4 सितंबर 2026
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गोदावरी प्रदूषण: पवन कल्याण ने आंध्र पेपर मिल्स को समन के दिए आदेश, ₹21.34 करोड़ कर बकाया का भी आरोप

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गोदावरी प्रदूषण: पवन कल्याण ने आंध्र पेपर मिल्स को समन के दिए आदेश, ₹21.34 करोड़ कर बकाया का भी आरोप

सारांश

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने गोदावरी प्रदूषण के लिए आंध्र पेपर मिल्स को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए तत्काल समन और कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए। कंपनी पर प्रतिदिन 35 मिलियन लीटर दूषित अपशिष्ट छोड़ने और ₹21.34 करोड़ कर न चुकाने का आरोप है।

मुख्य बातें

पवन कल्याण ने 4 सितंबर 2026 को आंध्र पेपर मिल्स को गोदावरी नदी प्रदूषण का मुख्य कारण ठहराते हुए तत्काल समन के आदेश दिए।
कंपनी प्रतिदिन 35 मिलियन लीटर तरल अपशिष्ट छोड़ती है — राजमहेंद्रवरम के कुल प्रदूषण का लगभग 50% ।
जाँच में BOD 36 मिलीग्राम/लीटर (मानक से 20% अधिक ), सल्फाइड मानक से 70% अधिक पाया गया।
कंपनी पर स्थानीय निकायों का ₹21.34 करोड़ बकाया; 2016 से कोई कर नहीं चुकाया।
तीन महीने की बैठकों और कारण बताओ नोटिस के बावजूद कंपनी ने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया।
'स्वच्छ गोदावरी-पवित्र पुष्करालु' अभियान के तहत नागरिक समाज से सहयोग की अपील।

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं पर्यावरण मंत्री पवन कल्याण ने 4 सितंबर 2026 को आंध्र पेपर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड को राजमहेंद्रवरम (राजमुंदरी) में गोदावरी नदी के प्रदूषण का प्रमुख कारण ठहराते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को कंपनी के विरुद्ध तत्काल समन जारी करने और पर्यावरण नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजमहेंद्रवरम शहर में होने वाले कुल जल प्रदूषण का लगभग आधा हिस्सा अकेले इस कंपनी से निकलता है।

मुख्य घटनाक्रम

पवन कल्याण ने शुक्रवार को जारी बयान में बताया कि राजमहेंद्रवरम शहर से प्रतिदिन करीब 70 मिलियन लीटर तरल अपशिष्ट निकलता है, जिसमें से 35 मिलियन लीटर अकेले आंध्र पेपर मिल्स द्वारा छोड़ा जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी पिछले 10 वर्षों से कर भुगतान से बच रही है और स्थानीय निकायों का ₹21.34 करोड़ बकाया है, जिसे वर्ष 2016 से अदा नहीं किया गया।

उपमुख्यमंत्री ने महाधिवक्ता, अतिरिक्त महाधिवक्ता, सरकारी वकीलों और स्टैंडिंग काउंसिल को भी निर्देश दिए कि कंपनी से जुड़े सभी लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित किया जाए।

प्रदूषण के वैज्ञानिक साक्ष्य

जाँच में पुष्टि हुई है कि कंपनी द्वारा छोड़े जा रहे अपशिष्ट में प्रदूषक तत्व निर्धारित सीमा से काफी अधिक हैं। अपशिष्ट लैगून के पास लिए गए नमूनों में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) 36 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई, जो निर्धारित मानक से 20 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, फॉस्फेट का स्तर 5.3 मिलीग्राम और सल्फाइड का स्तर 3.4 मिलीग्राम पाया गया — जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों से क्रमशः 6 प्रतिशत और 70 प्रतिशत अधिक है।

पवन कल्याण के अनुसार, इस प्रदूषण के कारण नदी में ऑक्सीजन का स्तर घटता है, जिससे जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ता है, दुर्गंध फैलती है और गोदावरी का प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित होता है।

सरकार की प्रतिक्रिया और पूर्व चेतावनियाँ

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले तीन महीनों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने कंपनी प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें कीं और सुधारात्मक उपाय सुझाए, किंतु कंपनी की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। यह ऐसे समय में आया है जब गठबंधन सरकार ने उद्योगों को अनावश्यक कठिनाई से बचाने के उद्देश्य से पहले कारण बताओ नोटिस जारी कर सुधार का अवसर दिया था।

गौरतलब है कि पवन कल्याण ने अपने पूर्व क्षेत्रीय दौरे के दौरान भी कंपनी को भूजल प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी थी, लेकिन कंपनी ने उस पर अमल नहीं किया।

संभावित कानूनी कार्रवाई

पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के तहत कंपनी का संचालन रोकने, जुर्माना लगाने, संपत्ति जब्त करने या लाइसेंस रद्द करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा, 'मैं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश देता हूँ कि आंध्र पेपर्स लिमिटेड को तत्काल समन जारी करें और नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई करें।'

स्वच्छ गोदावरी अभियान

पवन कल्याण ने 'स्वच्छ गोदावरी-पवित्र पुष्करालु' अभियान के तहत गोदावरी नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए पर्यावरणविदों और नागरिक समाज से सरकार का सहयोग करने की अपील की। आने वाले दिनों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई और कंपनी की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोदावरी नदी प्रदूषण मामले में आंध्र पेपर मिल्स के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है?
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने 4 सितंबर 2026 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आंध्र पेपर मिल्स को तत्काल समन जारी करने और पर्यावरण नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। संभावित कार्रवाइयों में संचालन रोकना, जुर्माना, संपत्ति जब्ती या लाइसेंस रद्द करना शामिल है।
आंध्र पेपर मिल्स गोदावरी को कितना प्रदूषित कर रही है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कंपनी प्रतिदिन 35 मिलियन लीटर तरल अपशिष्ट छोड़ती है, जो राजमहेंद्रवरम शहर के कुल 70 मिलियन लीटर दैनिक अपशिष्ट का लगभग 50% है। जाँच में BOD मानक से 20%, सल्फाइड मानक से 70% और फॉस्फेट मानक से 6% अधिक पाया गया।
आंध्र पेपर मिल्स पर कर बकाया का क्या मामला है?
पवन कल्याण के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2016 से कोई कर नहीं चुकाया है और स्थानीय निकायों का ₹21.34 करोड़ बकाया है। यह आरोप पर्यावरण उल्लंघनों के अतिरिक्त है।
स्वच्छ गोदावरी-पवित्र पुष्करालु अभियान क्या है?
यह आंध्र प्रदेश सरकार का अभियान है जिसका उद्देश्य गोदावरी नदी को प्रदूषण मुक्त करना है। पवन कल्याण ने इस अभियान के तहत पर्यावरणविदों और नागरिक समाज से सरकार का सहयोग करने की अपील की है।
कंपनी को पहले भी चेतावनी दी गई थी, तो अब क्यों समन?
पिछले तीन महीनों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई बैठकें कीं और कारण बताओ नोटिस जारी किए, लेकिन कंपनी ने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया। पवन कल्याण के अनुसार, उनके पूर्व क्षेत्रीय दौरे के दौरान दी गई सलाह पर भी कंपनी ने अमल नहीं किया, जिसके बाद यह कड़ा कदम उठाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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