादास्पद रही है, और कई राज्यों ने वरिष्ठ नौकरीपेशा शिक्षकों को छूट दी है। जब तक सरकार निलंबन के पीछे के वास्तविक आधार को पारदर्शी तरीके से सामने नहीं रखती, तब तक यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की तरह दिखती है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश में तीन शिक्षकों को क्यों निलंबित किया गया?
तीनों शिक्षक नौकरीपेशा शिक्षकों के लिए टीईटी से छूट की माँग लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मिले थे। इसके बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया, हालाँकि निलंबन आदेशों में डीएससी अनियमितताओं में भागीदारी का आरोप लगाया गया, जिसे वाईएसआरसीपी ने गलत बताया।
टीईटी से छूट का मुद्दा क्या है और यह क्यों मायने रखता है?
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) को नौकरी कर रहे शिक्षकों के लिए भी अनिवार्य किया गया है, जिससे लाखों वरिष्ठ शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। वाईएसआरसीपी की माँग है कि पहले से सेवारत और अनुभवी शिक्षकों को इस परीक्षा से छूट दी जाए।
वाईएसआरसीपी ने केंद्र सरकार से क्या माँग की है?
वाईएसआरसीपी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर माँग की कि नौकरी कर रहे वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए। साथ ही, पार्टी ने तीनों निलंबित शिक्षकों की तत्काल बहाली की भी माँग की है।
निलंबित शिक्षक कौन हैं?
निलंबित तीन शिक्षकों में स्टेट टीचर्स यूनियन (एसटीयू) के जिला अध्यक्ष संगमेश्वर रेड्डी और वाईएसआर टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि वेंकटनाथ रेड्डी व अमरनाथ रेड्डी शामिल हैं।
टीचर्स एमएलसी कल्पलता ने इस मामले में क्या कहा?
टीचर्स एमएलसी कल्पलता ने निलंबन की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि शिक्षकों को केवल इसलिए दंडित किया गया क्योंकि वे केंद्रीय मंत्री के सामने टीईटी छूट का मुद्दा रखने में शामिल हुए थे। उन्होंने निलंबन आदेशों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया और तत्काल वापसी की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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