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डीएससी घोटाले पर जगन का चंद्रबाबू से तीखा सवाल: 'क्या आप नैतिक जिम्मेदारी लेंगे?'

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डीएससी घोटाले पर जगन का चंद्रबाबू से तीखा सवाल: 'क्या आप नैतिक जिम्मेदारी लेंगे?'

सारांश

डीएससी भर्ती कांड पर जगन मोहन रेड्डी ने लगातार तीसरे दिन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को घेरा — सात चरणों की सत्यापन प्रक्रिया के बाद भी अयोग्यता, और 'अनजाने में मिली नौकरी' जैसे सवाल उठाकर। CBI जाँच और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे की माँग तेज़ होती जा रही है।

मुख्य बातें

जगन मोहन रेड्डी ने 14 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर CM चंद्रबाबू नायडू से डीएससी घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी लेने का सवाल किया।
एक अभ्यर्थी को 65 टीईटी अंक के साथ पद आवंटन और सात चरणों की सत्यापन प्रक्रिया के बाद भी DEO ने अयोग्य ठहराया — यह प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल है।
जगन ने CBI जाँच और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे की माँग की है।
यह लगातार तीन दिनों — शनिवार, रविवार और सोमवार — की सार्वजनिक आलोचना का हिस्सा है।
CM नायडू के कार्यालय ने अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आंध्र प्रदेश में डिस्ट्रिक्ट सेलेक्शन कमेटी (DSC) के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने सोमवार, 14 सितंबर 2026 को एक बार फिर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर सीधा हमला बोला। जगन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के ज़रिए मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या वे डीएससी में मौजूदा कथित घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी लेंगे। उनका कहना है कि जब परीक्षाओं की विश्वसनीयता खत्म होती है, तो लाखों अभ्यर्थियों के सपने भी चूर हो जाते हैं।

जगन ने एक्स पर क्या कहा

जगन मोहन रेड्डी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि लाखों अभ्यर्थी निष्पक्ष अवसर की उम्मीद में अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष और परिवार की मेहनत की कमाई दांव पर लगाते हैं। उनके अनुसार, जब व्यवस्था उन्हें निराश करती है, तो असर केवल परिणामों तक सीमित नहीं रहता — पूरी भर्ती प्रक्रिया पर से अभ्यर्थियों का भरोसा उठ जाता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'निष्पक्षता कोई विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। क्या आपको नहीं लगता कि उनकी मेहनत निष्पक्षता और भविष्य में जवाबदेही की हकदार है? क्या आप डीएससी में मौजूदा घोटाले की जिम्मेदारी लेंगे?' यह उनकी ओर से कथित अनियमितताओं पर सोशल मीडिया पर की जा रही पोस्टों की श्रृंखला में नवीनतम है।

सात चरणों की सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल

जगन ने एक विशेष मामले का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि कथित तौर पर एक अभ्यर्थी को 65 टीईटी अंक के साथ पद आवंटित किया गया और वह सात चरणों की सत्यापन प्रक्रिया से भी गुज़रा। इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने उसे बाद में अयोग्य घोषित कर दिया।

उन्होंने पूछा कि यदि अभ्यर्थी सात चरणों से गुज़रा, तो आखिर उन चरणों में सत्यापित क्या हुआ? इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अभ्यर्थी ने कथित तौर पर कहा कि उसे खुद नहीं पता था कि उसे नौकरी कैसे मिली — यह पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है।

लोकेश के इस्तीफे और CBI जांच की मांग

जगन मोहन रेड्डी लगातार यह माँग कर रहे हैं कि डीएससी भर्ती में कथित अनियमितताओं की जाँच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। साथ ही वे शिक्षा मंत्री नारा लोकेश — जो मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के पुत्र हैं — के इस्तीफे की भी माँग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि यह उनकी तरफ से इस मसले पर लगातार तीसरे दिन की सार्वजनिक आलोचना है। रविवार को भी उन्होंने लिखा था, 'एक शिक्षक पद। इस डीएससी घोटाले में कई उतार-चढ़ाव।' और शनिवार को उन्होंने कहा था कि शिक्षक अभ्यर्थियों का करियर सरकार के लिए मजाक बनकर रह गया है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) नीत गठबंधन सरकार को शासन की विश्वसनीयता स्थापित करने की चुनौती का सामना है। जगन की विपक्षी रणनीति स्पष्ट रूप से सार्वजनिक रोज़गार प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को केंद्र में रखकर युवा मतदाताओं तक पहुँचने की है।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू या उनके कार्यालय की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में सरकार किस तरह जवाब देती है और क्या CBI जाँच की माँग को राजनीतिक समर्थन मिलता है — यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

ये प्रशासनिक जवाबदेही पर वास्तविक प्रश्नचिह्न हैं। दूसरी ओर, यह ध्यान देने योग्य है कि जगन स्वयं पाँच वर्षों के अपने कार्यकाल में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर विवादों से अछूते नहीं रहे — इसलिए जनता के लिए यह पहचानना ज़रूरी है कि आरोप लगाने वाले की अपनी साख क्या है। असली कसौटी यह है कि क्या CBI जाँच की माँग को न्यायिक या राजनीतिक स्तर पर समर्थन मिलता है, या यह चुनावी बयानबाज़ी तक ही सिमटी रहती है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश का DSC घोटाला क्या है?
आंध्र प्रदेश के DSC (डिस्ट्रिक्ट सेलेक्शन कमेटी) घोटाले में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप है, जिसमें अपात्र अभ्यर्थियों को पद मिलना और सत्यापन प्रक्रिया की खामियाँ शामिल हैं। विपक्षी नेता जगन मोहन रेड्डी इसे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला बता रहे हैं।
जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू से क्या माँग की है?
जगन ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से DSC घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी लेने की माँग की है। साथ ही उन्होंने CBI से गहन जाँच और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे की माँग भी की है।
नारा लोकेश कौन हैं और उनका इस मामले से क्या संबंध है?
नारा लोकेश आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री हैं और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के पुत्र हैं। DSC भर्ती प्रक्रिया शिक्षा मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए जगन उनसे इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।
सात चरणों की सत्यापन प्रक्रिया पर क्या सवाल उठाए गए हैं?
जगन ने आरोप लगाया कि एक अभ्यर्थी 65 टीईटी अंकों के साथ सात चरणों की सत्यापन प्रक्रिया पार करके पद पाने के बाद DEO द्वारा अयोग्य घोषित किया गया। उन्होंने पूछा कि यदि सात चरणों में कुछ सत्यापित नहीं हुआ, तो प्रक्रिया का औचित्य क्या था।
क्या CM चंद्रबाबू नायडू ने इन आरोपों का जवाब दिया है?
अभी तक मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू या उनके कार्यालय की ओर से इन विशेष आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से और तीव्र होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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