4 सितंबर 2026
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जयपुर अपहरण कांड का मास्टरमाइंड करण असवानी दुबई से गिरफ्तार, AGTF ने वापस लाया

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जयपुर अपहरण कांड का मास्टरमाइंड करण असवानी दुबई से गिरफ्तार, AGTF ने वापस लाया

सारांश

पुलिस वर्दी पहनकर अपहरण की साजिश रचने वाले गिरोह का सरगना करण असवानी करीब एक साल तक दुबई में छुपा रहा। AGTF, इंटरपोल और अबू धाबी यूनिट की संयुक्त कार्रवाई ने उसे वापस जयपुर पहुँचाया — राजस्थान पुलिस की अंतरराष्ट्रीय पहुँच का यह एक बड़ा उदाहरण है।

मुख्य बातें

जयपुर व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता अपहरण कांड के कथित मास्टरमाइंड करण असवानी उर्फ कमल सिंधी को दुबई से गिरफ्तार कर 4 सितंबर 2026 को जयपुर लाया गया।
अपहरण 20 अगस्त 2025 को हुआ था; आरोपियों ने पुलिस वर्दी पहनकर साजिश रची और पीड़ितों को आगरा सहित अनेक स्थानों पर बंधक बनाया।
पहले हर्ष गौतम , कनक गांगुली और अजय बेनीवाल उर्फ शाका गिरफ्तार हो चुके थे।
AGTF , इंटरपोल और अबू धाबी इंटरपोल यूनिट के संयुक्त ऑपरेशन में रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर उसकी लोकेशन ट्रेस की गई।
ऑपरेशन की देखरेख ADG दिनेश एमएन ने की; 31 अगस्त को पुलिस टीम दुबई रवाना हुई और आरोपी को गुरुवार देर रात जयपुर लाया गया।

राजस्थान एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने जयपुर के व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता के अपहरण कांड के कथित मास्टरमाइंड करण असवानी उर्फ कमल सिंधी को दुबई से गिरफ्तार कर 4 सितंबर 2026 को जयपुर लाया। इंटरपोल और अबू धाबी इंटरपोल यूनिट के साथ समन्वय के बाद यह गिरफ्तारी संभव हुई। आरोपी अपहरण और फिरौती मांगने के बाद भारत से फरार हो गया था और लगभग एक वर्ष बाद उसे वापस लाया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

20 अगस्त 2025 को व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता जयपुर स्थित अपने घर से वैशाली नगर के लिए निकले थे। उनके साथ एक परिचित और एक ड्राइवर भी थे। जब परिवार को उनका मोबाइल बंद मिला, तो चिंता बढ़ी। अगले दिन उसी मोबाइल से कॉल आई जिसमें अपहरण की पुष्टि कर फिरौती की माँग की गई।

21 अगस्त 2025 को खोह नागोरियन पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नरेंद्र नाथ दत्ता और उनके ड्राइवर योगेश को सफलतापूर्वक छुड़ाया। जाँच में सामने आया कि आरोपियों ने पुलिस की वर्दी पहनकर साजिश रची थी और पीड़ितों को आगरा सहित कई स्थानों पर बंधक बनाकर रखा था।

पहले गिरफ्तार हुए आरोपी

प्रारंभिक जाँच में पुलिस ने हर्ष गौतम, कनक गांगुली और अजय बेनीवाल उर्फ शाका को गिरफ्तार किया। पीड़ित की कार हर्ष गौतम के कब्जे से बरामद हुई और अपराध में इस्तेमाल वाहन भी जब्त किया गया। जाँच में यह भी स्पष्ट हुआ कि करण असवानी के संबंध एक संगठित अपराध गिरोह से थे।

अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन कैसे हुआ

जब करण असवानी की तलाश तेज हुई तो जाँचकर्ताओं को पता चला कि वह देश छोड़ दुबई भाग चुका है। इसके बाद AGTF ने जाँच का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया और अबू धाबी इंटरपोल यूनिट के साथ नियमित संपर्क बनाए रखा गया। तकनीकी निगरानी और अन्य जाँच तरीकों से उसकी लोकेशन का पता लगाकर यह जानकारी इंटरपोल टीम को दी गई, जिसके बाद अबू धाबी इंटरपोल ने उसे हिरासत में लिया।

31 अगस्त को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान पुलिस की एक टीम जयपुर से दुबई रवाना हुई। सभी कानूनी और समन्वय संबंधी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद टीम ने करण असवानी को कस्टडी में लिया और गुरुवार देर रात उसे जयपुर वापस लाया गया।

ऑपरेशन की निगरानी किसने की

यह ऑपरेशन पुलिस के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एटीएस, एएनटीएफ और एजीटीएफ) दिनेश एमएन की देखरेख में संचालित हुआ। डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल योगेश यादव और एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस सिद्धांत शर्मा ने निगरानी की। डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस रवींद्र प्रताप और इंस्पेक्टर सुनील जांगिड़राम सिंह नथावत ने अपनी-अपनी टीमों के साथ आरोपी का पता लगाने, उसके आपराधिक नेटवर्क की जानकारी जुटाने और एजेंसियों के बीच तालमेल में अहम भूमिका निभाई।

क्या होगा आगे

अब करण असवानी राजस्थान पुलिस की हिरासत में है और उससे विस्तृत पूछताछ जारी है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, उसके संगठित अपराध गिरोह के अन्य सदस्यों की भी तलाश की जा रही है। यह मामला राजस्थान में पुलिस वर्दी का दुरुपयोग कर किए गए संगठित अपहरण-फिरौती के गिरोहों पर कार्रवाई की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि आरोपी गिरफ्तारी वारंट के बावजूद देश छोड़ने में कैसे सफल रहा। भगोड़ों की विदेश यात्रा पर निगरानी की खामियाँ इस मामले में भी उजागर होती हैं। अब अदालत में आरोप-पत्र और गिरोह के पूरे नेटवर्क की जाँच ही इस ऑपरेशन की वास्तविक सफलता तय करेगी।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करण असवानी कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
करण असवानी उर्फ कमल सिंधी जयपुर के व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता के अपहरण कांड का कथित मास्टरमाइंड है। उस पर आरोप है कि उसने पुलिस वर्दी पहनकर अपहरण की साजिश रची और पीड़ित के परिवार से फिरौती माँगी।
जयपुर व्यापारी अपहरण कांड कब और कैसे हुआ?
20 अगस्त 2025 को व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता जयपुर से वैशाली नगर जाते समय अपहृत हुए। अगले दिन उनके मोबाइल से परिवार को फिरौती की माँग करते हुए कॉल आई और 21 अगस्त 2025 को खोह नागोरियन थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई।
AGTF और इंटरपोल ने आरोपी को दुबई में कैसे ढूँढा?
AGTF ने तकनीकी निगरानी और अन्य जाँच तरीकों से आरोपी की लोकेशन का पता लगाया और यह जानकारी अबू धाबी इंटरपोल यूनिट को दी। रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद अबू धाबी इंटरपोल ने उसे हिरासत में लिया और राजस्थान पुलिस की टीम 31 अगस्त को दुबई पहुँचकर उसे वापस लाई।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं?
अब तक हर्ष गौतम, कनक गांगुली और अजय बेनीवाल उर्फ शाका पहले गिरफ्तार हो चुके थे। करण असवानी की गिरफ्तारी के साथ मुख्य आरोपी भी पुलिस हिरासत में आ गया है। जाँचकर्ताओं के अनुसार गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश अभी जारी है।
इस ऑपरेशन का नेतृत्व किसने किया?
ऑपरेशन की देखरेख ADG (एटीएस, एएनटीएफ और एजीटीएफ) दिनेश एमएन ने की। DIG योगेश यादव और ASP सिद्धांत शर्मा ने निगरानी की, जबकि DSP रवींद्र प्रताप और इंस्पेक्टर सुनील जांगिड़ व राम सिंह नथावत की टीमों ने आरोपी का पता लगाने और अंतरराष्ट्रीय समन्वय में अहम भूमिका निभाई।
राष्ट्र प्रेस
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