मध्य प्रदेश: आयुष्मान भारत 'निरामयम' योजना में धोखाधड़ी, 83 अस्पतालों पर कार्रवाई, ₹3.13 करोड़ जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत 'निरामयम' योजना में व्यापक अनियमितताएँ सामने आने के बाद जनवरी 2026 से 3 सितंबर 2026 तक राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने 83 अस्पतालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की है। इनमें 18 अस्पतालों का डी-एम्पेनेलमेंट, 15 अस्पतालों पर स्टॉप पेमेंट और 50 अस्पतालों पर कुल ₹3,13,79,311 की पेनल्टी शामिल है।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी को प्राप्त शिकायतों और जाँच रिपोर्टों के आधार पर भोपाल स्थित सिद्धांता रेडक्रॉस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर निरामयम योजना से निलंबित कर दिया गया है और उस पर स्टॉप पेमेंट की कार्रवाई भी की गई है। इसके अतिरिक्त मल्टी केयर अस्पताल, भोपाल को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है।
दो अन्य अस्पतालों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जाँच आयुष्मान भारत जाँच दल द्वारा की जा चुकी है। उपलब्ध अभिलेखों और जाँच रिपोर्टों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई जारी है।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरविंद शाह ने स्पष्ट किया कि निरामयम योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, 'इस योजना का उद्देश्य पात्र हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण, सुगम एवं पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना है।'
शाह के अनुसार अस्पतालों की नियमित जाँच, क्लेम की समीक्षा, उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण तथा संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य प्राप्त शिकायतों की भी जाँच की जा रही है और अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं। डी-एम्पेनेल किए गए अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीज़ों को अब योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा, जिससे उन्हें वैकल्पिक सुविधाएँ तलाशनी पड़ सकती हैं।
गौरतलब है कि इस तरह की धोखाधड़ी सीधे तौर पर उन लाभार्थियों को नुकसान पहुँचाती है जिनके नाम पर फर्जी या अतिरिक्त क्लेम दाखिल किए जाते हैं, और सरकारी स्वास्थ्य बजट पर अनावश्यक बोझ डालती है।
क्या होगा आगे
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने संकेत दिया है कि शेष लंबित शिकायतों की जाँच पूरी होने के बाद और अस्पतालों पर भी कार्रवाई हो सकती है। नियमित निरीक्षण और क्लेम ऑडिट की प्रक्रिया को और सख्त किए जाने की संभावना है, ताकि योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।