26 जुलाई 2026
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डीएससी भर्ती अनियमितताओं पर वाईएसआरसीपी का हमला: नारा लोकेश के इस्तीफे और सीबीआई जांच की माँग

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डीएससी भर्ती अनियमितताओं पर वाईएसआरसीपी का हमला: नारा लोकेश के इस्तीफे और सीबीआई जांच की माँग

सारांश

आंध्र प्रदेश में डीएससी शिक्षक भर्ती विवाद अब सीधे शिक्षा मंत्री नारा लोकेश तक पहुँच गया है। वाईएसआरसीपी का आरोप है कि टीईटी नियमों को दरकिनार कर 3.5 लाख अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रिया में धाँधली हुई। जगन ने एक्स पर सीधे पूछा — क्या लोकेश इस्तीफा देंगे?

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश से तत्काल इस्तीफे और सीबीआई जांच की माँग की।
आरोप है कि डीएससी भर्ती में टीईटी उत्तीर्ण न होने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्तियाँ दी गईं, जो अधिसूचना की शर्तों का उल्लंघन है।
डीएससी के तहत नौकरी पा चुके कई अभ्यर्थी कथित तौर पर अब टीईटी परीक्षा दे रहे हैं।
लगभग 3.5 लाख अभ्यर्थी इस भर्ती प्रक्रिया से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस.
जगन मोहन रेड्डी ने एक्स पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री एन.
चंद्रबाबू नायडू से सीधे जवाबदेही माँगी।
'तल्लिकी वंदनम' योजना से 20 लाख से अधिक लाभार्थियों को बाहर किए जाने का भी आरोप।

आंध्र प्रदेश में जिला चयन समिति (डीएससी) के तहत शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित गंभीर अनियमितताओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने राज्य के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने और पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की माँग की है। यह माँग ऐसे समय में उठी है जब केंद्र में नीट पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को विपक्ष मिसाल के तौर पर पेश कर रहा है।

मुख्य आरोप: टीईटी नियमों की अनदेखी

वाईएसआरसीपी के एमएलसी पी. चंद्रशेखर रेड्डी ने रविवार, 26 जुलाई को नेल्लोर में मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि डीएससी की अधिसूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि केवल शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ही भर्ती के लिए पात्र माना जाएगा। उनके अनुसार, इस शर्त की खुलेआम अनदेखी करते हुए ऐसे उम्मीदवारों को नियुक्तियाँ दी गईं जो टीईटी उत्तीर्ण नहीं थे।

चंद्रशेखर रेड्डी ने दावा किया कि डीएससी के तहत नौकरी पा चुके कई अभ्यर्थी अब टीईटी परीक्षा दे रहे हैं — जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नियुक्तियाँ नियमों को दरकिनार कर की गईं। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय ने निर्देश दिया है कि शारीरिक शिक्षा निदेशकों को छोड़कर सभी शिक्षकों के लिए टीईटी योग्यता अनिवार्य है।

भर्ती प्रक्रिया में बहुस्तरीय गड़बड़ी का आरोप

एमएलसी ने आरोप लगाया कि अनियमितताएँ केवल पात्रता तक सीमित नहीं हैं — प्रश्नपत्र तैयार करने, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और नियुक्ति प्रक्रिया में भी कई स्तरों पर गड़बड़ी हुई है। उनके अनुसार, लगभग 3.5 लाख अभ्यर्थी इस भर्ती प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को व्यापक रूप से कमजोर किया गया है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा शुरू की गई 'नाडु-नेडु' योजना, अंग्रेजी माध्यम शिक्षा और अन्य सुधारात्मक पहलों को बंद कर दिया गया है।

जगन मोहन रेड्डी का एक्स पोस्ट: सीधा सवाल

वाईएसआरसीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने शनिवार रात सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर नारा लोकेश के इस्तीफे की माँग की। उन्होंने लिखा, "नीट पेपर लीक मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा देकर जवाबदेही की मिसाल पेश की है। अब आंध्र प्रदेश में भी यही सवाल उठता है कि लगभग 3.5 लाख अभ्यर्थियों से जुड़ी डीएससी परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के बीच क्या शिक्षा मंत्री नारा लोकेश नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देंगे? या फिर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू जवाबदेही के बजाय अपने बेटे का बचाव करेंगे?"

'तल्लिकी वंदनम' योजना पर भी निशाना

चंद्रशेखर रेड्डी ने दावा किया कि 'तल्लिकी वंदनम' योजना को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप लागू नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि बजट सीमा के चलते 20 लाख से अधिक संभावित लाभार्थियों को इस योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया है। गौरतलब है कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की माताओं को वित्तीय सहायता देने के लिए बनाई गई थी।

आगे क्या होगा

फिलहाल राज्य सरकार या शिक्षा मंत्री नारा लोकेश की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वाईएसआरसीपी के दबाव और न्यायालय के पूर्व निर्देशों के मद्देनजर यह मामला विधानसभा के अगले सत्र में भी गूँजने की संभावना है। सीबीआई जांच की माँग पर केंद्र सरकार का रुख अभी स्पष्ट नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह प्रशासनिक चूक से कहीं आगे की बात होगी। दूसरी ओर, यह भी ध्यान देने योग्य है कि ये आरोप उस पार्टी की ओर से आ रहे हैं जो हाल ही में सत्ता खो चुकी है — इसलिए सीबीआई जांच की माँग की राजनीतिक प्रेरणा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निष्पक्ष जांच ही एकमात्र रास्ता है जो 3.5 लाख अभ्यर्थियों के हित में होगा।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश डीएससी भर्ती विवाद क्या है?
आंध्र प्रदेश में जिला चयन समिति (डीएससी) के तहत शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का विवाद है, जिसमें आरोप है कि टीईटी उत्तीर्ण न होने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्तियाँ दी गईं। लगभग 3.5 लाख अभ्यर्थी इस प्रक्रिया से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
वाईएसआरसीपी नारा लोकेश का इस्तीफा क्यों माँग रही है?
वाईएसआरसीपी का कहना है कि शिक्षा मंत्री नारा लोकेश की देखरेख में डीएससी भर्ती में टीईटी नियमों की अनदेखी हुई और भर्ती प्रक्रिया के कई चरणों में अनियमितताएँ हुईं। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को मिसाल बताते हुए नैतिक जिम्मेदारी लेने की माँग की है।
टीईटी और डीएससी भर्ती का क्या संबंध है?
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना सरकारी शिक्षक पदों के लिए अनिवार्य है और डीएससी की अधिसूचना में भी यही शर्त थी। आरोप है कि इस शर्त को दरकिनार कर बिना टीईटी योग्यता वाले उम्मीदवारों को नियुक्त किया गया, और अब वे पद मिलने के बाद टीईटी परीक्षा दे रहे हैं।
जगन मोहन रेड्डी ने एक्स पर क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने एक्स पर पोस्ट कर पूछा कि क्या नारा लोकेश डीएससी अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देंगे, या मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू जवाबदेही के बजाय अपने बेटे का बचाव करेंगे।
इस मामले में सीबीआई जांच की माँग क्यों की जा रही है?
वाईएसआरसीपी का कहना है कि प्रश्नपत्र निर्माण, उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन और नियुक्ति प्रक्रिया — सभी स्तरों पर अनियमितताएँ हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच के लिए राज्य एजेंसी पर्याप्त नहीं है। इसलिए केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से जांच की माँग की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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