मेगा डीएससी-2025 घोटाला: वाईएसआरसीपी का आरोप — पुलिस दमन से सच नहीं छुपेगा, लोकेश इस्तीफा दें
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के राज्य समन्वयक सज्जाला रामकृष्ण रेड्डी ने सोमवार, 10 अगस्त को अमरावती में चंद्रबाबू नायडू सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार 'मेगा डीएससी-2025' भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं को उजागर करने की माँग करने वाले छात्रों, बेरोजगार युवाओं और विपक्षी नेताओं के खिलाफ पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है। उनका कहना है कि ठोस सवालों का जवाब देने की बजाय सरकार दमन का रास्ता अपना रही है।
मुख्य आरोप और उठाए गए सवाल
सज्जाला ने कई विशिष्ट प्रश्न सार्वजनिक रूप से उठाए। उनका पहला सवाल यह था कि प्रश्न-पत्र तैयार करने और परीक्षा प्रबंधन की जिम्मेदारी एससीईआरटी (SCERT) को क्यों सौंपी गई। दूसरा, गोपनीय डिजिटल कार्य आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से क्यों कराया गया। तीसरा, एससीईआरटी के आउटसोर्सिंग कर्मचारी पुरामा नवीन को बाद में मेरिट सूची से क्यों हटाया गया।
उन्होंने उन उम्मीदवारों का मामला भी उठाया जिन्हें 1:1 के अनुपात में साक्षात्कार के लिए बुलाया गया, प्रमाण-पत्र सत्यापन में उत्तीर्ण भी घोषित किया गया, किंतु नियुक्ति नहीं दी गई। साथ ही, पारदर्शी मेरिट-कम-रोस्टर सूची सार्वजनिक न करने पर भी सवाल उठाए।
स्पोर्ट्स कोटा में कथित अनियमितताएँ
सज्जाला के अनुसार, स्पोर्ट्स कोटा में एक व्यापक पैटर्न सामने आया है। उनका आरोप है कि विशेष सरकारी आदेशों (जीओ) के जरिए लिखित परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त की गई, डीएससी परीक्षा के बिना ही शिक्षक पद भरे गए, और भर्ती पूरी होते ही परीक्षा की शर्त फिर से लागू कर दी गई।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि खेल प्रमाण-पत्रों में हेरफेर, अलग-अलग व्यक्तियों के दस्तावेजों का एक साथ उपयोग, अनियमितताएँ उजागर होने के बाद वेबसाइट से छेड़छाड़, और शिक्षक पदों के लिए कथित रूप से धन के लेन-देन — इन सभी मामलों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
विरोध प्रदर्शनों पर दमन का आरोप
सज्जाला ने कहा कि पिछले 70-75 दिनों में आयोजित लगभग 10 कार्यक्रमों को मिल रही व्यापक जन-प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि यह मुद्दा आम लोगों की वास्तविक पीड़ा से जुड़ा है। उनका दावा है कि शांतिपूर्ण क्रमिक भूख हड़ताल, रैलियों और विरोध प्रदर्शनों को नोटिस, नजरबंदी, झूठे मुकदमों और गिरफ्तारियों के जरिए दबाया जा रहा है।
कुप्पम, पुलिवेंदुला, ताड़ीपत्री और अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में लगाई गई पाबंदियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस को सत्ताधारी दल की रक्षा के लिए 'किराए की फोर्स' की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
वाईएसआरसीपी की माँगें
सज्जाला ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक चार माँगें पूरी नहीं होतीं: शिक्षा मंत्री नारा लोकेश का इस्तीफा, मेगा डीएससी-2025 की सीबीआई जाँच के आदेश, फीस प्रतिपूर्ति और वसति दीवेना के बकाया भुगतान, तथा वादा किए गए ₹3,000 मासिक बेरोजगारी भत्ते का क्रियान्वयन।
उन्होंने कहा, 'इनकार, पलटवार, झूठा प्रचार, पुलिस केस और गिरफ्तारियाँ सबूतों को मिटा नहीं सकतीं। हम डीएससी में हुई गड़बड़ियों का पूरी तरह पर्दाफाश करेंगे और तब तक संघर्ष जारी रखेंगे जब तक छात्रों और बेरोजगार युवाओं को न्याय नहीं मिल जाता।'
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब आंध्र प्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। आगे की कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।