मेगा डीएससी घोटाला: जगन ने चंद्रबाबू पर लगाया बेटे नारा लोकेश को बचाने का आरोप, सीबीआई जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 4 सितंबर 2026 को मेगा डीएससी शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नायडू अपने बेटे और राज्य के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश को बचाने के लिए मामले की सीबीआई जांच से बच रहे हैं। जगन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर यह सवाल उठाया कि जब भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी मिलने के प्रमाण सामने आ रहे हैं, तब भी सरकार जांच को केंद्रीय एजेंसी को क्यों नहीं सौंप रही।
मुख्य आरोप: अयोग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने एक ठोस उदाहरण सामने रखा। उनके अनुसार कुरनूल जिले में एक बीसी वर्ग के उम्मीदवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में न्यूनतम 75 अंक लाने की अनिवार्यता थी, लेकिन उस उम्मीदवार के केवल 65 अंक थे। इसके बावजूद उसे खेल कोटा के तहत सहायक ग्राम शिक्षक (एसजीटी) पद पर नियुक्त कर दिया गया। जगन ने सवाल किया कि जब प्रमाणपत्रों के व्यक्तिगत सत्यापन में अयोग्यता स्पष्ट थी, तो इस उम्मीदवार ने सभी चरण कैसे पार किए और कौन-सी 'अदृश्य ताकत' इसके पीछे काम कर रही थी।
उन्होंने दावा किया कि डीएससी-2025 भर्ती में राज्य के कई जिलों में इसी प्रकार नियमों का उल्लंघन हुआ है। जगन के अनुसार मेगा डीएससी योग्य उम्मीदवारों के साथ 'धोखा' साबित हुई है और सरकार सत्ता, झूठ तथा प्रचार के जरिए शिक्षा मंत्री नारा लोकेश को बचाने की कोशिश कर रही है।
एपीपीएससी भर्ती पर भी उठाए सवाल
जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया कि डीएससी में कथित अनियमितताओं के बाद सरकार ने यही तरीका आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग (एपीपीएससी) की भर्तियों में भी अपनाया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में वित्तीय मंजूरी प्राप्त 814 वन विभाग पदों के लिए अधिसूचना जारी हो चुकी थी और मुख्य परीक्षा भी संपन्न हो गई थी। लेकिन मौजूदा सरकार ने जीओ नंबर-4 के आधार पर 40 खेल कोटा पद बिना परीक्षा, केवल प्रमाणपत्रों के आधार पर भर दिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि डीएससी में कथित गड़बड़ियाँ उजागर होने के बाद इसी तरह की अनियमितताएं सामने आने के डर से सरकार ने शेष भर्ती प्रक्रिया बीच में ही रोक दी।
सीबीआई जांच की माँग क्यों
पूर्व मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष जांच करने में सक्षम नहीं हैं। उनके मुताबिक जब परिस्थितियाँ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करती हों, तब सरकारी अधिकारियों से स्वतंत्र जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसीलिए वाईएसआरसीपी शुरू से ही सीबीआई जांच की मांग करती आई है और योग्य अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने के लिए अदालत में भी लड़ाई जारी है।
जगन ने स्पष्ट किया कि मेगा डीएससी से जुड़े समस्त पहलुओं — पेपर लीक, खेल कोटा, टीईटी पात्रता, पोस्टिंग आदेश और जीओ नंबर-4 के आधार पर हुई सभी भर्तियों — की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
युवाओं को समर्थन का भरोसा
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने पारदर्शी भर्ती और निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग कर रहे युवाओं के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि ईमानदार नौकरी अभ्यर्थियों के साथ हुए कथित अन्याय को सरकार रैलियों और प्रचार अभियानों से नहीं छिपा सकती। यह मामला अब केवल शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं रहा — यह आंध्र प्रदेश की पूरी सार्वजनिक भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है।