गोदावरी प्रदूषण: आंध्रा पेपर मिल्स पर ₹21.34 करोड़ टैक्स बकाया, राजमहेंद्रवरम में सरकार सख्त
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश सरकार ने राजमहेंद्रवरम स्थित आंध्रा पेपर लिमिटेड के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर 4 सितंबर को की गई पोस्ट में आरोप लगाया गया कि गोदावरी नदी में राजमहेंद्रवरम के कुल प्रदूषण का 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी कंपनी से आता है। सरकार के अनुसार कंपनी पर स्थानीय निकायों का ₹21.34 करोड़ का टैक्स बकाया है और लगभग 12 वर्षों से कोई भुगतान नहीं किया गया।
प्रदूषण के आँकड़े
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, राजमहेंद्रवरम शहर प्रतिदिन लगभग 70 मिलियन लीटर तरल कचरा उत्पन्न करता है, जबकि अकेली आंध्रा पेपर मिल प्रतिदिन 35 मिलियन लीटर औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ती है — यानी शहर के कुल कचरे का आधा भाग एक ही कंपनी से निकलता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जाँच में कंपनी के लैगून से लिए गए नमूनों में गंभीर गड़बड़ियाँ सामने आई हैं। बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) 36 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई, जो निर्धारित मानक से 20 प्रतिशत अधिक है। फॉस्फेट का स्तर 5.3 मिलीग्राम यानी मानक से 6 प्रतिशत और सल्फाइड 3.4 मिलीग्राम यानी मानकों से 70 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।
टैक्स चोरी के आरोप
उपमुख्यमंत्री कार्यालय की पोस्ट में कहा गया, 'वे उत्पादन तो कर रहे हैं और साथ ही प्रदूषण भी फैला रहे हैं, लेकिन टैक्स देने से बच रहे हैं। आंध्रा पेपर मिल्स ने टैक्स न चुकाकर लगभग 12 साल का समय गुजार दिया है।'
सरकार के अनुसार 2016 से न तो कटेरू ग्राम पंचायत और न ही राजमहेंद्रवरम नगर निगम को कंपनी ने एक भी रुपया टैक्स के रूप में दिया है। जब भी नोटिस जारी किए जाते हैं, कंपनी न्यायालय का सहारा लेकर भुगतान में देरी करती है। पोस्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि बिना किसी वैधानिक छूट के कंपनी ने स्वयं को टैक्स दायित्व से कैसे अलग कर लिया।
पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर
सरकार का कहना है कि इस प्रदूषण के कारण गोदावरी के जल में ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे जलीय जीवों के अस्तित्व पर संकट आ गया है। नदी का प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ रहा है, आसपास के इलाकों में दुर्गंध फैल रही है और सार्वजनिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। भूजल संरक्षण के लिए दिए गए सुझावों को भी कंपनी ने लागू नहीं किया।
सरकार की कार्रवाई और आगे की राह
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों के उल्लंघन पर फैक्ट्री बंद करने, जुर्माना लगाने, कंपनी जब्त करने और लाइसेंस रद्द करने तक की कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। हालाँकि पहले चरण में कारण बताओ नोटिस जारी कर सुधार का अवसर दिया गया। पिछले तीन महीनों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी कंपनी प्रतिनिधियों से कई बार मिले, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कंपनी को समन जारी कर रहा है और सरकार ने एडवोकेट जनरल तथा सरकारी अधिवक्ताओं को ऐसे मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही 'स्वच्छ गोदावरी, पवित्र पुष्करम' अभियान के तहत पर्यावरणविदों और नागरिक समाज से सहयोग की अपील की गई है। यह मामला अब न्यायालय और प्रशासन दोनों मोर्चों पर निर्णायक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है।