4 सितंबर 2026
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दादाभाई नौरोजी जयंती: गडकरी, धामी, मौर्य सहित देशभर के नेताओं ने किया नमन

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दादाभाई नौरोजी जयंती: गडकरी, धामी, मौर्य सहित देशभर के नेताओं ने किया नमन

सारांश

भारतीय राजनीति के 'ग्रैंड ओल्ड मैन' दादाभाई नौरोजी की जयंती पर 4 सितंबर को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी और यूपी के उपमुख्यमंत्री मौर्य सहित कई नेताओं ने उनके आर्थिक चिंतन और राष्ट्रसेवा को नमन किया।

मुख्य बातें

दादाभाई नौरोजी की जयंती पर 4 सितंबर को देशभर के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट कर उन्हें 'विनम्र अभिवादन' दिया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें प्रखर शिक्षाविद् और समाज सुधारक बताया।
यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ब्रिटिश शोषण के विरुद्ध उनके आर्थिक योगदान को रेखांकित किया।
बिहार मंत्री विजय कुमार सिन्हा , भाजपा विधायक मुकेश शर्मा और नेता भगवानदास सबनानी ने भी नमन किया।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के स्तंभ और राजनीति के 'ग्रैंड ओल्ड मैन' कहे जाने वाले दादाभाई नौरोजी की जयंती पर शुक्रवार, 4 सितंबर को देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय मंत्री से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तक — सभी ने उनके राष्ट्रीय योगदान को स्मरण किया।

केंद्रीय मंत्री और राज्य प्रमुखों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'महान स्वतंत्रता सेनानी दादाभाई नौरोजी जी की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन।' उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें प्रखर शिक्षाविद् और समाज सुधारक बताते हुए कहा, 'राष्ट्र की स्वतंत्रता, शिक्षा और सामाजिक जागरण के लिए आपका समर्पण हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।'

आर्थिक चिंतन को मिली विशेष स्वीकृति

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दादाभाई नौरोजी के आर्थिक विचारों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'उन्होंने ब्रिटिश शासन की शोषणकारी आर्थिक नीतियों को उजागर कर स्वराज और राष्ट्र की आर्थिक स्वतंत्रता की चेतना को सशक्त किया।' गौरतलब है कि नौरोजी का 'ड्रेन ऑफ वेल्थ' सिद्धांत भारतीय राष्ट्रवादी आर्थिक विचार की नींव माना जाता है।

बिहार और भाजपा नेताओं का नमन

बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने उन्हें 'महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद् व समाज सुधारक' बताते हुए श्रद्धांजलि दी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक मुकेश शर्मा ने कहा कि नौरोजी का राष्ट्र की स्वतंत्रता और जनसेवा के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणादायी रहेगा। भाजपा नेता भगवानदास सबनानी ने भी उनके 'प्रखर विचार और राष्ट्रसेवा की प्रेरणादायी विरासत' को याद किया।

दादाभाई नौरोजी की विरासत

दादाभाई नौरोजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और ब्रिटिश संसद में निर्वाचित होने वाले पहले भारतीय सांसद भी। उनके आर्थिक विश्लेषण ने औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध भारत की वैचारिक लड़ाई को एक ठोस आधार दिया। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब उनकी जयंती पर राजनीतिक दलों की विविध पृष्ठभूमि के नेता एकजुट होकर उन्हें स्मरण करते हैं।

आगे की दृष्टि

नौरोजी की जयंती हर वर्ष राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता संग्राम की स्मृति को ताज़ा करने का अवसर बनती है। विभिन्न दलों के नेताओं की सहभागिता यह दर्शाती है कि उनकी विरासत दलीय सीमाओं से परे आज भी प्रासंगिक बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि नौरोजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे — यह दर्शाता है कि स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर दावेदारी आज की राजनीति में कितनी केंद्रीय हो गई है। हालाँकि, श्रद्धांजलि के बयान प्रायः औपचारिक रहते हैं और नौरोजी के 'ड्रेन ऑफ वेल्थ' जैसे गहन आर्थिक विश्लेषण की वास्तविक प्रासंगिकता पर विमर्श नदारद रहता है। जब नेता उनके 'आर्थिक स्वतंत्रता' के विचार को याद करते हैं, तो यह सवाल भी उठना चाहिए कि आज की नीतियाँ उस विरासत को कितना आगे ले जाती हैं।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दादाभाई नौरोजी कौन थे और उन्हें 'ग्रैंड ओल्ड मैन' क्यों कहा जाता है?
दादाभाई नौरोजी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता, अर्थशास्त्री और शिक्षाविद् थे, जिन्हें भारतीय राजनीति का 'ग्रैंड ओल्ड मैन' कहा जाता है। वे ब्रिटिश संसद में निर्वाचित होने वाले पहले भारतीय सांसद थे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
दादाभाई नौरोजी का 'ड्रेन ऑफ वेल्थ' सिद्धांत क्या है?
नौरोजी ने अपने आर्थिक विश्लेषण में यह सिद्ध किया कि ब्रिटिश शासन भारत की संपत्ति को व्यवस्थित रूप से इंग्लैंड भेज रहा था, जिसे उन्होंने 'ड्रेन ऑफ वेल्थ' कहा। इस सिद्धांत ने भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन को एक ठोस आर्थिक आधार दिया और स्वराज की माँग को बल दिया।
4 सितंबर को किन-किन नेताओं ने दादाभाई नौरोजी को श्रद्धांजलि दी?
4 सितंबर को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बिहार मंत्री विजय कुमार सिन्हा, भाजपा विधायक मुकेश शर्मा और भाजपा नेता भगवानदास सबनानी ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
दादाभाई नौरोजी की जयंती क्यों महत्वपूर्ण है?
उनकी जयंती भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रवादी आर्थिक चिंतन की विरासत को स्मरण करने का अवसर है। नौरोजी ने शिक्षा, समाज सुधार और आर्थिक स्वतंत्रता के क्षेत्र में जो नींव रखी, वह आज भी प्रासंगिक मानी जाती है।
दादाभाई नौरोजी का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से क्या संबंध था?
दादाभाई नौरोजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और तीन बार इसके अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने कांग्रेस के शुरुआती वर्षों में संगठन को वैचारिक और आर्थिक दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।
राष्ट्र प्रेस
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