आयुष्मान भारत भुगतान विवाद: हरियाणा सरकार ने IMA की हड़ताल चेतावनी को बताया 'अवांछित दबाव'
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने 4 सितंबर 2026 को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) हरियाणा की उस चेतावनी को सिरे से खारिज किया, जिसमें आयुष्मान भारत योजना के तहत भुगतान में कथित देरी का हवाला देते हुए निजी अस्पतालों में एक दिवसीय प्रतीकात्मक हड़ताल का नोटिस दिया गया था। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि सूचीबद्ध अस्पतालों के दावों का निपटान प्रतिमाह नियमित रूप से हो रहा है और IMA की कार्रवाई को 'सरकार पर अवांछित दबाव बनाने की कोशिश' करार दिया।
भुगतान के आँकड़े क्या कहते हैं
स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि दावों का निपटान 'पहले आओ, पहले पाओ' के सिद्धांत पर किया जाता है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों के आँकड़े इस प्रकार हैं: वित्त वर्ष 2023-24 में सूचीबद्ध अस्पतालों को लगभग ₹689.7 करोड़, 2024-25 में ₹1,234.5 करोड़ और 2025-26 में ₹1,200 करोड़ का भुगतान किया गया। चालू वित्त वर्ष में अब तक लगभग ₹570 करोड़ के दावों का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, जबकि शेष दावों की प्रक्रिया सामान्य गति से जारी है।
IMA के तर्क को प्राधिकरण ने नकारा
IMA हरियाणा ने दावा किया था कि आयुष्मान योजना में भागीदारी से निजी अस्पताल वित्तीय संकट में आ गए हैं। प्रवक्ता ने इस तर्क को आँकड़ों के आधार पर खारिज किया। उन्होंने बताया कि लगभग 200 नए अस्पतालों ने एमपैनलमेंट के लिए आवेदन किया है, जबकि करीब 75 पहले से सूचीबद्ध अस्पतालों ने नई स्पेशलिटी जोड़ने हेतु आवेदन दिया है। प्रवक्ता के अनुसार यह संख्या स्वयं यह सिद्ध करती है कि निजी अस्पतालों का भरोसा योजना पर बना हुआ है।
मरीज़ों की सेवाएँ बाधित न हों — प्रशासन सतर्क
IMA हरियाणा का एक दिवसीय प्रतीकात्मक हड़ताल का पत्र मिलते ही राज्य प्राधिकरण ने सभी जिला नोडल अधिकारियों को निर्देश जारी किए कि वे निजी अस्पतालों से संपर्क कर उन्हें सेवाएँ जारी रखने के लिए प्रेरित करें। साथ ही उन अस्पतालों के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा गया जो हड़ताल में शामिल नहीं हैं, ताकि मरीज़ों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सरकार का रुख: संवाद और समन्वय
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने दोहराया कि उसका रवैया हमेशा से सहयोगात्मक रहा है। प्राधिकरण राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के साथ मिलकर अस्पतालों की वास्तविक चिंताओं को दूर करने की दिशा में काम करता रहा है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों के लिए निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केंद्र सरकार आयुष्मान भारत के विस्तार को अपनी स्वास्थ्य नीति की धुरी मान रही है।